कोरोना कमेटी के चीफ डॉक्टर ने कहा- किसी से 15 मिनट से ज्यादा न मिलें क्योंकि...
दिल्ली में कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने की लगातार कोशिशें हो रही हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां हॉटस्पॉट एरिया लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में कोरोना को रोकने की क्या तैयारी चल रही है, यह जानने के लिए हमारे संवाददाता अमित शर्मा ने दिल्ली की कोरोना कमेटी के प्रमुख डॉ. एसके सरीन से बातचीत की। प्रस्तुत हैं वार्ता के प्रमुख अंश-
विस्तार
प्रश्न- डॉ. एसके सरीन, आपकी टीम कोरोना से निपटने की हर संभव कोशिश कर रही है, लेकिन इसके बाद भी दिल्ली में संक्रमण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। इसकी क्या वजह है?
उत्तर- जब मार्च में कोरोना कमेटी का गठन किया गया था, उस समय हमने सभी विशेषज्ञों के साथ बैठकर स्थिति का आकलन किया था। उस समय भी हमारा अनुमान था कि अप्रैल तक रोज लगभग सौ संक्रमित सामने आ सकते हैं। इस लिहाज से कहें तो आज की स्थिति का हमें पहले से अनुमान था। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि हमारा प्रयास सफल नहीं रहा। अगर सही कदम न उठाए गए होते तो आज स्थिति बहुत विकट हो जाती।
प्रश्न- अगर यह सही है तो आपके किन उपायों से कोरोना संक्रमण को रोकने में मदद मिली?
उत्तर- हमने किसी नए इलाके में कोई एक-दो नया केस मिलने के बाद भी पूरी गली, पूरी एरिया को हॉटस्पॉट घोषित कर दिया। हॉटस्पॉट वाले एरिया में घर-घर चेकिंग की गई। इससे एक बार में कई अन्य संक्रमित लोगों की जानकारी सामने आई, लेकिन इससे संक्रमण आगे बढ़ने से रुक गया। यही सबसे ज्यादा कारगर कदम साबित हुआ। अगर ऐसा न किया गया होता तो संक्रमण को रोकना मुश्किल हो जाता।
प्रश्न- अगर लॉक डाउन और एरिया सील करना ही कोरोना संक्रमण रोकने का तरीका है तो क्या इस स्थिति में दिल्ली की दुकानों को खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए?
उत्तर- देखिए, ये राजनीतिक प्रश्न है। सरकार के पास व्यापक जानकारी होती है, वह बहुत सारी चीजों को देखकर फैसले लेती है। उसके विषय में मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। सरकार जो भी फैसला लेगी, हम उसके मुताबिक आगे बढ़ेंगे।
प्रश्न- क्या मई में कोरोना संक्रमण की स्थिति बढ़ सकती है? और अगर सीधे समुदाय संक्रमण की बात करें तो हम उससे कितना दूर हैं?
उत्तर- अभी समुदाय संक्रमण वाली स्थिति नहीं है। लेकिन मैं यह अवश्य कहूंगा कि हमें यह समझकर चलना चाहिए कि हमें कोरोना के संक्रमण के खतरे के साथ आगे चलना है। इसलिए सरकार जब भी दुकानों-बाजारों को खोलने की अनुमति देगी, हमें संक्रमण से बचने की पूरी सावधानी बरतनी होगी।
प्रश्न- कोरोना के मामले में इस समय आपके सामने सबसे बड़ा खतरा क्या है?
उत्तर- हमारी सबसे बड़ी चुनौती बिना लक्षण वाले लगभग 69 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीज हैं। जिनमें संक्रमण नजर आ जाता है उनसे तो सभी सावधान रहते हैं और वे स्वयं भी सचेत रहते हैं। लेकिन जिनके अंदर संक्रमण नजर नहीं आता वे कहीं भी आते-जाते और लोगों से मिलते हैं। उनसे संक्रमण फैलने का सबसे बड़ा खतरा है।
प्रश्न- इस खतरे से बचने के लिए आप क्या सुझाव देंगे? इस स्थिति से निपटने के लिए क्या करेंगे?
उत्तर- अब तक की हमारी समझ है कि बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित लोगों के संपर्क में 15 मिनट तक लगातार बने रहने के बाद संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है। अगर लोग ज्यादा समय के लिए एक-दूसरे के साथ न घुलें-मिलें तो बिना लक्षण वाले मरीज के संक्रमण से बचा जा सकता है। हमारी सबसे प्रमुख अपील है कि बिना वजह ज्यादा देर तक किसी से न मिलें। स्थिति को खराब होने से रोकने के लिए हम लगातार टेस्टिंग बढ़ा रहे हैं। इस समय हम लगभग दो हजार टेस्ट रोज कर रहे हैं। अब पूल टेस्टिंग की विधि भी काम कर रही है जिससे एक ही बार में हम चार-पांच लोगों की टेस्टिंग कर रहे हैं। इसे बढ़ाकर ही हम कोरोना को रोक सकेंगे।
प्रश्न- कोरोना से निपटने की आपकी तैयारी अब किस स्तर पर है? इलाज की उम्मीद कितनी है?
उतर- अगर स्थिति से निपटने की तैयारी वाली बात करें तो हमने दूसरे स्टेज में 500 मरीज रोज और तीसरे स्टेज में एक हजार संक्रमित लोगों के रोज सामने आने की तैयारी कर रखी है, इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है। हमारी कोशिश है कि स्थिति इस स्तर तक आने ही न पाए। हम स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस बीच हम प्लाज्मा विधि से कोरोना संक्रमित लोगों के इलाज पर काम कर रहे हैं। शुरुआती सफलता काफी उत्साहजनक रही है। इसका पूरा परिणाम सामने आने में तो लगभग 15 दिन का समय लग जाएगा। लेकिन हमें उम्मीद भी इसी से है। हमारी कोशिश है कि हम एक 'प्लाज्मा बैंक' बना लें जिससे संक्रमण की पहली स्टेज में ही हम लोगों का इलाज कर सकें।