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तीन सालों में बाल हेल्पलाइन को मिले 1.36 करोड़ खामोश कॉल

Sat, 25 Aug 2018 08:24 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Aug 2018 08:24 AM IST
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Child Helpline got 1.36 crore silent calls in 3 years which indicates a mute call for help

बाल हेल्पलाइन 1098 को अप्रैल 2015 और इस साल मार्च तक की अवधि के बीच में 3.4 करोड़ फोन आए हैं। जिनमें से 1.36 करोड़ खामोश (साइलेंट) फोन थे। जिसमें बैकग्राउंड की आवाजें तो सुनाईं दे रही थीं लेकिन फोन करने वाला शख्स ने कुछ मिनटों तक फोन किया लेकिन कुछ नहीं कहा। जो मदद के लिए एक दबी हुई पुकार की तरफ इशारा करती है।

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चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन की हरलीन वालिया का कहना है, '1098 पर आए इन खामोश फोन कॉल को बहुत ही गंभीरता से लिया जाता है।' डाटा दिखाते हैं कि साइलेंट कॉल्स जो 2015-16 के बीच केवल 27 लाख थे वह 2016-17 के बीच बढ़कर 55 लाख हो गए हैं। साल 2017-18 के बीच यह आंकड़ा 53 लाख का है। वालिया ने कहा, 'साइलेंट कॉल के मामले में हेल्पलाइन पर मौजूद शख्स को यह निर्देश दिए गए हैं कि वह इस तरह से बात करे ताकि रिसीवर कॉलर के मन में विश्वास पैदा करे और वह उससे बात करके उनके साथ जानकारी साझा कर सके।'
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साइलेंट कॉलर्स ज्यादातर बच्चे या युवा होते हैं जो दोबारा फोन कर सकते हैं और किसी परेशानी या संकट में फंसे बच्चे के बारे में इंगित करते हैं। वालिया ने बताया, 'ऐसा बहुत कम होता है कि बच्चा पहली बार में बोले। ऐसे में काउंसलर उससे बात करके उसके अंदर विश्वास पैदा करता है और उसे बाहर निकालता है। इसी तरह साइलेंट कॉलर की जिम्मेदारी होती है कि वह उस परिस्थिति में कॉलर के मन में विश्वास पैदा करने की कोशिश करे।'
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उल्लेखनीय यह है कि इन कॉलर्स में वह बच्चे भी शामिल हैं जिन्हें भावनात्मक सपोर्ट के लिए और तनावग्रस्त परिवार की परिस्थिति जैसे कि पैरेंट्स का अलग होना और परिवार के बिखरने की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में कई बार इन परिस्थितियों से जूझते हुए लोगों के फोन आते हैं। 3.4 करोड़ कॉल्स में से हेल्पलाइन ने केवल 6 लाख में हस्तक्षेप किया। यह आकंड़ा मदद के लिए फोन करने वालों की तुलना में बहुत छोटा है। इससे यह पता चलता है कि बहुत से बच्चों को मदद की जरुरत है।


डाटा दिखाते हैं कि हस्तक्षेप की संख्या पहले की तुलना में बढ़ी है। 2015-16 के दौरान 1.7 लाख, 2016-17 के दौरान 2.1 लाख और 2017-18 के दौरान 2.3 लाख मामलों मे हस्तक्षेप किया गया है। इन 6 लाख मामलों में से 2 लाख से ज्यादा दुर्व्यवहार से सुरक्षा की श्रेणी के थे। इस कारण की वजह से कम से कम 81,147 कॉलर्स ने अकेले 2017-18 के दौरान मदद मांगी है।

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