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येदियुरप्पा का आदेश, कर्नाटक में नहीं मनाई जाएगी टीपू सुल्तान की जयंती, मचा सियासी घमासान
Tue, 30 Jul 2019 09:21 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
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Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 30 Jul 2019 09:21 PM IST
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बीएस येदियुरप्पा
- फोटो : ANI
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कन्नड़ और संस्कृति विभाग को टीपू जयंती नहीं मनाने का आदेश दिया है। यह आदेश सोमवार को कैबिनेट की बैठक में जारी किया गया था। इस फैसले को लेकर सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस नेता व पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने इसे लेकर भाजपा पर हमला बोला है और उसे सांप्रदायिक पार्टी कर दिया है।
पूर्ववर्ती मैसूर साम्राज्य के 18वीं सदी के विवादित शासक टीपू सुल्तान की जयंती पर आयोजित होने वाले वार्षिक समारोह को कनार्टक की भाजपा सरकार ने मंगलवार को रद्द कर दिया। इस समारोह का आयोजन 2015 से हो रहा था। बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली नई सरकार ने सत्ता में आने के तीन दिन के भीतर यह आदेश पारित किया। एक दिन पहले ही राज्य विधानसभा में येदियुरप्पा की सरकार ने विश्वासमत हासिल किया था।
सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 2015 में टीपू जयंती के अवसर पर 10 नवंबर को वार्षिक समारोह के आयोजन की शुरुआत की थी और भाजपा और अन्य के विरोध के बावजूद एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जदएस की गठबंधन सरकार ने पिछले साल भी इसे जारी रखा था।
कथित तौर पर यह माना जाता है कि कडगु लोगों के खिलाफ टीपू सुल्तान ने बिना किसी कारण के युद्ध शुरू किया था। इस युद्ध में बड़ी संख्या में कडगु लोग मारे गए थे। टीपू जयंती मनाने पर कडगु समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत होने की बात उठती रही है।
सोमवार को येदियुरप्पा ने विधानसभा में ध्वनिमत से विश्वास मत हासिल किया था। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ने कार्रवाई करते हुए कांग्रेस-जेडीएस के 17 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। बहुमत साबित करने के लिए येदियुरप्पा को 224 सदस्यों वाली विधानसभा में 104 विधायकों का समर्थन चाहिए था। एक निर्दलीय समेत उनके पास 106 विधायकों का समर्थन था।
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Chief Minister BS Yediyurappa led Karnataka Government orders Kannada & Culture Department, to not celebrate Tipu Jayanti. The decision was taken during yesterday's cabinet meeting. (file pic) pic.twitter.com/6slPyDaq8w
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 30, 2019
पूर्ववर्ती मैसूर साम्राज्य के 18वीं सदी के विवादित शासक टीपू सुल्तान की जयंती पर आयोजित होने वाले वार्षिक समारोह को कनार्टक की भाजपा सरकार ने मंगलवार को रद्द कर दिया। इस समारोह का आयोजन 2015 से हो रहा था। बी एस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली नई सरकार ने सत्ता में आने के तीन दिन के भीतर यह आदेश पारित किया। एक दिन पहले ही राज्य विधानसभा में येदियुरप्पा की सरकार ने विश्वासमत हासिल किया था।
सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 2015 में टीपू जयंती के अवसर पर 10 नवंबर को वार्षिक समारोह के आयोजन की शुरुआत की थी और भाजपा और अन्य के विरोध के बावजूद एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जदएस की गठबंधन सरकार ने पिछले साल भी इसे जारी रखा था।
सिद्धारमैया ने किया विरोध
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने इसपर विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि मैंने ही टीपू जयंती मनाना शुरू किया था। मेरे हिसाब से वे देश के पहले स्वतंत्रता सेनानी थे। भाजपा के लोग धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं। राज्य में 2015 से भाजपा के विरोध के बाद भी टीपू जयंती मनाई जा रही थी। भाजपा का मानना है कि प्रदेश में कभी भी टीपू जयंती मनाने की परंपरा नहीं रही। कडगु के स्थानीय निवासी टीपू जयंती का विरोध करते रहे हैं।Former Karnataka CM and Congress leader Siddaramaiah on Karnataka govt order to not celebrate Tipu Jayanti: I only started Tipu Jayanti celebrations. According to me, he was the first freedom fighter in the country. BJP people are not secular. pic.twitter.com/80ny4pnDIc
— ANI (@ANI) July 30, 2019
कथित तौर पर यह माना जाता है कि कडगु लोगों के खिलाफ टीपू सुल्तान ने बिना किसी कारण के युद्ध शुरू किया था। इस युद्ध में बड़ी संख्या में कडगु लोग मारे गए थे। टीपू जयंती मनाने पर कडगु समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत होने की बात उठती रही है।
सोमवार को येदियुरप्पा ने विधानसभा में ध्वनिमत से विश्वास मत हासिल किया था। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ने कार्रवाई करते हुए कांग्रेस-जेडीएस के 17 बागी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। बहुमत साबित करने के लिए येदियुरप्पा को 224 सदस्यों वाली विधानसभा में 104 विधायकों का समर्थन चाहिए था। एक निर्दलीय समेत उनके पास 106 विधायकों का समर्थन था।