बाहरी उम्मीदवार पर भाजपा में अंदरखाने कोहराम, सूबे के कई वरिष्ठ नेता नाराज
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भाजपा में बाहरी उम्मीदवारों की भरमार ने पार्टी में अंदरखाने कोहराम मचा दिया है। पहली सूची में दो दर्जन बाहरी नेताओं को मिली जगह और अंतिम सूची तक इसका आंकड़ा सौ के पार हो जाने की संभावनाओं ने कार्यकर्ताओं को ही नहीं सूबे के वरिष्ठï नेताओं को भी नाराज कर दिया है। सूबे के वरिष्ठï नेताओं की नाराजगी के कारण मंगलवार को होने वाली पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक टालनी पड़ी है।
बीच का रास्ता निकालने के लिए मंगलवार और बुधवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य के प्रभारी ओम माथुर, अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या, वरिष्ठï नेता राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र के साथ घंटों मैराथन बैठक की। बड़ी संख्या में बाहरी नेताओं को मंगलवार को राजनाथ के निवास पर भी माथुर, मौर्य और मिश्र की देर रात तक बैठक चली। माना जा रहा है कि बीच का रास्ता निकालने के बाद दूसरी सूची जारी करने के लिए भाजपा बृहस्पतिवार को केंद्र्रीय चुनाव समिति की बैठक बुला सकती है।
दरअसल कई स्तर पर छंटनी के बाद तैयार किए गए उम्मीदवारों के पैनल में सौ से अधिक दल बदलू नेताओं के नाम हैं। पार्टी नेतृत्व उत्तर प्रदेश की करीब डेढ़ दर्जन सीटों पर दूसरे दलों केबड़े नेताओं को शामिल करने के लिए घोषणा रोकना चाहता है। वरिष्ठ नेता इससे खासे नाराज हैं। राज्य के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि गोवा, पंजाब और उत्तर प्रदेश को मिला कर अब तक 56 बाहरी नेताओं को उपकृत किया गया है।
इसके अलावा सौ से अधिक बाहरी नेता पद की दौर में शामिल हैं। खुद की पार्टी के नेताओं को प्रधानमंत्री के निर्देश के आधार पर रिश्तेदारों के लिए टिकट मांगने से बचने के लिए कहा गया है, जबकि बाहरी नेताओं के साथ उनके रिश्तेदारों को भी उपकृत किया जा रहा है।
पंकज की उम्मीदवारी पर पेंच का यह कारण तो नहीं
इन नेताओं का कहना है कि उनके प्रभाव क्षेत्र के कार्यकर्ता उन पर दबाव डाल रहे हैं, इसलिए वह भी नेतृत्व के समक्ष अपना विरोध जता रहे हैं। गौरतलब है कि टिकट बंटवारे में असंतोष के कारण बुधवार को भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार्टी मुख्यालय और शाह के निवास पर प्रदर्शन किया।
पंकज की उम्मीदवारी पर पेंच का यह कारण तो नहीं
साहिबाबाद सीट पर बसपा से निष्कासित विधायक अमरपाल शर्मा के कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद स्थिति साफ नहीं हो रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक एक खेमे को डर लग रहा है कि अगर अब राजनाथ के पुत्र पंकज सिंह का नाम इस सीट से घोषित हो तो वह कहीं इंकार न कर दें।
पंकज प्रधानमंत्री की ओर से रिश्तेदारों के लिए टिकट न मांगने की नसीहत का बहाना बना सकते हैं। गौरतलब है कि पंकज बीते विधानसभा चुनाव में भी विवाद के बीच चिरई सीट से अपना नाम घोषित होने के बाद चुनाव लडने से इंकार कर चुके हैं। अब अगर ऐसा हुआ तो जिन नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट मिल चुका है, उस पर सवालिया निशान लगेंगे।
इस क्रम में पहली सूची में करीब दो दर्जन बाहरी नेताओं को उम्मीदवार बनाने से सूबे के वरिष्ठ नेता के साथ-साथ कार्यकर्ता भी नाराज हो गए। मंगलवार को विभिन्न नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा। इसी खींचतान के कारण बुधवार को भी नोएडा और साहिबाद सीट से उम्मीदवार की घोषणा नहीं हो पाई। जहां से राजनाथ के पुत्र पंकज सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी।