सिब्बल और चिदंबरम का BJP पर हमला, कहा - यूपी चुनाव में इतना कैश कहां से लाई भाजपा
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पूर्व वित्त मंत्री पी. चिंदबरम का मानना है कि नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में एक से डेढ़ साल लगेंगे। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को समझने के लिए जो मानक हैं उसके आंकड़ों से स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था ठीक नहीं है। ग्रास वैल्यू एडिशन यानि जीवीए और अन्य मानकों का ट्रेंड देखकर लगता कि अर्थव्यवस्था ठीक कैसे हो सकती है। उन्होंने पिछले तीन सालों के प्रत्येक तिमाही के जीवीए के आंकड़े पेश किए जिसमें लगातार गिरावट दर्ज हुई है।
अखिल भारतीय कांग्रेस के कानून एवं मानवाधिकार विभाग की ओर से कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित सेमिनार में चिदंबरम ने ये बात कही। इस मौके पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेक सिंह आहलूवालिया, सांसद कपिल सिब्बल ने भी अपने विचार रखे। सेमिनार में नोटबंदी पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी संदेश भी पढ़ा गया।
चिदंबरम ने कहा नोटबंदी का असर सरकारी उपक्रमों पर नहीं पड़ा है। बिजली, पानी उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को पुराने नोट में उसका पुराना बकाया मिल गया। लिहाजा इसका असर जीडीपी में नहीं दिख रहा है। मानसून अच्छा रहने से कृषि उत्पादन पर फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार को अर्थशास्त्री अमत्र्य सेन के सवाल का उत्तर देना चाहिए। सरकार ने नोटबंदी पर जो तर्क दिया था उसका एक भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है। हाईक्वालिटी नोट की नकली करेंसी लगातार पकड़ी जा रही है।
सिब्बल ने नोटबंदी को बताया बड़ा स्कैम
कपिल सिब्बल ने नोटबंदी को बड़ा स्कैम बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर नोटबंदी के बाद भी यूपी के चुनाव में भाजपा के पास कहां से इतना कैश आ रहा है। लगता ही नहीं कि वहां नोटबंदी हुई थी। उन्होंने जेपीसी की मांग के साथ राष्ट्रीय स्तर पर जांच कराने और राजनीतिक दलों ,उद्योगपतियों की नोटबदली की जांच की मांग की।
सिब्बल ने कहा कि सरकार ने चुनाव के लिए जीडीपी के आंकड़े दिए हैं। ग्रामीण इलाकों के आंकड़े जुटाए नहीं जाते हैं इसलिए आंकड़े विश्वनीय नहीं हैं। गलत आंकड़ों से सही फैसले नहीं लिए जा सकते हैं सरकार झूठ के रथ पर चल रही है। सिब्बल आरोप लगाया कि नोटबदली के खेल में राजनेता, बैंक अधिकारी शामिल रहे हैं।
आम लोगों ने तो कैश बदला लेकिन किसी उद्योगपति ने कतार में लगकर नहीं बदला। भाजपा के लिए चुनाव में नोटबंदी का कोई असर नहीं दिखा। क्या सोच थी क्यों किया। कुछ का कहना है सोच ये थी कि अपना किनारे लगा दें और दूसरों को फंसा देंगे। कभी न कभी बात जनता के सामने आएगी।
मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा कि विमुद्रीकरण से संगठित क्षेत्र बहुत प्रभावित नहीं है असंगठित क्षेत्र हुआ है जिसका असर बाद में दिखेगा। उन्होंने कहा कि जीडीपी के जो आंकड़े आते हैं वो अक्तूबर से दिसंबर तक के हैं हर तिमाही बदलते रहते हैं। ऐसे में कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है।