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CISF: तटों की सुरक्षा के लिए हिट रहा सीआईएसएफ का ये प्लान, खुफिया इनपुट जुटाने में मदद दे रहे तटीय प्रहरी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 19 Jan 2026 09:03 PM IST
सार

सीआईएसएफ ने ‘ग्रेट इंडियन कोस्टल साइक्लोथॉन’ के जरिए तटीय सुरक्षा को जनभागीदारी से मजबूत किया। अभियान से 20–25 हजार लोग ‘तटीय प्रहरी’ बने। ये 'तटीय प्रहरी', 'इंटेलिजेंस इनपुट' जुटाने में लोकल एवं केंद्रीय एजेंसियों की मदद कर रहे हैं।

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CISF’s Coastal Sentinel Plan Proves Effective in Securing Shorelines, Aiding Intelligence Gathering
सीआईएसएफ के डीजी प्रवीर रंजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीआईएसएफ, ने गत वर्ष अपनी स्थापना के 56 साल पूरे होने पर एक अनूठे अभियान की शुरुआत की थी। तटीय क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में लोगों को सचेत करने के लिए सीआईएसएफ ने 'ग्रेट इंडियन कोस्टल साइक्लोथॉन' का आयोजन किया था। इसके तहत सीआईएसएफ के 125 साइकिल चालकों ने 25 दिन में 6553 किलोमीटर की दूरी तय की थी। सीआईएसएफ के डीजी प्रवीर रंजन बताते हैं कि 'ग्रेट इंडियन कोस्टल साइक्लोथॉन' के नतीजे उत्साहवर्धक रहे हैं। वह 'साइक्लोथॉन' हिट रहा है। समुद्री किनारों के आसपास रहने वाले 20-25 हजार लोग, सीआईएसएफ के लिए 'तटीय प्रहरी' बनकर देश के सुरक्षा घेरे को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। ये 'तटीय प्रहरी', 'इंटेलिजेंस इनपुट' जुटाने में लोकल एवं केंद्रीय एजेंसियों की मदद कर रहे हैं। इंटेलिजेंस इनपुट को लेकर सीआईएसएफ, लोकल पुलिस के साथ समन्वय करती है। अब 28 जनवरी से सीआईएसएफ वंदे मातरम तटीय चक्रवात 2026 का दूसरे संस्करण प्रारंभ हो रहा है। इसमें 52 गांवों को सीआईएसएफ, गोद लेगी। लोगों के साथ एक लंबा रिश्ता कायम होगा। इससे सीआईएसएफ के 'आंख और कान' बनकर सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के लिए नए 'तटीय प्रहरी' आगे आएंगे। 

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सीआईएसएफ के डीजी प्रवीर रंजन के मुताबिक, कोस्टल साइक्लोथॉन, एक अच्छी एवं सार्थक पहल साबित हुई है। इस बाबत विभिन्न प्रदेशों से फीडबैक मिल रहा है। इस बार के 'वंदे मातरम तटीय चक्रवात' के दौरान 52 तटीय गांवों को गोद लिया जाएगा। वहां के लोगों से लगातार संपर्क रहेगा। उनकी समस्याओं को हल करने की कोशिश होगी। लंबे समय के इस बंधन को मजबूत बनाने के लिए सीएसआर की मदद ली जाएगी। युवाओं को उनके करियर से जुड़ी जानकारी देकर उन्हें रोजगार में लाने का प्रयास रहेगा। गत वर्ष की तरह इस बार भी कोस्टल साइक्लोथॉन के सार्थक नतीजे मिलेंगे। 
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युवाओं, महिलाओं और दूसरे आयु वर्ग के लोगों के साथ तटीय सुरक्षा को लेकर बातचीत की जाएगी। तटों पर होने वाली गतिविधियों के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी वहां के स्थानीय लोगों को होती है, इसलिए उन्हें 'तटीय प्रहरी' की भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है। वे किस तरह की गतिविधियों पर नजर रखें, कोई संदिग्ध व्यक्ति या एक्शन नजर आता है तो सबसे पहले कहां सूचना दें, सीआईएसएफ द्वारा 'तटीय' प्रहरी को इन बातों से अवगत कराया जाएगा। 
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सीआईएसएफ के गत वर्ष आयोजित हुए साइकिल सवारों ने अपनी इस यात्रा के दौरान समुद्री तटों के आसपास रहने वाले हजारों लोगों के साथ बातचीत की है। उनकी समस्याओं को करीब से जाना और समझा है। समुद्री तटों पर ड्रग्स, तस्कर और घुसपैठिये, इनके बारे में लोगों के साथ विस्तार से बातचीत की गई है। यह साइकिल यात्रा, समुद्री तटों के आसपास रहने वाले लोगों के साथ एक बॉंडिंग तैयार कर रही है। इससे राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा का घेरा, दोनों को मजबूती मिलेगी। सीआईएसएफ अधिकारियों का कहना है कि वे तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मूल समस्याओं का पता लगा रहे हैं। उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है, इस मेकेनिज्म पर काम प्रारंभ हो गया है। भारत की विशाल तटरेखा पर 250 से अधिक बंदरगाह हैं, जिनमें 72 निर्यात और आयात (एग्जिम) बंदरगाह शामिल हैं। ये देश के लगभग 95 प्रतिशत व्यापार का संचालन करते हैं। ये बंदरगाह, तट पर स्थित रिफाइनरियों, शिपयार्डों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के साथ, भारत के आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। 

हालांकि, इन्हें मादक पदार्थों, हथियारों, विस्फोटकों की तस्करी, घुसपैठ और अन्य अवैध गतिविधियों जैसे लगातार खतरों का भी सामना करना पड़ता है। पांच दशकों से अधिक समय से, सीआईएसएफ को तटों पर स्थित 12 प्रमुख बंदरगाहों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। पहले सीआईएसएफ तटीय साइक्लोथॉन की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, 2026 संस्करण इस ऐतिहासिक आंदोलन को नए संकल्प और मजबूत राष्ट्रीय जुड़ाव के साथ आगे बढ़ा रहा है। सीआईएसएफ के साइकिल सवारों की दो टीमें एक साथ रवाना होंगी। एक टीम पश्चिमी तट पर लखपत 'कच्छ' गुजरात से और दूसरी पूर्वी तट पर बक्खाली, दक्षिण 24 परगना, पश्चिम बंगाल से यात्रा प्रारंभ होगी। देश भर के तटीय मार्गों को पार करने के बाद, दोनों टीमें 22 फरवरी को कोच्चि, केरल में मिलेंगी।
पश्चिमी तट से शुरु होने वाली यात्रा में सूरत, मुंबई, गोवा और मंगलुरु जैसे क्षेत्र कवर होंगे, जबकि पूर्वी तट के तहत हल्दिया, कोणार्क, पारादीप, विशाखापत्तनम, चेन्नई, पुडुचेरी और कन्याकुमारी आएंगे। साइक्लोथॉन में 130 सीआईएसएफ कर्मी, जिनमें 65 महिला कर्मी शामिल हैं, भाग लेंगे। 

सीआईएसएफ तटीय साइक्लोथॉन-2026 का उद्देश्य है कि तटीय समुदायों को मादक पदार्थों, हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी जैसे खतरों के प्रति जागरूक करना और सतर्कता को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से सशक्त तटीय सुरक्षा नेटवर्क के लिए तटीय समुदायों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों और सुरक्षाकर्मियों तथा उनके परिवारों के बलिदानों को श्रद्धांजलि अर्पित करके वंदे मातरम की भावना को बढ़ावा देना, यह भी साइकिल यात्रा का मकसद होगा। कोस्टल साइक्लोथॉन-2026 के जागरूकता अभियान के तहत, सीआईएसएफ के साइकिल सवारों की टीमें, 50 से अधिक चयनित तटीय गांवों में रात भर रुकेंगी। यह तटीय समुदायों के प्रति एकजुटता और सम्मान का प्रतीक है। यह पहल साइक्लोथॉन के बाद भी जारी रहेगी, जिसमें सीआईएसएफ तटीय क्षेत्रों में स्थित अपनी 47 इकाइयों के माध्यम से निरंतर संपर्क बनाए रखेगी।


नियोजित गतिविधियों में भर्ती और फिटनेस पर जागरूकता कार्यक्रम, स्वच्छता अभियान और सामुदायिक संपर्क पहल शामिल हैं। चयनित तटीय गांवों में, हितधारकों के साथ साझेदारी में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों के माध्यम से अतिरिक्त कल्याण और विकास गतिविधियों का प्रस्ताव है। इन प्रयासों का उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास और आवश्यक सेवाओं के विस्तार में सहयोग करना है, जिससे तटीय समुदायों के साथ दीर्घकालिक जुड़ाव मजबूत हो और समावेशी राष्ट्रीय सुरक्षा को बल मिले।

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