फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Cholera Cases increasing at double rate every year danger due to lack of clean water, toilets and vaccines

घातक हुआ हैजा: हर साल दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे मामले, साफ पानी, शौचालय और टीकों की कमी से लाखों लोग खतरे में

Sun, 24 Mar 2024 06:43 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 24 Mar 2024 06:43 AM IST
सार

डब्ल्यूएचओ ने जलवायु में आ रहे बदलावों को भी वैश्विक स्तर पर हैजे के मामलों के बढ़ने का एक कारण माना है। हैजा के फैलने के लिए गरीबी और गंदगी जैसे कारक हमेशा से जिम्मेदार रहे हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन अब स्थिति को पहले से बदतर बना रहा है।

विज्ञापन
Cholera Cases increasing at double rate every year danger due to lack of clean water, toilets and vaccines
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

दुनिया में हैजा घातक होता जा रहा है। 2021 के बाद हर साल इसके मामलों में करीब दोगुनी रफ्तार से वृद्धि देखी जा रही है। 2022 में 4.73  लाख मामले सामने आए थे, जो 2021 की तुलना में दोगुने से अधिक थे। वहीं, 2023 के प्रारंभिक आंकड़ों में सात लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। 2022 की तुलना में 2023 में हैजे के मामलों में 48 फीसदी इजाफा हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने आगाह किया है कि साफ पानी, साबुन, शौचालय और टीके की कमी के कारण लाखों लोगों पर हैजे का खतरा मंडरा रहा है।

विज्ञापन

बदलती जलवायु भी वजह
डब्ल्यूएचओ ने जलवायु में आ रहे बदलावों को भी वैश्विक स्तर पर हैजे के मामलों के बढ़ने का एक कारण माना है। हैजा के फैलने के लिए गरीबी और गंदगी जैसे कारक हमेशा से जिम्मेदार रहे हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन अब स्थिति को पहले से बदतर बना रहा है। बाढ़, चक्रवात और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाएं साफ पानी तक पहुंच को दुर्गम बना रही हैं और हैजे के फैलने के लिए उपयुक्त परिस्थितियां पैदा कर रही हैं।

विज्ञापन

10 वर्षों में सबसे अधिक मृत्यु दर
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 2022 में 44 देशों में हैजे के मामले दर्ज किए गए, जबकि 2021 में 35 देशों ने इसके मामलों की जानकारी दी थी। यही प्रवृत्ति 2023 में भी जारी रही। पिछले 10 वर्षों के दौरान इससे मृत्युदर भी सबसे अधिक रही। वर्तमान में इससे सबसे गंभीर रूप से प्रभावित देशों में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया, हैती, सोमालिया, सूडान, सीरिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे और दक्षिण पूर्वी एशिया हैं। डब्ल्यूएचओ ने हैजे में हो रही इस अप्रत्याशित वृद्धि के लिए साफ पानी और स्वच्छता तक पहुंच में लगातार अंतराल को भी जिम्मेदार माना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

टीकों की कमी, खुराक दो से घटाकर एक की
एशियाई महामारी के रूप में बदनाम हैजा को रोका जा सकता है। हालांकि, इसके टीकों की वैश्विक कमी अब भी बरकरार है। अक्टूबर 2022 में टीकों की बढ़ती मांग के कारण अंतरराष्ट्रीय समन्वय समूह को हैजा के प्रकोप से निपटने के लिए अपनी वैश्विक टीकाकरण रणनीति को दो खुराक से घटाकर एक करने का निर्णय तक लेना पड़ा था। पिछले साल इसकी करीब 3.6 करोड़ खुराक का उत्पादन हुआ था। इसके बावजूद 14 प्रभावित देशों ने इसकी एक खुराक की जरूरत को पूरा करने के लिए 7.2 करोड़ खुराक की मांग की थी।

पानी की होने लगती है कमी
हैजा विब्रियो कॉलेरी नामक बैक्टीरिया से फैलने वाली बीमारी है। यह बीमारी दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलती है। यह एक गंभीर बीमारी है, जिसके कारण दस्त (डायरिया) की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। पीड़ित के शरीर में पानी की कमी होने लगती है। दूषित भोजन या पानी का सेवन करने के 12 घंटे से पांच दिन के बीच इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

तत्काल कदम उठाना जरूरी
वैक्सीन को लेकर बनाए अंतरराष्ट्रीय समन्वय समूह (आईसीजी) ने भी दुनियाभर में हैजे के मामलों में वृद्धि से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है। साथ ही बीमारी का तुरंत पता लगाने, स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता और पहुंच में वृद्धि करने, किफायती ओरल टीकों के उत्पादन में तेजी लेन पर जोर दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed