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गोबर की चौकीदारी!: ...जब किसान मंटूराम ने सीएम बघेल को बताया, पत्नी के साथ रातभर टॉर्च लेकर रखते हैं चोरों पर नजर

Thu, 19 May 2022 06:04 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 19 May 2022 06:04 PM IST
सार

मंटू राम ने बताया कि अब तक उन्होंने 1384 किलो गोबर करीब 28 हजार रुपये में बेचा है। वे छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना के तहत गोबर बेचते हैं। पहले कोई गोबर को पूछता तक नहीं था, लेकिन अब हर किसी की नजर गोबर पर लगी रहती है...

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chhattisgarh farmers are benefiting from state government godhan nyay yojana and earning money
किसान मंटूराम - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गोबर की चौकीदारी! जी हां, सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगेगा, लेकिन ये सच है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के कुटरू में रहने वाले किसान मंटूराम कश्यप गोबर की चौकीदारी करते हैं। ये बात उन्होंने ने स्वयं राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बताई। मौका था बीजापुर जिले के कुटरू में आयोजित भेंट मुख्यमंत्री के भेट मुलाकात कार्यक्रम का।

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चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री बघेल को मंटूराम ने बताया कि मैं रात में टॉर्च लगा कर गोबर की चौकीदारी करता हूं और इस काम मे मेरी पत्नी भी मेरा साथ देती हैं। वे छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना के तहत गोबर बेचते हैं। मंटराम ने बताया कि अब तक उन्होंने 1384 किलो गोबर करीब 28 हजार रुपये में बेचा है। पहले कोई गोबर को पूछता तक नहीं था, लेकिन अब हर किसी की नजर गोबर पर लगी रहती है। कुछ दिन पहले उनके एकत्र किए गोबर को गांव के कुछ लोग उठा ले गए थे। इसके बाद उन्होंने तय किया कि पत्नी के साथ रात में गोबर की निगरानी करेंगे।

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पत्नी के साथ शिफ्ट में चौकीदारी

मंटूराम कहते है कि वे गोबर की चौकीदारी रात भर करते हैं। उनके इस काम में उनकी पत्नी भी साथ देती हैं। रात भर जागना संभव नहीं है। इसलिए वे और उनकी पत्नी भी दो शिफ्ट में गोबर की देखरेख करती हैं। वह बताते हैं कि रात में कुछ देर वे चौकादारी करते हैं, फिर उनकी मेरी पत्नी टॉर्च लेकर गोबर की निगरानी करती हैं। गोबर की चौकीदारी की जरूरत आखिर क्यों पड़ी, इस पर मंटू राम कहते है कि रात में टॉर्च लेकर वे कई बार देखने जाते हैं कि गोबर कोई ले तो नहीं गया। वे कहते हैं कि जब से गोबर की कीमत मिलने लगी है, तब से गोबर सहेजकर रखना पड़ता है। एक दिन इकठ्टा किया हुआ गोबर कुछ लोग चुपचाप उठा ले गए। इसके बाद से गोबर की निगरानी करने लगा।

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उन्होने बताया कि उनके पास 15 गाय-भैंसे हैं। अब तक गोधन न्याय योजना से गोबर बेचकर करीब 28 हजार रुपये मिले हैं। पहले उनके मकान से पानी टपकता था, जिसे बहुत दिन से रिपेयर कराना चाहते थे। गोबर बेचकर मिले पैसे से उन्होंने मकान रिपेयर करा लिया है। मकान में प्लास्टर भी करा लिया है। अब छत से पानी टपकने की समस्या भी खत्म हो गई है।

क्या है गोधन न्याय योजना?

दरअसल, छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने गोधन न्याय योजना को पशु पालक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया है। इस योजना के माध्यम से सरकार पशुपालकों और किसानों से दो रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदती है। गोधन में महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा इस गोबर से जैविक खाद का निर्माण किया जाता है। गाय के गोबर से कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट और सुपर कंपोस्ट के अलावा कई अन्य चीजें भी बनाई जाती हैं। प्रदेश में गोधन न्याय योजना के तहत खरीदे गए गोबर से बिजली बनाने का कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में गाय के गोबर से अब ग्रीन एनर्जी का उत्पादन किया जा रहा है, इससे पर्यावरण को भी लाभ पहुंच रहा है एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी लाभ हो रहा है। गोबर से बिजली बनाने का निर्णय ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे को देखते हुए लिया गया है।

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