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सीजफायर की आड़ में धोखा: पाक मदरसों में 'तालीम नहीं', आईईडी ब्लॉस्ट की ट्रेनिंग के लिए भेजे जा रहे युवा

Thu, 01 Jul 2021 09:55 PM IST
सुरेंद्र जोशी जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 01 Jul 2021 09:55 PM IST
सार

भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा पर संघर्ष विराम है, लेकिन इसकी आड़ में पड़ोसी राष्ट्र 'धोखा' कर रहा है। बॉर्डर पर शांति का ढोंग रचकर पाकिस्तान द्वारा बड़ी साजिश रची जा रही है। 
 

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Cheating under ceasefire: No Talim, but Traing of ied blasts in Pak madrasas, youth being sent for the this training
NIA (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए एवं जम्मू-कश्मीर पुलिस की इंटेलिजेंस इकाई के सूत्रों के अनुसार, देश के कई हिस्सों से 'तालीम' के नाम पर युवकों को पाकिस्तानी मदरसों में भेजा जा रहा है। वहां तालीम नहीं, बल्कि उन्हें 'इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस' यानी आईईडी ब्लास्ट तैयार करना सिखाया जाता है। इसके अलावा ड्रोन से हमला करना और संवेदनशील एवं सामरिक महत्व वाले स्थानों की तस्वीरें एवं वीडियो बनाना, ये सब उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा है। 

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जांच एजेंसियों के मुताबिक पहले ऐसी ट्रेनिंग में जम्मू-कश्मीर के युवाओं को शामिल किया जाता था, अब देश के दूसरे हिस्सों से भी युवाओं को गुमराह कर उन्हें तालीम के नाम पर पाकिस्तान भेजा जा रहा है। ऐसे ही गुमराह युवाओं के हाथों अहम स्थानों पर हमले कराने की साजिश रची जा रही है। पाकिस्तान यह सब तब कर रहा है, जब उसने सीमा पर सीज फायर का एलान कर रखा है। 
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24 जून को एनआईए ने दरभंगा धमाके की जांच हाथ में ली
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक दिन पहले ही इमरान मलिक और मोहम्मद नासिर खान को गिरफ्तार किया था। ये दोनों आतंकी हैदराबाद के नेमपल्ली इलाके में रह रहे थे। हालांकि मूल रूप उन दोनों का संबंध उत्तर प्रदेश के शामली क्षेत्र से है। बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर 17 जनवरी 2021 को एक पार्सल में धमाका हुआ था। एनआईए ने इस मामले की जांच 24 जून को अपने हाथ में ले ली थी। 
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लश्कर का हैंडलर व एक अन्य गिरफ्तार
इस केस में जांच एजेंसी ने लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर इमरान मलिक और मोहम्मद नासिर खान को पकड़ा है। इनसे पूछताछ में खुलासा हुआ है कि उन्होंने पूरे भारत में बड़े पैमाने पर लोगों के  जानमाल को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। 

दोनों आरोपी भाई और आईईडी के एक्सपर्ट

दोनों आरोपी भाई हैं और आईईडी तैयार करने के एक्सपर्ट हैं। एनआईए की पूछताछ में सामने आया है कि मोहम्मद नासिर खान तो 2012 में आईईडी तैयार करने की ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान गया था। वहां पर लश्कर-ए-तैयबा ने उसे विस्फोट सामग्री तैयार करनी सिखाई थी। पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा केवल लश्कर-ए-तैयबा के मार्फत ही नहीं, बल्कि कई दूसरे आतंकी संगठनों की मदद से भारत के गुमराह हुए युवाओं को आईईडी बनाने और हमले करने की ट्रेनिंग दी जा रही हैं। इन युवाओं को पाकिस्तान के धार्मिक मदरसों और दूसरे शैक्षणिक संस्थानों में तालीम लेने के नाम पर दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास द्वारा बिना किसी दिक्कत के वीजा प्रदान कर दिया जाता है। 


जांच एजेंसी के मुताबिक, कश्मीर घाटी में सक्रिय रहे कई आतंकवादी पहले पाकिस्तान गए हैं और वहां से अफगानिस्तान पहुंचे हैं। वहां पर इन्होंने ड्रोन संचालन की बारीकियां समझने से लेकर सैन्य बलों की मूवमेंट पर अटैक करना, यह ट्रेनिंग ली है। कश्मीर में धर्मांध जिहादी संगठनों द्वारा युवाओं को गुमराह कर उन्हें पाकिस्तान भेजने की मुहिम शुरू की गई है। 
 

रुपयों का लालच भी दिया जा रहा

जम्मू कश्मीर या दूसरे राज्यों के अधिकांश युवा, जो धर्म विशेष से जुड़े रहते हैं, उन्हें ही पाकिस्तान में भेजा जाता है। जब वे ट्रेनिंग लेकर भारत में वापस आते हैं तो उन्हें हमले की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इसके लिए उन्हें इलाके का कमांडर या कोई दूसरा ओहदा दिया जाता है। रुपयों का लालच भी रहता है। 

जम्मू में गत शनिवार को 'द रजिस्टेंस फ्रंट' (टीआरएफ) जेके संगठन से जुड़े आतंकी नदीम उल हक को गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि टीआरएफ 'लश्कर-ए-तैयबा' की एक शाखा है। इसे हिट स्क्वॉड का नाम भी दिया गया है। पुलिस की पूछताछ में नदीम ने बताया, पाकिस्तान में बैठे टीआरएफ कमांडर उमर खालिद और रिहान ने उसे जम्मू में बम धमाकों का प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उसे बता दिया गया था कि वह तय टारगेट पूरा कर देता है तो उसका प्रमोशन हो जाएगा। कुछ राशि भी उसके खाते में ट्रांसफर करने की बात कही गई थी।

उसने बताया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' सीजफायर के दौरान जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में हमले कराना चाहती है। सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक उन्माद भी उनकी प्लानिंग में शामिल है। लोकल हैंडलर के जरिए आईएसआई और 'लश्कर-ए-तैयबा' गुमराह युवकों को आतंकी बनने की ट्रेनिंग देते हैं। इनकी सोच है कि जब दूसरे किसी धर्म के लोगों पर हमला करेंगे तो कट्टरपंथी विचारधारा वाले जिहादी संगठनों को अपना फैलाव करने में दिक्कत नहीं आएगी। नदीम उल हक, घाटी में मौजूद आतंकी संगठनों के स्लीपर सैल के साथ लगातार संपर्क में रहा था। 
 

जांच एजेंसियों ने कई संगठनों का पता लगाया

जांच एजेंसियों का कहना है, पहले अलगाववादी नेताओं के संगठनों पर यह आरोप लगा था कि वे घाटी के युवाओं को गुमराह कर पाकिस्तान भेज देते हैं। दस्तावेजों में लिखा रहता था कि वे तालीम हासिल करने गए हैं। बाद में मालूम होता कि उन्हें वहां पर कट्टरता और आतंकवाद में निपुण बनाया जा रहा है। 

एनआईए, ईडी और लोकल पुलिस ने ऐसे कई संगठनों का पता लगाया था। दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के कर्मियों पर भी धनशोधन मामले की आंच पहुंची थी। उसके बाद इन मामलों में कुछ कमी देखी गई। अगस्त 2019 के बाद वह काम टीम बी को सौंप गया था। इसमें आतंकियों व अलगाववादियों के साथ संबंध रखने वाले दूसरे लोग शामिल थे। इन्हें लोकल भाषा में ठेकेदार भी कहा जाता है। इनकी छोटी-छोटी कंस्ट्रक्शन कंपनियां चलती हैं। सरकारी कार्यों जैसे रोड बनाना, स्कूल अस्पताल भवन तैयार करना, सड़क निर्माण व खेतों में सिंचाई का प्रबंध करना आदि कामों का ठेका इन्हीं लोगों के पास रहता है। 

खत्म होगा आतंकियों का नेटवर्क
अब जम्मू कश्मीर प्रशासन ने आतंकियों के इस नेटवर्क को खत्म करने का बीड़ा उठाया है। यह पता लगाया जा रहा है कि हाल ही के वर्षों में सरकारी कार्यों के टेंडर किसे मिले हैं। ठेकेदारों का पिछला रिकॉर्ड अगर ठीक नहीं हुआ तो उन्हें अलॉट हुए टेंडर रद्द कर दिए जाएंगे। 

सीजफायर का ढोंग रचा पाकिस्तान ने

सुरक्षा मामलों के विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता (रिटायर्ड) कहते हैं, पाकिस्तान अपनी आदत से बाज नहीं आएगा। दुनिया को दिखाने के लिए उसने सीजफायर का ढोंग रचा है। इसकी आड़ में वह आतंकियों को लगातार ट्रेनिंग दे रहा है। 

घाटी में जब उसे नए लड़के नहीं मिल रहे हैं तो तालीम के नाम पर उन्हें अपने यहां बुलवा लेता है। ड्रोन हमले और देश के दूसरे हिस्सों में हिंसा फैलाने की साजिश के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। वह एक तरफ सीजफायर के जरिए दुनिया की नजरों में अपनी छवि सुधारना चाहता है तो दूसरी तरफ चीन से सैन्य उपकरण लेकर भारत में आतंकी हमले कराने की साजिश रचता है। 

भारत में आतंकवाद फैलाने को पाकिस्तान ने अपनी नीति में शामिल कर लिया है। जम्मू कश्मीर और दूसरे हिस्सों में सैन्य बलों ने काफी हद तक आतंकियों पर नकेल कसी है। आतंकियों के सामने नई भर्ती का संकट खड़ा हो गया है। यही वजह है कि अब आईएसआई सीमा पर आतंकियों को न भेजकर, बल्कि घाटी में पहले से मौजूद अपने हैंडलर के जरिए ड्रोन हमलों की साजिश रच रही है। 

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