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China on Rauf Azhar: चीन ने फिर चली गंदी चाल, यूएन में आतंकी रऊफ अजहर को ब्लैकलिस्ट करने के प्रस्ताव को रोका

Thu, 11 Aug 2022 08:14 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 11 Aug 2022 08:14 PM IST
सार

रऊफ अजहर द्वारा नियोजित हमलों ने भारत और पाकिस्तान को कम से कम दो मौकों पर युद्ध के कगार पर ला दिया था। संसद पर हमला और सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला।  

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China puts hold on proposal by US and India to blacklist JEM chief Masood Azhar's brother Rauf Azhar
मसूद अजहर (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

विस्तार

जैश-ए-मोहम्मद का अब्दुल रऊफ अजहर एक बार फिर चर्चा में है। संयुक्त राष्ट्र में उसे ब्लैकलिस्ट करने के भारत और अमेरिका के प्रस्ताव को चीन ने वीटो कर दिया है। रऊफ 1999 के IC-814 कंधार अपहरण और 2019 के पुलवामा हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक माना जाता है, जिसमें 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे। 1999 के बाद से जैश प्रमुख मसूद अजहर का भाई रऊफ अजहर भारतीय प्रतिष्ठानों पर सबसे दुस्साहसी हमलों को अंजाम देने के मामले में प्रमुख आतंकी  के रूप में उभरा था। इसके अलावा उसे 2001 के संसद, 2005 में अस्थायी अयोध्या राम मंदिर पर हमला और 2016 में पठानकोट में भारतीय वायुसेना के अग्रिम अड्डे पर हमले का साजिशकर्ता माना जाता है।

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IC-814 विमान अपहरण से आया था चर्चा में 
2010 में अमेरिका द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित रऊफ अजहर 1999 में आतंक के नक्शे पर उभरा था जब काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से दिल्ली के लिए इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 का अपहरण कर लिया गया था।  24 दिसंबर को विमान को तालिबान के नियंत्रण वाले कंधार ले जाया गया था। जैसे ही अपहरण का घटनाक्रम 31 दिसंबर, 1999 को समाप्त हुआ, सुरक्षा एजेंसियों ने रऊफ अजहर को मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक के रूप में पहचाना। उसने जम्मू के कोट बलवाल जेल से अपने भाई मसूद अजहर की रिहाई को सुरक्षित करने के लिए साजिश रची थी। इस मामले में भारत सरकार को भारी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी।
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रऊफ अजहर ने भारत-पाकिस्तान को दो मौकों पर युद्ध के कगार पर ला दिया था 
रऊफ अजहर द्वारा नियोजित हमलों ने भारत और पाकिस्तान को कम से कम दो मौकों पर युद्ध के कगार पर ला दिया था। संसद पर हमला और सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमला। संसद हमले के दुस्साहस के बाद भारत ने 1971 के बाद सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी कर इसका जवाब दिया था, जिसे ऑपरेशन पराक्रम नाम दिया गया था। जबकि सीआरपीएफ के काफिले पर हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक कर जवाब दिया था जिससे जैश-ए-मोहम्मद की कमर टूट गई थी। इन हमलों के संबंध में इंटरपोल से कई रेड कॉर्नर नोटिस 48 वर्षीय रऊफ अजहर के खिलाफ लंबित हैं, जो पाकिस्तान की सुरक्षा में रह रहा है। 
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बाद में वीडियो को हटा दिया गया और वेबसाइट भी गायब हो गई थी। 2010 में रऊफ अजहर को अमेरिका द्वारा विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी के रूप में टैग किया गया था। वह 2007 में प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख था, जब अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते उसके बड़े भाई मसूद अजहर को आईएसआई द्वारा एक अज्ञात स्थान पर रखा गया था। चीन ने रऊफ अजहर को काली सूची में डालने के लिए संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और भारत के प्रस्ताव को रोक दिया था, जो दो महीने से भी कम समय में बीजिंग द्वारा इस तरह का दूसरा कदम है।

नेपाल को 15 अरब देगा चीन
इस बीच चीन ने नेपाल को इस साल विभिन्न परियोजनाओं में निवेश करने के लिए 15 अरब रुपये की अनुदान सहायता देने का वादा किया है। नेपाल के विदेश मंत्री नारायण खडका ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए व्यापक बातचीत की, जिसके बाद चीन ने नेपाल को मदद देने की घोषणा की।

इस साल दूसरी बार दिया आतंकी का साथ
चीन ने इस साल दूसरी बार संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी आतंकवादी को सूचीबद्ध करने में अड़ंगा डाला है। उसने लश्कर-ए-तैयबा के अब्दुल रहमान मक्की को प्रतिबंध सूची में शामिल करने से भी रोक दिया था। मक्की को अमेरिका ने वैश्विक आतंकी घोषित किया है। वह लश्कर संस्थापक और 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बहनोई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन के प्रवक्ता ने कहा, अमेरिका सुरक्षा परिषद के भागीदारों के साथ सहयोग को महत्व देता है ताकि आतंकवादियों को अपराध करने के लिए वैश्विक व्यवस्था का शोषण करने से रोका जा सके।

राजनीति से प्रेरित और दुर्भाग्यपूर्ण : भारत
चीन के अड़ंगे को भारत ने राजनीति से प्रेरित और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। भारत ने कहा, इससे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बीजिंग का दोहरा चरित्र उजागर हो गया है। सरकार में पदस्थ सूत्रों ने कहा, पाकिस्तान स्थित आतंकी गुटों पर लगाम लगाने की लगभग हर कार्रवाई में चीन की ओर से बाधा डाले जाने से संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति की शुचिता खत्म हो रही है।


समिति के बाकी 14 सदस्य साथ थे
चीन ने प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगाई है। संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति के बाकी 14 सदस्य प्रस्ताव के समर्थन में थे। सूत्रों के मुताबिक, रऊफ के खिलाफ रोक लगाने के लिए पर्याप्त अकाट्य सबूत थे।

प्रतिबंध लगने पर

  • अब्दुल रऊफ पर विश्वव्यापी यात्रा प्रतिबंध लागू हो जाता।
  • पाकिस्तानी प्रशासन को रऊफ से जुड़ी सारी संपत्तियां और बैंक खाते फ्रीज करने पड़ते।
  • किसी भी तरह के हथियार या संबंध सामग्री तक रऊफ की पहुंच पर रोक लगानी पड़ती।
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