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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समस्या को लेकर सीएम भूपेश बघेल ने अमित शाह से की मुलाकात
Tue, 17 Nov 2020 04:09 PM IST
संजीव कुमार झा
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 17 Nov 2020 04:09 PM IST
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भूपेश बघेल और अमित शाह
- फोटो : ANI
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को राज्य में बढ़ती नक्सलवाद की समस्या को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके अलावा रोजगार और विकास के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गृह मंत्री को समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि बस्तर अंचल में लौह अयस्क प्रचुरता से उपलब्ध है। यदि बस्तर में स्थापित होने वाले स्टील प्लांट्स को 30 प्रतिशत छूट पर लौह अयस्क उपलब्ध कराया जाए, तो वहां सैकड़ों करोड़ का निवेश तथा हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।
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मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के कारण बड़े भाग में अभी तक ग्रिड की बिजली नहीं पहुंच पाई है। सौर उर्जा संयंत्रों की बड़ी संख्या में स्थापना से ही आमजन की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति तथा उनका आर्थिक विकास संभव है।
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उन्होंने वनांचलों में लघु वनोपज, वन औषधियां तथा अनेक प्रकार की उद्यानिकी फसलों के प्रसंस्करण एवं विक्रय की व्यवस्था के लिए कोल्ड चेन निर्मित करने हेतु अनुदान दिये जाने का आग्रह किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने राज्य के बस्तर अंचल के सातों आकांक्षी जिलों में आजीविका के साधनों के विकास हेतु कलेक्टरों को कम से कम 50-50 करोड़ रूपये की राशि प्रतिवर्ष दिए जाने की मांग की।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बस्तर के विकास के लिए एनएमडीसी का निजीकरण नहीं करने की बात कही, जिस पर गृह मंत्री ने विचार करने का आश्वासन दिया। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने आजीविका विकास, नक्सल क्षेत्रों में बैंकों, सड़कें, आधारभूत संरचना के विकास संबंधी मुद्दों पर गृहमंत्री से चर्चा की।
इसके साथ ही विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधिकारियों और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों की रायपुर में जल्द ही बैठक भी तय की गई है ।
इसके बाद बघेल केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ एथेनॉल के उत्पादन को लेकर बैठक करेंगे। उन्होंने कहा कि धान से एथेनॉल बनाने की अनुमति भारत सरकार से मिली है, लेकिन एक समस्या है कि धान एफसीआई से ही लेना पड़ेगा। ऐसे में हमारे पास जो धान और चावल जमा हैं उसका उपयोग नहीं हो पाएगा। हम इसकी मांग बैठक में रखेंगे।