बच्चों में दूरदर्शिता: विश्वास दिलाया कि सुरक्षित हाथों में है भविष्य, पीएम को लिखे एक करोड़ से अधिक पोस्टकार्ड
जब हम अनिश्चितता को स्वीकार करते हैं तो खोजपूर्ण और रचनात्मक प्रक्रिया के जरिए कई संभावनाओं के बारे में भी सोचते और भविष्यवाणी करते हैं। इसे भविष्य की सोच कहा जा सकता है। लाखों बच्चों ने प्रधानमंत्री को विभिन्न विषयों पर लिखे पत्र में साबित किया कि उनमें दूरदर्शिता की कोई कमी नहीं है।
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हमारी स्कूली शिक्षा में रटने की प्रवृत्ति की आलोचना की जाती रही है। ऐसे में हम अपने बच्चों से अनजान भविष्य या अनदेखे अतीत पर विचार देने की उम्मीद नहीं कर सकते थे। लेकिन देश के बच्चों ने इन धारणाओं को गलत साबित किया है। आजादी के 75वें वर्ष पर देश के चार से 12 वर्ष तक के स्कूली बच्चों ने प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड लिखा। इसमें बच्चों ने 'हमारे स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायक' और '2047 के भारत के लिए मेरा विजन' जैसे विषयों पर लिखा। इन सभी पोस्टकार्ड पर लिखे लेखों के जरिए बच्चों ने भविष्य को देखने की अपनी सामर्थ्य का विश्वास दिलाया है।
पीएम को लिखे एक करोड़ से अधिक पोस्टकार्ड
भारत में लगभग 50 करोड़ पोस्टकार्ड प्रतिवर्ष लिखे जाते हैं। इसमें से एक करोड़ पोस्टकार्ड पीएम को गत दिसंबर और जनवरी में भेजे गए। बच्चों के इस उत्साह पर पीएम ने मन की बात कार्यक्रम में बच्चों को धन्यवाद भी दिया और बच्चों के पोस्टकार्ड के अर्थ व मूलभाव पर चर्चा भी की।
नायकों के योगदान की चर्चा
बच्चों ने हमारी आजादी के गुमनाम नायकों के योगदान और बलिदान के बारे में बड़े गर्व से चर्चा की है। एक बच्चे ने लिखा, भारतीय क्रांतिकारी मालंगिनी हाजरा ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया। उन्हें नमक कानून तोड़ने के लिए गिरफ्तार किया गया था। वे ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं। इसी तरह से एक अन्य छात्र ने बताया कि हम धीरे-धीरे तारा रानी, तिरोट सिंह, दुर्गाबाई देशमुख जैसी नायिकाओं को भूल रहे हैं। इनको याद करने के लिए हर वर्ष राष्ट्र का एक दिन समर्पित होना चाहिए।
बाल नायकों को भी दी तरजीह
पीएम को लिखे पोस्टकार्ड में बच्चों ने बाल नायकों को भी याद किया। जैसे गुजरात के सूरत के नायक शिरीष का बलिदान और बीरबाला के नाम से विख्यात वीर कनकलता बरुआ के बारे में भी बच्चों ने लिखा।
स्पष्ट दृष्टिकोण
आठवीं के एक छात्र के लिए भारत का दृष्टिकोण आत्मनिर्भरता, प्रकृति और विरासत से भरा है। वहीं, पांचवीं के एक बच्चे ने गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, लैंगिक भेदभाव और खाद्यान्न की कमी से मुक्त भारत के बारे में मार्मिक परिकल्पना प्रस्तुत की। नौवीं की छात्रा ने लिखा, मेक इन इंडिया के प्रतीक ने उसके मन को गर्व से भर दिया है। एक बच्चे ने लिखा कि हम एक शक्तिशाली देश हैं। वहीं सातवीं के एक छात्र ने लिखा, 2047 में मेरे देश को पर्यावरण उत्पादों को उपयोग करने के साथ-साथ किसानों को अधिक तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए।
वैज्ञानिक परिकल्पना भी
कुछ बच्चे ऐसे भी हैं, जिन्होंने वैज्ञानिक स्वभाव और परिकल्पना को विस्तार दिया। बच्चों ने अंतरिक्ष के लिए उच्च क्षमता विकसित करने, खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उच्च स्थान हासिल करने, चंद्रयान-2 और चंद्रमा पर शोध केंद्र तथा मंगल ग्रह को मनुष्य के रहने योग्य बनाने के बारे में लिखा। एक बच्चे ने कहा कि योग, आयुर्वेद और कृषि स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनें।