Covid-19: रैपिड किट पर भारत की सख्ती के बाद चीनी कंपनियां जांच में सहयोग को हुई तैयार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गड़बड़ रैपिड जांच किट पर केंद्र सरकार के सख्त रुख को देखते हुए चीन की दो कंपनियों ने जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है। कोविड-19 की रैपिड जांच के लिए 5.5 लाख किट की आपूर्ति करने वाली चीन की ग्वांगझोऊ वोंदफो बायोटेक और लिवजोन डायग्नोस्टिक्स ने अलग-अलग बयानों में कहा है कि वे अपने उत्पादों के परिणामों में सटीकता नहीं होने संबंधी शिकायतों के मामले में जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं।
दोनों कंपनियों ने कहा कि वे अपने उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियमों का सख्ती से पालन करती हैं। सटीक परिणाम पाने के लिए किट को रखे जाने और उनके इस्तेमाल के लिए विशेष दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मंगलवार को राज्यों को सलाह दी थी कि दो दिन के लिए इन किटों का इस्तेमाल रोक दिया जाए। उसने रैपिड जांच किटों के परिणाम सही नहीं आने की शिकायतों के बाद इस संबंध में जांच की बात कही थी।
पिछले हफ्ते भारत ने चीन की दोनों कंपनियों से 5.5 लाख रैपिड एंटीबॉडी जांच किट खरीदी थी। इन्हें कई राज्यों में भेजा गया था। ग्वांगझोऊ वोंदफो बायोटेक ने तीन लाख जबकिलिवजोन डायग्नोस्टिक्स ने ढाई लाख जांच किट भेजी थीं। लिवजोन ने एक बयान में कहा कि हम चीन में अपने ब्रांड समेत अन्य कंपनियों की बनी कोविड-19 रैपिड जांच किट से गलत परिणाम आने संबंधी भारत से आ रहीं नकारात्मक खबरों से स्तब्ध हैं।
जांच किट को 2 और 30 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच में रखा जाना चाहिए
हमने इस विषय पर गंभीरता दिखाई है और हम जांच के लिए संबंधित सरकारी विभागों के साथ सहयोग को तैयार हैं। कंपनी ने कहा कि वह चीन की सरकार द्वारा तय मानकों का पालन करती है। कंपनी ने इन किटों को ब्राजील, पेरू, कोलंबिया और विभिन्न यूरोपीय देशों को आपूर्ति की है। उसने कहा कि जांच किट को 2 और 30 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच में रखा जाना चाहिए और इन्हें फ्रोजेन नहीं करना चाहिए। यदि इन्हें उच्च तापमान पर रखा जाएगा तो परिणाम सटीक नहीं मिलेगा।
वहीं ग्वांझोऊ वोंदफो कंपनी का कहना है कि उसने इन किटो को 70 से अधिक देशों को भेजा है। इन किटों को आईसीएमआर ने पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाइरालॉजी के जरिए मंजूरी दी थी। इन दोनों कंपनियों के बयानों को चीनी दूतावास के एक अधिकारी ने मीडिया में जारी किया।
रैपिड एंटीबॉडी जांच किट में संदिग्ध रोगी के खून के नमूने लिए जाते हैं और सामान्यत: 15 से 30 मिनट में रिपोर्ट आ जाती है। देश के सरकारी अस्पतालों में इस समय पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) जांच किट का इस्तेमाल हो रहा है जिसमें गले और नाक से स्वाब के नमूने लिए जाते हैं और पांच से छह घंटे में परिणाम आता है। देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के मद्देनजर जांच किट की भारी कमी है।