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MEA Annual Report: LAC पर चीन ने यथास्थिति बदलने की कोशिश की, इसके कारण द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हुए

Mon, 13 Mar 2023 02:55 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Mon, 13 Mar 2023 02:55 PM IST
सार

रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अप्रैल-मई 2020 से पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर यथास्थिति में एकतरफा बदलाव के कई प्रयास किए हैं। इसके चलते एलएसी पर शांति भंग हुई। विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि चीन के इन प्रयासों का भारत की तरफ से हमेशा मजबूती से उचित जवाब दिया गया। 

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China's unilateral attempts to change LAC status quo impacted bilateral relationship: MEA
एलएसी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2021-22 जारी की। इसमें मंत्रालय ने भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंधों का जिक्र किया है। मंत्रालय ने कहा कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश की। चीन की तरफ से लगातार इस तरह के प्रयास हुए हैं। इसके चलते भारत-चीन द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हुए हैं। 
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रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अप्रैल-मई 2020 से पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर यथास्थिति में एकतरफा बदलाव के कई प्रयास किए हैं। इसके चलते एलएसी पर शांति भंग हुई। विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि चीन के इन प्रयासों का भारत की तरफ से हमेशा मजबूती से उचित जवाब दिया गया। 
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ये रिपोर्ट विदेश मंत्रालय के नीति नियोजन प्रभाग द्वारा तैयार की गई है। इसके अनुसार, चीन के साथ भारत का जुड़ाव काफी जटिल है। हालांकि, दोनों पक्ष अपने मतभेदों को प्रबंधित करने और किसी भी मुद्दे पर मतभेदों को विवाद नहीं बनने देने पर सहमत हुए हैं। 
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रिपोर्ट में और क्या कहा गया? 
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्ष (भारत और चीन) इस बात पर सहमत हुए हैं कि सीमा विवाद का अंतिम समाधान होने तक सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना होगा। ये द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए काफी आवश्यक आधार है। दोनों पक्ष शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर मुद्दों को हल करने पर सहमत हुए हैं। सभी टकराव बिंदुओं से पूरी तरह से पीछे हटने और भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में जल्द से जल्द शांति की पूर्ण बहाली के लिए चीनी पक्ष के साथ चर्चा जारी है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत ने शेष मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने के लिए राजनयिक और सैन्य दोनों माध्यमों से चीन के साथ अपने जुड़ाव को बनाए रखा है ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और शांति बहाल की जा सके।

चीनी विदेश मंत्री के साथ बातचीत में उठा था मुद्दा
16 सितंबर, 2021 को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ताजिकिस्तान में राष्ट्राध्यक्षों की 21वीं एससीओ बैठक के मौके पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की थी। तब दोनों मंत्रियों ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ सीमा की स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया था। इसके पहले जुलाई 2021 में भी एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भी दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात हुई थी। 

अमेरिकन एजेंसी ने जताई है चिंता 
अमेरिकी खुफिया संगठन की वार्षिक रिपोर्ट में भी भारत और चीन के विवाद का जिक्र किया गया है। आशंका जताई गई है कि भारत और पाकिस्तान तथा भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ सकता है और उनके बीच संघर्ष की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत द्वारा पाकिस्तानी उकसावों का सैन्य बल के साथ जवाब देने की पहले की तुलना में अधिक संभावना है।


इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय सीमा वार्ता हुई और कई सीमा बिंदुओं पर तनाव को सुलझाया गया। लेकिन 2020 में हुई हिंसक झड़प के चलते दोनों देशों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहेंगे। दोनों देशों द्वारा विवादित स्थल पर सेनाओं की तैनाती बार्डर विवाद को लेकर दो परमाणु शक्तियों में सशस्त्र जोखिम को बढ़ाती हैं। पिछले गतिरोधों से पता चलता है कि LAC पर लगातार छोटे टकराव के तेजी से बड़ा रूप लेने की क्षमता है।
 
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