Foreign Policy: चीनी विदेश मंत्री वांग इस महीने भारत आएंगे! दोनों देशों के संबंध में सुधार की कोशिशों पर नजरें
चीनी विदेश मंत्री वांग यी इस महीने भारत का दौरा कर सकते हैं। दौरे के दौरान एनएसए अजीत डोभाल से सीमा विवाद पर बातचीत करने की उम्मीद है। वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी 13 जुलाई से तीन दिवसीय चीन दौरे पर जाएंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चीनी विदेश मंत्री वांग यी इस महीने भारत का दौरा कर सकते हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के साथ सीमा विवाद पर बातचीत कर सकते हैं। यह बातचीत विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता के तहत होगी।
दिसंबर 2024 में, एनएसए डोभाल ने भी बीजिंग का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने वहां वांग यी के साथ सीमा मुद्दों पर बात की थी। डोभाल ने पिछले महीने भी एससीओ सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक के लिए चीन का दौरा किया था।
इस बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर 13 जुलाई से तीन दिवसीय चीन दौरे पर जाएंगे। यह जानकारी शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने दी। यह यात्रा बीजिंग से शुरू होगी, जिसके बाद वह तिआनजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। इस समय एससीओ की अध्यक्षता चीन के पास है।
ये भी पढ़ें: Waqf: अब वक्फ संपत्तियों के पोर्टल, डेटाबेस के ऑडिट की तैयारी, केंद्र सरकार ने नियम अधिसूचित किए; जानिए मकसद
जयशंकर का चीन दौरा माना जा रहा अहम
जयशंकर का यह दौरा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि जून 2020 में एलएसी पर गलवां घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था। इस बीच जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष की कुछ मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय बैठकों के दौरान जरूर हुईं, लेकिन यह पहली बार होगा जब वह तनाव के बाद सीधे चीन की यात्रा पर जा रहे हैं।
भारत-चीन के रिश्ते में नई शुरुआत की उम्मीद
बता दें कि एस. जयशंकर की यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में एक नई शुरुआत की संभावना लेकर आ रही है। कारण है कि जयशंकर के इस दौरे से एससीओ बैठक के साथ-साथ भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता और विश्वास बहाली के लिए यह यात्रा एक अहम कदम मानी जा रही है।
पीएम मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात बनी थी 'ब्रेकथ्रू'
पिछले साल अक्तूबर में रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। यह पांच साल में दोनों नेताओं की पहली औपचारिक बातचीत थी। पीएम मोदी ने साफ कहा था कि भारत-चीन संबंध आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता पर आधारित होने चाहिए।
ये भी पढ़ें: Kerala High Court: केरल विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से कोर्ट ने पूछा- भारत माता का चित्र धार्मिक प्रतीक कैसे?
राजनाथ सिंह डोभाल कर चुके हैं चीन का दौरा
प्रधानमंत्री की उस बैठक के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी चीन का दौरा किया और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। बीजिंग में हुई एससीओ सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में डोभाल ने पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के खतरे को गंभीरता से उठाया था।
सिंह ने की थी भारत-चीन सीमा पर शांति की बात
अपने चीन दौरे के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डोंग जून से मुलाकात की थी। उन्होंने भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही स्थायी समाधान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही। उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने को भी एक सकारात्मक संकेत बताया और दोनों देशों के बीच 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों को एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
संबंधित वीडियो
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.