फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   chipko movement of south india appiko movement was started by pandurang hegde

दक्षिण भारत का 'चिपको आंदोलन'

Tue, 26 Dec 2017 04:54 PM IST
बाबा मायाराम, नई दिल्ली
बाबा मायाराम, नई दिल्ली Updated Tue, 26 Dec 2017 04:54 PM IST
विज्ञापन
chipko movement of south india appiko movement was started by pandurang hegde
अप्पिको आंदोलन
हिमालय के 'चिपको आंदोलन' की तरह ही दक्षिण भारत में 'अप्पिको आंदोलन' को काफी मान्यता और ख्याति मिली है। इसे न केवल मीडिया में जगह मिली, बल्कि सरकारी महकमे में काफी सराहना मिली। कर्नाटक सरकार ने जंगल में हरे पेड़ों की कटाई पर पूरी तरह रोक लगा दी, जो आज तक जारी है। 
विज्ञापन


हाल ही में मुझे अप्पिको आंदोलन के सूत्रधार पांडुरंग हेगड़े से मिलने का अवसर मिला। सिरसी स्थित अप्पिको आंदोलन के कार्यालय में उनसे मुलाकात और लंबी बातचीत हुई। करीब 34 साल बीत गए, वे इस मिशन में लगातार सक्रिय हैं। अब वह अलग-अलग तरह से पर्यावरण के प्रति चेतना जगाने की कोशिश कर रहे हैं। 80 के दशक में उभरे अप्पिको आंदोलन में पांडुरंग हेगड़े की ही प्रमुख भूमिका रही है। एक जमाने में वह दिल्ली विश्वविद्यालय से सामाजिक कार्य में गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। अपनी पढ़ाई के दौरान वह चिपको आंदोलन में शामिल हुए और कई गांवों में घूमे, कार्यकर्ताओं से मिले।
विज्ञापन


चिपको के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा से मिले। यही वह मोड़ था, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। कुछ समय मध्य प्रदेश के दमोह में लोगों के बीच काम किया और अपने गांव लौट आए और जीवन में कुछ सार्थक करने की तलाश करने लगे। कुछ साल बाहर रहने के बाद गांव लौटे, तो इलाके की तस्वीर बदली-बदली लगी। जंगल कम हो रहे हैं, हरे पेड़ कट रहे हैं। इससे पांडुरंग व्यथित हो गए, उन्हें उनका बचपन याद आ गया। उन्होंने अपने बचपन में इस इलाके में बहुत घना जंगल देखा था। हरे पेड़, शेर, हिरण, जंगली सूअर, जंगली भैंसा, बहुत से पक्षी और तरह-तरह की चिड़ियाएं देखी थीं। पर कुछ सालों के अंतराल में इसमें कमी आई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह देखते हुए उन्होंने काली नदी के आसपास पदयात्रा की। उन्होंने देखा कि वहां जंगल की कटाई हो रही है। खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों के साथ मिलकर कुछ करने का मन बनाया। सबसे पहले सलकानी गांव के करीब डेढ सौ स्त्री-पुरूषों ने जंगल की पदयात्रा की। वहां वन विभाग के आदेश से पेड़ों को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था। लोगों ने उन्हें रोका, पेड़ों से चिपक गए और आखिरकार, वे पेड़ों को बचाने में सफल हुए। यह आंदोलन जल्द ही जंगल की तरह फैल गया। 

यह अनूठा आंदोलन था, यह चिपको की तरह था। कन्नड़ भाषा में 'अप्पिको' शब्द चिपको का ही पर्याय है।

'मैंने सोचा वे मुझे नहीं मारेंगे और पेड़ बच जाएंगे।'

chipko movement of south india appiko movement was started by pandurang hegde
चिपको आंदोलन
पांडुरंग जी ने बताया- हमारा उद्देश्य जंगल को बचाना है, जो हमारे जीने के लिए और समस्त जीवों के लिए जरूरी है। हमें सबका सहयोग चाहिए पर किसी का एकाधिकार नहीं। हम सरकार की वन नीति में बदलाव चाहते हैं, जो कृषि में सहायक हों, क्योंकि खेती ही देश की बड़ी आबादी का आधार है।

चिपको आंदोलन हिमालय में 70 के दशक में उभरा था और देश-दुनिया में इसकी काफी चर्चा हुई थी। पर्यावरण के प्रति चेतना जगाने का यह शायद देश में पहला आंदोलन था। चिपको के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा ने अप्पिको पर बनी फिल्म में चिपको की शुरुआत कैसे हुई, इसकी कहानी सुनाई है।

उन्होंने उस महिला से सवाल किया, जो सबसे पहले पेड़ को बचाने के लिए उससे चिपक गई थी, आप को यह विचार कैसे आया?

महिला ने जवाब दिया- 'कल्पना करें कि मैं अपने बच्चे के साथ जंगल जा रही हूं और जंगल से भालू और शेर आ जाएं। तब मैं उन्हें देखते ही अपने बच्चे को सीने से लगा लूंगी और उसे बचा लूंगी। इसी प्रकार जब पेड़ों को काटने के लिए चिन्हित किया गया, तो मैंने सोचा, मैं उसे गले से गला लूं, वे मुझे नहीं मारेंगे और पेड़ बच जाएंगे।' इस तरह चिपको का विचार सभी जगह फैल गया। 

चिपको से प्रभावित अप्पिको आंदोलन भी कर्नाटक के सिरसी से होते हुए दक्षिण भारत में फैलने लगा। इसके लिए कई यात्राएं की गईं, स्लाइड शो और नुक्कड़ नाटक किए गए।

सागौन और यूकेलिप्टस के वृक्षारोपण का काफी विरोध किया गया, क्योंकि इससे जैव विविधता का नुकसान होता। यहां न केवल बहुत समृद्ध जैव-विविधता है, बल्कि सदानीरा पानी के स्रोत भी हैं। शुरुआती दौर में आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई, पर यह आंदोलन जनता में बहुत लोकप्रिय हो चुका था और पूरी तरह अहिंसा पर आधारित था। अप्पिको का दक्षिण भारत में वनों को बचाने के साथ पर्यावरण चेतना जगाने में अमूल्य योगदान हमेशा ही याद किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed