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Op Sindoor: CISF ने 19 कर्मियों को DG डिस्क से किया सम्मानित, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहादुरी के लिए सम्मान
Tue, 25 Nov 2025 10:13 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 25 Nov 2025 10:13 PM IST
सार
Operation Sindoor: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने अपने 19 बहादुर जवानों को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अप्रतिम बहादुरी का प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया है। इस दौरान अचानक बढ़े खतरे के बीच जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना काम संभाला और किसी भी कीमत पर राष्ट्रीय संपत्तियों को सुरक्षित रखा था।
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सीआईएसएफ ने 19 कर्मियों को किया सम्मानित
- फोटो : ANI
विस्तार
सुरक्षा की पहली पंक्ति में खड़े रहने वाली केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने मंगलवार को अपने 19 बहादुर जवानों को डीजी डिस्क देकर सम्मानित किया। ये सम्मान 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान गजब के साहस और बेहतरीन काम का परिचय देने पर दिया गया है।
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19 बहादुर जवानों का सम्मान
- फोटो : ANI
जवानों ने की राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा
यह ऑपरेशन मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के उरी हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट-I और II के आसपास हालात बेहद तनावपूर्ण हो जाने पर शुरू हुआ था। भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात एलओसी के पार स्थित एक आतंकी ठिकाने पर कार्रवाई की थी। इसके बाद पाकिस्तानी सेना की भारी गोलाबारी ने एनएचपीसी की इन परियोजनाओं और पास के गांवों को बड़े खतरे में डाल दिया। इन प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ की यूनिट एलओसी से सिर्फ 8-10 किलोमीटर दूरी पर है। अचानक बढ़े खतरे के बीच जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना काम संभाला और किसी भी कीमत पर राष्ट्रीय संपत्तियों को सुरक्षित रखने का फैसला किया।
यह भी पढ़ें - Mumbai: 26/11 मामले में बरी अंसारी को बिना पुलिस क्लियरेंस वाली नौकरी करने की छूट, सरकार का हाईकोर्ट में जवाब
यह ऑपरेशन मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के उरी हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट-I और II के आसपास हालात बेहद तनावपूर्ण हो जाने पर शुरू हुआ था। भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात एलओसी के पार स्थित एक आतंकी ठिकाने पर कार्रवाई की थी। इसके बाद पाकिस्तानी सेना की भारी गोलाबारी ने एनएचपीसी की इन परियोजनाओं और पास के गांवों को बड़े खतरे में डाल दिया। इन प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ की यूनिट एलओसी से सिर्फ 8-10 किलोमीटर दूरी पर है। अचानक बढ़े खतरे के बीच जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना काम संभाला और किसी भी कीमत पर राष्ट्रीय संपत्तियों को सुरक्षित रखने का फैसला किया।
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CISF ने 19 कर्मियों को DG डिस्क से किया सम्मानित
- फोटो : ANI
CISF जवानों का अप्रतिम शौर्य
सीआईएसएफ के अनुसार, जवानों ने दुश्मन की ओर से आती गोलियों और गोले की दिशा का रीयल-टाइम विश्लेषण किया। इस दौरान जवानों ने लोगों को सुरक्षित स्थानों और बंकरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इस गोलाबारी के बीच घर-घर जाकर करीब 250 लोगों, महिलाओं, बच्चों और एनएचपीसी स्टाफ को सुरक्षित निकाला। संचार तंत्र को चलाए रखने के लिए POLNET और सैटेलाइट सिस्टम को लगातार सक्रिय रखा। ड्रोन से होने वाले हमलों को नाकाम किया और आर्मरी को सुरक्षित रखने के लिए हथियारों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। इन सबके बीच सीआईएसएफ की टीम ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी नागरिक हताहत न हो और पावर प्रोजेक्ट्स को कोई नुकसान न पहुंचे।
किसे-किसे किया गया सम्मानित?
