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घाटी में पैलेट गन की जगह अब लेंगे मिर्च वाले 'पावा शेल'

Sat, 27 Aug 2016 06:12 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sat, 27 Aug 2016 06:12 PM IST
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Chilli-filled ‘PAVA shells’ likely to replace pellet guns
गृह मंत्रालय की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए इसे बेहतर विकल्प मान रही - फोटो : getty
कश्मीर में जल्द ही मिर्च पर आधारित पावा शैल पैलेट गन की जगह ले सकते हैं। गृह मंत्रालय की ओर से पैलेट गन का विकल्प तलाशने के लिए गठित की गई विशेषज्ञ समिति पावा शैल को कश्मीर जैसी जगहों पर प्रदर्शनकारियों से निपटने का बेहतर विकल्प मान रही है। पावा शैल पैलेट गन की तुलना में कम घातक है। इस्तेमाल किए जाने पर यह प्रदर्शनकारियों को कुछ देर के लिए सन्न और शिथिल कर देगा। 
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समिति ने हाल में विकसित किए गए पावा शैल का इस सप्ताह के शुरू में ही टेस्ट फील्ड में प्रदर्शन भी किया है। समिति ने माना है कि कश्मीर जैसी जगहों पर प्रदर्शनकारियों से निपटने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पावा शैल का बेहद कारगर इस्तेमाल किया जा सकता है। 
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) में पावा शैल का करीब एक साल से परीक्षण चल रहा है। आईआईटीआर भारतीय विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की लखनऊ स्थित लैब है। पावा शैल ऐसे समय विकसित हुआ है, जब कश्मीर में हालात खराब हैं। 
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समिति ने सिफारिश की है कि ग्वालियर स्थित बीएसएफ की टीयर स्मोक यूनिट (टीएसयू) को तत्काल पावा शैल का बड़ी मात्रा में उत्पादन करने को कहना चाहिए। पहली खेप में कम से कम 50 हजार पावा शैल तैयार कराए जाने चाहिए। समिति का कहना है कि पावा शैल फटने पर लोग सन्न रह जाएंगे और कुछ देर के लिए जैसे पंगु हो जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि समिति अपनी रिपोर्ट को इस सप्ताह के अंत तक अंतिम रूप दे देगी। 

पैलेट गन का विरोध क्यों?

Chilli-filled ‘PAVA shells’ likely to replace pellet guns
यह प्रदर्शनकारियों को कुछ देर के लिए सन्न और शिथिल कर देगा - फोटो : getty
कश्मीर में जारी हिंसा के दौरान उपद्रवियों से निपटने के लिए इस्तेमाल की जा रही पैलेट गन से बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। बड़ी संख्या में लोगों को आंखों की रोशनी भी गंवानी पड़ी है। संसद में भी पैलेट गन का मुद्दा उठा था और इसका इस्तेमाल बंद करने की मांग की गई थी। बृहस्पतिवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा कि 2010 में कहा गया था कि पैलेट गन कम घातक है, लेकिन अब इसका विकल्प तलाशने की जरूरत महसूस की जा रही है। 

पावा नाम क्यों
पावा नाम से आशय पेलरगोनिक एसिड वेनिलाइल एमाइड (पीएवीए) से है, जिसे नोनीवैमाइड भी कहा जाता है। यह एक रासायनिक अवयव है, जो मिर्च में पाया जाता है। मिर्च का तीखापन मापने वाले पैमाने स्कोविले पर पावा को चरम से भी ऊपर की श्रेणी में रखा गया है। इससे साफ है कि यह मनुष्य को बुरी तरह परेशान कर देगा और कुछ देर के लिए पंगु जैसा बना देगा। खास बात यह भी है कि इस रासायनिक अवयव का इस्तेमाल खाने में तीखा जायका बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। समिति ने कहा है कि पावा नुकसानदायक नहीं है। यह चिली ग्रेनेड और आंसू गैस के गोलों से बेहतर है। सुरक्षा बल इसका इस्तेमाल आंसू गैस के गोलों के साथ भी कर सकते हैं। 

समिति ने कश्मीर समेत अन्य जगहों पर प्रदर्शनकारियों से निपटने के गैर घातक या कम घातक कुछ अन्य उपायों की सिफारिश भी है। इनमें डाई मार्कर ग्रेनेड भी शामिल है। 
डाई मार्कर ग्रेनेड 
इसके इस्तेमाल से लोग परेशान तो हो ही जाएंगे साथ ही उन पर एक निशान भी बन जाएगा, ताकि सुरक्षा बल उन्हें आसानी से पहचान सकें। 
टीयर स्मोक शैल विद सॉफ्ट नोज
आंसू गैस का यह गोला सीधे प्रदर्शनकारियों को लगने पर भी उन्हें गंभीर चोट नहीं लगेगी। इसकी प्लास्टिक बॉडी नीचे गिरते ही पिघलने लगेगी और इसमें धुआं निकलने लगेगा। प्रदर्शनकारी इसे उठाकर सुरक्षा बलों पर वापस नहीं फेंक सकेंगे। 
स्टन ग्रेनेड
बीएसएफ की टीएसयू द्वारा बनाया गया यह स्टेन ग्रेेनेड लोगों को कुछ देर के लिए सन्न कर देता है। कुछ देर के लिए उन्हें दिखना भी बंद हो जाता है।  
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