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सुप्रीम कोर्ट: सीजेआई रमन्ना ने कानून मंत्री के सामने ही उठाए इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल, बोले- अदालतों का बेहतर बुनियादी ढांचा सिर्फ एक विचार
Sat, 23 Oct 2021 02:05 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sat, 23 Oct 2021 02:05 PM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह मानसिकता बन चुकी है कि भारत की अदालतें जर्जर इमारतों में ही चलती हैं। उन्होंने कहा कि मैंने राष्ट्रीय न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राधिकरण की स्थापना के लिए प्रस्ताव भेजा है।
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मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने शनिवार को बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के उपभवन के उद्घाटन के मौके पर अदालतों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भारत के यह मानसिकता है कि अदालतें जर्जर इमारतों के बीच ही संचालित होती हैं। जिस समय सीजेआई एनवी रमन्ना अदालतों के बुनियादी ढांचे पर टिप्पणी कर रहे थे, उनके साथ मंच पर कानून मंत्री किरण रिजिजू भी मौजूद थे।
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बेहतर बुनियादी ढांचा हमेशा एक विचार ही रहा
सीजेआई एनवी रमन्ना ने कहा कि यह मानसिकता बन चुकी है कि भारतीय अदालतें जर्जर इमारतों में संचालित होती हैं, जिससे न्यायिक कार्यों को करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि लोगों के लिए आज भी अदालतों को बेहतर बुनियादी ढांचा एक विचार ही है।
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न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भेजा प्रस्ताव
राष्ट्रीय न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राधिकरण की स्थापना के लिए मुख्य न्यायाधीश की ओर से एक प्रस्ताव कानून मंत्रालय को भेजा गया है। उद्घाटन के इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं कानून मंत्री से आग्रह करता हूं कि संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे को उठाकर प्रस्ताव में तेजी लाई जाए।
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लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटी देता है न्यायालय
सीजेआई ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज के लिए न्यायालयों का होना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों का सबसे ज्यादा भरोसा न्याय व्यवस्था पर ही होता है और एक लोकतंत्र में न्यायालय ही आम आदमी को उसके लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटी देता है।
वक्त पर इंसाफ नहीं, तो जीडीपी को नौ फीसदी नुकसान
बुनियादी सुविधाओं का अभाव व्यवस्था की गहराई में मौजूद समस्या है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, समय पर न्याय न मिलने से देश की सालाना जीडीपी में नौ फीसदी तक नुकसान होता है। यही नहीं, विदेशी निवेश पर भी इसका असर पड़ता है। -जस्टिस एनवी रमण, मुख्य न्यायाधीश
3,800 अदालत कक्ष व जजों के 4,000 आवास बनवा रहे : रिजिजू
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि सरकार ने न्यायिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के लिए राज्य सरकारों संग 9,000 करोड़ की योजना बनाई है। इनसे 3,800 अदालत कक्ष, 4,000 न्यायिक अधिकारियों के आवास और 1,450 अधिवक्ता हॉल व इतने ही शौचालय कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। अदालतों को 3,800 डिजिटल कक्ष भी दिए जा रहे हैं।
रिजिजू ने कहा, सफल लोकतंत्र के लिए मजबूत न्यायपालिका सबसे अहम है। बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। लोकतंत्र के तीनों अंगों में सौहार्दपूर्ण रिश्ते होने चाहिए। 9,000 करोड़ में से केंद्र 5,357 करोड़ रुपये और बाकी राज्य सरकारें देंगी।
रिजिजू ने बताया, सुप्रीम कोर्ट 9 जुलाई तक 96,239 बार वर्चुअल अदालत लगाकर विश्व में सबसे आगे है। महामारी के दौरान इंसाफ देने का यह प्रभावी तरीका बना। जिला अदालतों ने भी 97.25 लाख मुकदमे सुने, तो उच्च न्यायालयों में 51.38 लाख मामले 11 अक्तूबर तक सुने गए।
ग्राम न्यायालय भी सुधार रहे, अदालतें कंप्यूटराइज
ग्राम न्यायालय सुधारने के लिए भी ई-कोर्ट मिशन प्रोजेक्ट के तहत काम हुआ है। 18,735 अदालतें कंप्यूटराइज की हैं। आज नागरिक 19.43 करोड़ मुकदमे देख सकते हैं, 15.50 करोड़ आदेश पढ़ सकते हैं। -किरेन रिजिजू, केंद्रीय कानून मंत्री
...और जस्टिस चंद्रचूंड़ बोले- न्यायपालिका को अपने भीतर भी झांकना होगा
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, नए भवन का उत्सव मनाने के साथ न्यायपालिका को अपने भीतर भी झांकना होगा, जहां बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, अकेले महाराष्ट्र में 48 लाख मुकदमे लंबित हैं। इनमें तीस साल से ज्यादा पुराने 21 हजार मुकदमे हैं।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने वर्चुअल अदालतों का समर्थन किया। कहा, हर नागरिक को कोर्ट की कार्यवाही देखने का मौका मिलना चाहिए। यह जानना उनका हक है कि जज कितने समय बैठते हैं, क्यों कुछ केसों में बार-बार तारीखें पड़ती रहती हैं, अंदर क्या चलता है?