ऑपरेशन में नेतृत्व कमांडेंट रवि यादव ने किया। उनके साथ डिप्टी कमांडेंट मनोज सिंह और असिस्टेंट कमांडेंट सुबाश कुमार प्रमुख रूप से शामिल थे। उरी हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट उरी-I और उरी-II से इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल रैंक के 19 अधिकारी व जवान। इनमें कॉन्स्टेबल सुशील वसंत कांबले, रजिके अहमद अब्दुल रफीक, वानखेड़े रवींद्र गुलाब, त्रिदेव चकमा, इंस्पेक्टर दीपक कुमार झा, हेड कॉन्स्टेबल गुरजीत सिंह, कॉन्स्टेबल सोहन लाल, मुफीद अहमद महेश कुमार, हेड कॉन्स्टेबल मनोज शर्मा, राम लाल, एसआई अनिल कुमार, एसआई दीपक कुमार, एएसआई राजीव कुमार, एएसआई सुखदेव सिंह और कॉन्स्टेबल सन्देना बोइना राजू शामिल हैं।
यह भी पढ़ें - Manipur: चुराचांदपुर में सुरक्षा बलों को मिली कामयाबी, बरामद किया हथियारों का जखीरा; कई जिलों में बढ़ी गश्त
सीआईएसएफ के अनुसार, जवानों ने दुश्मन की ओर से आती गोलियों और गोले की दिशा का रीयल-टाइम विश्लेषण किया। इस दौरान जवानों ने लोगों को सुरक्षित स्थानों और बंकरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इस गोलाबारी के बीच घर-घर जाकर करीब 250 लोगों, महिलाओं, बच्चों और एनएचपीसी स्टाफ को सुरक्षित निकाला। संचार तंत्र को चलाए रखने के लिए POLNET और सैटेलाइट सिस्टम को लगातार सक्रिय रखा। ड्रोन से होने वाले हमलों को नाकाम किया और आर्मरी को सुरक्षित रखने के लिए हथियारों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। इन सबके बीच सीआईएसएफ की टीम ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी नागरिक हताहत न हो और पावर प्रोजेक्ट्स को कोई नुकसान न पहुंचे।
किसे-किसे किया गया सम्मानित?
ऑपरेशन में नेतृत्व कमांडेंट रवि यादव ने किया। उनके साथ डिप्टी कमांडेंट मनोज सिंह और असिस्टेंट कमांडेंट सुबाश कुमार प्रमुख रूप से शामिल थे। उरी हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट उरी-I और उरी-II से इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल रैंक के 19 अधिकारी व जवान। इनमें कॉन्स्टेबल सुशील वसंत कांबले, रजिके अहमद अब्दुल रफीक, वानखेड़े रवींद्र गुलाब, त्रिदेव चकमा, इंस्पेक्टर दीपक कुमार झा, हेड कॉन्स्टेबल गुरजीत सिंह, कॉन्स्टेबल सोहन लाल, मुफीद अहमद महेश कुमार, हेड कॉन्स्टेबल मनोज शर्मा, राम लाल, एसआई अनिल कुमार, एसआई दीपक कुमार, एएसआई राजीव कुमार, एएसआई सुखदेव सिंह और कॉन्स्टेबल सन्देना बोइना राजू शामिल हैं।
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CISF ने 19 कर्मियों को DG डिस्क से किया सम्मानित
- फोटो : ANI
सीआईएसएफ DG का बयान
नव-नियुक्त डीजी प्रवीर ने समारोह में कहा कि जवानों ने गोलाबारी के बीच जिस शांत चित्त और हिम्मत का परिचय दिया, वह सीआईएसएफ की सुरक्षा और सेवा की परंपरा को और मजबूत करता है। उन्होंने इन कर्मियों की मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की भी सराहना की।
सीआईएसएफ - देश की अहम ढाल
1969 में स्थापित सीआईएसएफ आज देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक परियोजनाओं की सुरक्षा संभालती है। इसमें एयरपोर्ट, दिल्ली मेट्रो, परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र, रक्षा कारखाने, तेल रिफाइनरियां, बड़े बंदरगाह, ऐतिहासिक स्मारक आदि शामिल हैं। 2025 की शुरुआत में सीआईएसएफ की ताकत करीब 1.88 लाख थी, जिसे अब बढ़ाकर 2.20 लाख तक करने की मंजूरी मिल चुकी है।
नव-नियुक्त डीजी प्रवीर ने समारोह में कहा कि जवानों ने गोलाबारी के बीच जिस शांत चित्त और हिम्मत का परिचय दिया, वह सीआईएसएफ की सुरक्षा और सेवा की परंपरा को और मजबूत करता है। उन्होंने इन कर्मियों की मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की भी सराहना की।
सीआईएसएफ - देश की अहम ढाल
1969 में स्थापित सीआईएसएफ आज देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक और रणनीतिक परियोजनाओं की सुरक्षा संभालती है। इसमें एयरपोर्ट, दिल्ली मेट्रो, परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र, रक्षा कारखाने, तेल रिफाइनरियां, बड़े बंदरगाह, ऐतिहासिक स्मारक आदि शामिल हैं। 2025 की शुरुआत में सीआईएसएफ की ताकत करीब 1.88 लाख थी, जिसे अब बढ़ाकर 2.20 लाख तक करने की मंजूरी मिल चुकी है।