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Chimpanzee: विलुप्ति की कगार पर पहुंचे चिंपांजी, वनों की कटाई और अवैध शिकार रही प्रमुख वजह

Thu, 20 Jul 2023 05:39 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 20 Jul 2023 05:39 AM IST
सार

इनकी जनसंख्या अब गाम्बिया, बुर्किना फासो, बेनिन या टोगो में नहीं पाई जाती है। वे तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। सबसे दुर्लभ उप-प्रजातियों में नाइजीरिया-कैमरून चिम्पांजी हैं। कैमरून में सांगा नदी के उत्तर में और दक्षिण-पश्चिमी नाइजीरिया के जंगलों में अब यह 6,000 से भी कम बचे हैं।

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Chimpanzee on verge of extinction deforestation and poaching is main reason
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

विस्तार

अवैध शिकार, जंगलों की कटाई...संक्रमण और बुशमीट की वजह से चिंपांजी की संख्या लगातार घट रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यूं तो अफ्रीका से प्रजातियों के विलुप्त होने की खबरें नियमित रूप से आती रहती हैं। अब इसमें चिम्पांजी प्रमुख रूप से शामिल हो गए हैं। बुशमीट मूल रूप से उन वन्य जीव प्रजातियों के लिए एक अफ्रीकी शब्द है जिसका मानव उपभोग के लिए शिकार किया जाता है।

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इनकी जनसंख्या अब गाम्बिया, बुर्किना फासो, बेनिन या टोगो में नहीं पाई जाती है। वे तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। सबसे दुर्लभ उप-प्रजातियों में नाइजीरिया-कैमरून चिम्पांजी हैं। कैमरून में सांगा नदी के उत्तर में और दक्षिण-पश्चिमी नाइजीरिया के जंगलों में अब यह 6,000 से भी कम बचे हैं। इसे अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) द्वारा गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति के रूप में नामित किया गया है। ज्यादातर चिम्पांजी अब भी अफ्रीका में पाए जाते हैं। कांगो बेसिन को दुनिया के दूसरे हरित फेफड़े के रूप में जाना जाता है। दुर्भाग्य से महाद्वीप में हर साल 4 मिलियन हेक्टेयर जंगल काटे जाते हैं, जो वैश्विक औसत की दर से दोगुना है। चिंपैंजियों की संख्या लगातार घटने का यह भी एक प्रमुख कारण है। महाद्वीप में इनकी संख्या केवल 15 से 20 लाख के बीच है। इनमें से अधिकांश मध्य अफ्रीका तक ही सीमित हैं। मुख्य रूप से गैबॉन, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और कैमरून तक ही ये पाए जाते हैं।

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धीमी प्रजनन दर से आबादी बढ़ने में लगता है समय
जब युवावस्था के नर या मादा चिम्पांजी का शिकार हो जाता है तो इनकी धीमी प्रजनन दर के कारण आबादी बढ़ने में काफी समय लगता है। एक चिम्पांजी को प्रजनन करने वाले नर या मादा के रूप में तैयार होने में करीब 14 से 15 साल लगते हैं। दुनिया भर के चिड़ियाघरों में चिंपांजी तेजी से  घट रहे हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन आॅफ नेचर ने इन्हें रेड लिस्ट में डाल दिया है और संरक्षण के लिए आगाह किया है।

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ये भी जिम्मेदार
शोधकर्ता वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो अगले दो दशकों में यह विलुप्त हो जाएंगे। इनके अस्तित्व पर कई खतरे हैं। इनके आवास क्षेत्र के सूखे हिस्सों जैसे, एमबीएम जेरेम नेशनल पार्क, कैमरून में बामेंडा हाइलैंड्स और नाइजीरिया में गशाका गुमटी और माम्बिला में चरवाहों ने चरागाह भूमि के लिए जंगलों में आग लगाई। बुशमीट के लिए इनका शिकार बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है। पर्यावास के नष्ट होने से नाइजीरियश-कैमरून चिम्पांजी को अन्य चिम्पांजी समुदायों वाले क्षेत्रों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जहां उन्हें आक्रामकता का सामना करना पड़ता है, जिससे इनकी मौतें होती हैं।

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