भारत-रूस समझौते से तिलमिलाएगा चीन
जैसी संभावना थी वैसा ही हुआ। रिश्तों में खटास संबंधी कयासबाजी पर पूर्ण विराम लगाते हुए भारत के सबसे विश्वस्त दोस्त रूस से दोस्ती की नई नजीर पेश कर दी। सीमा पार आतंकवाद पर भारत का साथ देने के अलावा रूस से 5 एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का उपहार दे कर हवाई खतरा से निपटने के लिए पाकिस्तान ही नहीं चीन से भी बचने का सुरक्षा कवच उपलब्ध करा दिया।
इसकी अहमियत इससे समझी जा सकती है कि यह वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली दुनिया की न सिर्फ आधुनिकतम प्रणाली है, बल्कि भारत का मित्र होने का दावा करने वाले कई देश इस प्रणाली को भारत को सौंपने केमामले में आनाकानी कर रहे थे।
जाहिर तौर पर इसके अलावा भारत में ही 200 कामोव हेलीकॉप्टर बनाने पर बनी सहमति से वायु सेना की सामरिक जरूरतें न सिर्फ पूरी होगी, बल्कि इन समझौतों के अमली जामा पहनने के बाद भारत की रक्षा प्रणाली किसी भी देश का सामना करने में पूरी तरह से सक्षम होगी।
रक्षा क्षेत्र में हुए अहम समझौते की अपनी खास अहमियत
शनिवार को गोवा में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में हुए अहम समझौते की अपनी खास अहमियत है। खास इसलिए कि उड़ी आतंकी हमले के बाद सर्जिकल अटैक के रूप में भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ की गई जवाबी कार्रवाई के बीच रूस ने पाकिस्तान से संयुक्त युद्घाभ्यास की घोषणा कर दी थी। इससे यह कयास लग रहे थे कि दिनोदिन अमेरिका के करीब जा रहे भारत और रूस से दशकों पुरानी आजमाई हुई दोस्ती की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। हालांकि इन ऐतिहासिक समझौतों के बाद यह साबित हो गया है कि भारत और रूस को रिश्ता भविष्य में भी कमजोर होने के बदले और मजबूत ही होंगे।
अब रही रक्षा क्षेत्र में हुए समझौतों की बात तो बीते करीब डेढ़ दशक से सेना खास कर वायुसेना के आधुनिकीकरण की रफ्तार खतरनाक स्तर तक धीमी पर गई थी। हम 80 के दशक के हेलीकॉप्टरों-लड़ाकू विमानों और मिसाइल तकनीकी के भरोसे रह गए थे। अब एस-400 ट्रायंफ वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली करार वायु सेना में नई जान फूंकेगा।
इस प्रणाली में छोटी, मध्यम और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल 400 किलोमीटर के दायरे में परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों, जेट और ड्रोन को मार गिराने में सक्षम है। यह दुनिया की आधुनिकतम तकनीक है। अपने कैरियर के दौरान मैंने पांच साल रूस में बिताए हैं। वहां प्रशिक्षण लिया है। इसलिए मुझे रूस निर्मित साजो समान की विशिष्टïता का अनुभव है। एक शब्द में कहे तो रूस से अपनी यारी निभा दी है।
(हिमांशु मिश्र से बातचीत के आधार पर)