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चीन की बौखलाहट: तिब्बत से जुड़े कार्यक्रम में भारतीय सांसदों की भागीदारी से तिलमिलाया चीन, पत्र लिखकर जताया ऐतराज
Fri, 31 Dec 2021 06:29 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 31 Dec 2021 06:29 PM IST
सार
दरअसल, पिछले हफ्ते केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर समेत कुछ सांसदों ने निर्वासित तिब्बती सरकार की ओर से आयोजित एक रात्रिभोज में हिस्सा लिया था। भारतीय सांसदों के दल में बीजद सांसद सुजीत कुमार, भाजपा सांसद मेनका गांधी, केसी राममूर्ति, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और मनीष तिवारी शामिल थे।
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भारत चीन में सैन्य वार्ता जल्द.......
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
तिब्बत से जुड़े कार्यक्रम में भारतीय सांसदों की भागीदारी से चीन बौखला गया है। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, दिल्ली में चीनी दूतावास ने निर्वासित तिब्बती संसद की ओर से आयोजित रात्रिभोज में भाग लेने वाले सांसदों को लेकर चिंता व्यक्त की है। यह भी कहा गया कि उनसे तिब्बती स्वतंत्रता के हिमायती बलों को सहायता प्रदान करने से परहेज करने के लिए कहा जाए।
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दरअसल, पिछले हफ्ते केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर समेत कुछ सांसदों ने निर्वासित तिब्बती सरकार की ओर से आयोजित एक रात्रिभोज में हिस्सा लिया था। भारतीय सांसदों के दल में बीजद सांसद सुजीत कुमार, भाजपा सांसद मेनका गांधी, केसी राममूर्ति, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और मनीष तिवारी शामिल थे।
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दिल्ली में चीन के दूतावास ने इसे लेकर चिंता जताई है। चीन के राजनीतिक सलाहकार झोउ योंगशेंग ने एक पत्र में कहा कि मैंने देखा है कि आपने तथाकथित 'तिब्बत के लिए सर्वदलीय भारतीय संसदीय मंच' द्वारा आयोजित एक गतिविधि में भाग लिया है और तथाकथित 'निर्वासित तिब्बती संसद' के कुछ सदस्यों के साथ बातचीत की। जैसा कि सभी जानते हैं तथाकथित निर्वासित तिब्बती सरकार पूरी तरह से चीन के संविधान और कानूनों का उल्लंघन करने वाला एक अवैध संगठन है। इसे दुनिया के किसी भी देश में मान्यता नहीं मिली है।
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दिल्ली में चीनी दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तिब्बत प्राचीन काल से उसका एक अविभाज्य हिस्सा रहा है। तिब्बत से संबंधित मामले विशुद्ध रूप से चीन के आंतरिक मामले हैं, जो किसी भी विदेशी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देते हैं। चीन किसी भी देश में तिब्बती स्वतंत्रता बलों द्वारा आयोजित गतिविधियों का दृढ़ता से विरोध करता है।
बीजद सांसद ने जताई आपत्ति
इस बीच बीजद सांसद सुजीत कुमार ने कहा कि 22 दिसंबर को इंडियन पार्लियामेंट्री फोरम ऑफ तिब्बत मंच की एक बैठक हुई थी। तिब्बत और भारत के बीच संबंधों पर चर्चा करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के 12-13 सांसद इकट्ठे हुए थे। इस पर चीन ने आपत्ति जताई है और कुछ सांसदों को चीनी विधानसभा से पत्र मिले हैं। उन्होंने कहहा कि चीन कौन है जो हमें बताए कि क्या करना है और क्या नहीं? भारत को कड़ा रुख अपनाना चाहिए और वन चाइना पॉलिसी पर पुनर्विचार करना चाहिए। भारत को चीन से सम्मान चाहिए तो हमें मजबूत होकर उसका सामना करना होगा।
तिब्बत की निर्वासित सरकार बोली, चीन का आंतरिक मसला नहीं
तिब्बत की निर्वासित सरकार ने शुक्रवार को चीन को सलाह दी कि तिब्बत के मुद्दे पर उसे गुर्राना बंद कर सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रवक्ता तेनजिन लेक्षय ने ट्विटर पर चीन की खिंचाई करते हुए कहा, “भारत की तरफ से लगातार तिब्बत को समर्थन दिए जाने से चीन असहज है।”
उन्होंने कहा, “तिब्बत के लिए ऑल पार्टी इंडियन पार्लियामेंट्री फोरम की शुरुआत 1970 में एमसी छागला ने की थी और अब इसकी अध्यक्षता बीजद सांसद सुजीत कुमार कर रहे हैं। कई भारतीय नेताओं ने अतीत में तिब्बत का समर्थन किया था और अब भी कर रहे हैं। चीन को लताड़ लगाते हुए लेक्षय ने कहा, चीन को हर समय इधर-उधर गुर्राना बंद करना चाहिए।
यदि वे तिब्बत और तिब्बती लोगों की भलाई के बारे में गंभीर हैं, तो बातचीत के माध्यम से चीन-तिब्बत संघर्ष को सुलझाने के लिए सकारात्मक पहले करने की जरूरत है।”उन्होंने कहा, तिब्बत से जुड़ा कोई भी मामला निश्चित रूप से चीन का आंतरिक मसला नहीं है। तिब्बत में जो कुछ भी होता है वह दुनियाभर के लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।