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गलवां घाटी में चीनी फौज ने लांघी बर्बरता और कायरता की सारी हदें, पढ़िए धोखे की नई कहानी

Wed, 17 Jun 2020 08:12 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 17 Jun 2020 08:12 PM IST
सार

भारतीय सैनिक इस भरोसे में रहे कि एलएसी पर आई चीनी फौज धीरे-धीरे पीछे चली जाएगी। सूत्रों का कहना है, जब पहली झड़प शुरू हुई, तो उस वक्त भारतीय सैनिकों की संख्या चार दर्जन से अधिक नहीं थी...

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Chinese army has crossed all limits of barbarism and cowardice in Galwan valley
लद्धाख में दी गई जवानों को श्रद्धाजंलि - फोटो : ANI

विस्तार

गलवां घाटी में हुई झड़प के दौरान चीनी सैनिकों ने कायरता की सारी हदें लांघ दीं। पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 पर जिस जगह पर ये झड़प हुई है, वहां चीनी फौज ने अपनी भारी संख्या का फायदा उठाकर पहले भारतीय सैनिकों को घायल किया और फिर उन्हें एलएसी से काफी अंदर तक ले गए।
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कई घंटे बाद जब चीनी फौज ने भारतीय सैनिकों को वापस एलएसी पर छोड़ा तो वे अंतिम सांस ले रहे थे। घटनास्थल के सबसे करीब स्थित आईटीबीपी बेस कैंप पर तैनात सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

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भारतीय सैनिक इस भरोसे में रहे कि एलएसी पर आई चीनी फौज धीरे-धीरे पीछे चली जाएगी। सूत्रों का कहना है, जब पहली झड़प शुरू हुई तो उस वक्त भारतीय सैनिकों की संख्या चार दर्जन से अधिक नहीं थी।
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चीन ने छह जून को हुए समझौते की शर्तें तोड़ दी और इसी का फायदा उठाकर भारतीय सैनिकों के साथ बर्बरता करनी शुरू कर दी। 
 

लद्दाख की गलवां घाटी में भारत-चीन के सैनिकों के बीच सोमवार की रात हुई झड़प एक बड़ी साजिश का हिस्सा रही है। सूत्र बताते हैं कि भारत सरकार ने अपने बीस सैनिकों के शहीद होने की अधिकारिक जानकारी दी है।


ऐसी संभावना है कि अभी घायलों की एक बड़ी संख्या सामने आ सकती है। जब यह झड़प शुरू हुई तो उस वक्त चीनी सैनिकों की संख्या सात सौ से अधिक रही थी। दिन ढलने के बाद चीनी सैनिकों ने कई दर्जन भारतीय जवानों को घायल कर दिया था।

रात 11 बजे तक वहां भारतीय सैनिक भी अच्छी खासी तादाद में पहुंच चुके थे, लेकिन चीन के मुकाबले वह संख्या काफी नहीं थी। सूत्रों ने बताया कि चीनी फौज की यह झड़प एक बड़ी सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी।

चीन ने अपने सैनिक एलएसी के निकटवर्ती इलाकों में छिपा रखे थे। पूर्व सेना अध्यक्ष जन. वीपी मलिक कहते हैं कि भारत को अब एलएसी पर अपने सैनिकों की संख्या बढ़ानी होगी।

गश्त के दौरान या गलवां घाटी जैसे गतिरोध में सैनिकों के पास हथियार अवश्य होना चाहिए। चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। रक्षा विशेषज्ञ डीएस ग्रेवाल के अनुसार, चीन ने जिस कायरता से हमारे सैनिकों पर हमला किया है, उससे चीन की धोखेबाजी वाली मंशा दुनिया के सामने आ गई है।

इससे साबित होता है कि चीन गलवां घाटी पर कब्जा जमाना चाहता है। कैबिनेट सचिवालय के पूर्व अतिरिक्त सचिव 'रॉ' जयदेव रानाडे के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में चीन को कड़ा जवाब देना होगा।


इसमें ग्राउंड पर ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाया जाए, साथ ही राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेशर डाला जाए। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी सैन्य पॉलिसी पर हम भरोसा नहीं कर सकते। ये इतनी बड़ी झड़प जिनपिंग की मंजूरी के बिना संभव नहीं थी।

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