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सीमा विवाद : अब भारत से ज्यादा लद्दाख में चीन को है सैन्य वार्ता की चिंता

Thu, 03 Sep 2020 10:22 PM IST
गौरव पाण्डेय शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 03 Sep 2020 10:22 PM IST
सार

  • रक्षात्मक रूख से आक्रामक हुआ भारत, चीन पर बढ़ गया अंतरराष्ट्रीय दबाव
  • पैगांग के दक्षिण किनारे और काला टॉप, हेलमेट टॉप पर कब्जे ने बदली स्थिति

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China is now more worried about military talks in Ladakh than India
भारत चीन गतिरोध - फोटो : iStock

विस्तार

चीन पर बढ़े अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारतीय सैन्य बलों की आक्रामकता ने एक सप्ताह के भीतर रणनीतिक स्थिति को बदलकर रख दिया है। अब दोनों देशों के बीच में ब्रिगेडियर स्तर के सैन्य अधिकारियों के बीच में होने वाली फ्लैग मीटिंग की चिंता भारत से ज्यादा चीन को होने लगी है। हालांकि चार दिन से चल वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकलने के संकेत नहीं है, लेकिन सैन्य सूत्र बताते हैं कालाटॉप, हेलमेट टॉप तथा स्पांगुर लेक और स्पांगुर गैप क्षेत्र की चोटियों पर भारतीय सेना की मौजूदगी ने स्थिति को बदल दिया है। सेना के विशेष बलों की यह बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। 

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इसको लेकर चीन चिंतित भी है। वह इसे भारतीय सैन्य बलों द्वारा एलएसी की अवहेलना मान रहा है। सूत्र बताते हैं कि सैन्य स्तर की वार्ता में चीन के सैन्य कमांडर इस क्षेत्र को खाली करने का दबाव बनाते हैं। इसके जवाब में भारत पड़ोसी देश से पैगांग, डेपसांग, गोगरापोस्ट समेत अन्य क्षेत्र से पीछे हटने का दबाव बना रहा है। बताते हैं स्पांगुर लेक और स्पांगुर गैप पैंगोंग का दक्षिणी किनारा है। यहां भारतीय सैनिक 29-30 अगस्त की रात में काबिज हो गए थे। इसके बाद स्पेशल फोर्सेज के जवानों ने कालाटॉप, हेलमेट टॉप पर कब्जा जमाकर तिरंगा झंडा फहरा दिया।
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लद्दाख में जहां पाओ, वहां कब्जा करो
भारत और चीन की सेना के बीच लद्दाख में यही चल रहा है। भारतीय सैनिकों ने चीन के सैनिकों को स्पांगुर गैप, स्पांगुर लेकर की तरफ जाते हुए देखकर उनसे पहले वहां अपना कब्जा जमा लिया। तिरंगा झंडा भी फहराया और चोटी पर आने की कोशिश कर रहे चीनी सैनिकों को माइक से वापस लौट जाने के लिए कहा। सूत्र बताते हैं कि यही स्थिति फिंगर 2 और फिंगर 3 के बीच में भी हुई। फिंगर 4 के इलाके में चीनी फौज डटी है, लेकिन कालाटॉप और हेलमेट टॉप से चीनी सैन्य शिविर साफ नजर आते हैं। इन्हें निशाना बनाया जा सकता है। लिहाजा चीन के राजनयिकों, सैन्य कमांडरों के माथे पर अब बल पड़ना शुरू हो गया है। इसके जवाब में चीनी सैनिक नए स्थान पर जाने की रणनीति पर चल रहे हैं।
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चीन पर बढ़ रहा है अंतरराष्ट्रीय दबाव
पहले चीन अमेरिका की प्रतिक्रिया पर बहुत कान नहीं दे रहा था। भारत की अपील को भी पड़ोसी देश हल्के में ले रहा था। लेकिन पिछले तीन चार-दिन के बयानों में चीन की बेचैनी साफ देखी जा रही है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन पर कोविड-19 का फायदा उठाकर पड़ोसी देशों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया। माइक पोम्पियो ने इसे चीन की भारत के साथ चल रही दादागिरी से जोड़ा। 

अमेरिकी राजनयिक राबर्ट स्टिलविल ने भी कहा कि चीन कोविड-19 संक्रमण का लाभ लेने में जुटा है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ जो हो रहा है, वह इसका साफ उदाहरण है। उन्होंने चीन के मित्र देशों से कहा कि उन्हें इस मामले में शांतिपूर्ण समाधान की पहल करनी चाहिए। अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी स्टीफेन बेगन ने भी भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा के दौरान गलवां घाटी की घटना तथा लद्दाख में घुसपैठ पर चीन को आईना दिखाया।

चीन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। भारत में चीन दूतावास के प्रवक्ता ने इसे अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों की शीत युद्ध की मानसिकता के साथ जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी तथ्यों की अनदेखी करके अफवाह फैलाने में लगे हैं। चीन के राजनयिकों की भाषा में बदलाव आया है और विदेश मंत्री वांग यी ने भी लद्दाख में भारत के साथ तनाव को बातचीत, कूटनीतिक और सैन्य वार्ता के तहत शांति से सुलझाने की बात कही है।

जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन पर चौतरफा दबाव बढ़ गया है। अमेरिका, भारत, आस्ट्रेलिया और जापान के फोरम, साझीदारी बढ़ने की संभावना से उसे कड़ा संदेश मिल रहा है। इसके अलावा अन्य देशों ने भी चीन पर दबाव बढ़ाया है।

सैन्य रणनीति में भारत ने किया बदलाव
अभी तक भारत चीन के साथ रिश्ते की अहमियत देकर सैन्य रणनीति को रक्षात्मक रखकर चल रहा था। सेना मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि चीन की पिछली सभी घुसपैठ के दौरान भारतीय सेना हमेशा रक्षात्मक मोड में रही है। यहां तक कि मई 2020 से पिछले सप्ताह तक भारतीय सेना रक्षात्मक नीति लेकर ही चल रही थी। लेकिन अब इस नीति में एक बदलाव आया है। 


सूत्र बताते हैं कि बिना चीन के सैनिकों के उकसावे में सेना आक्रामक रणनीति को लेकर चल रही है। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। बताते हैं खाली पड़ी चौकियों पर भारतीय सेना के विशेष कमांडो दस्ते के मूव का प्रयास तेज हो गया है। चीन अक्साई चिन की तरफ आक्रामक हो रहा है तो जवाब में भारतीय सेना भी अपने भू-भाग पर काबिज हो रही है।

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