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चंद्रयान-3: विक्रम-प्रज्ञान से संपर्क बनाने की तैयारी, चांद के दक्षिण ध्रुव पर सूर्योदय के बाद बढ़ीं उम्मीदें

Wed, 20 Sep 2023 07:23 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 20 Sep 2023 07:23 PM IST
सार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के साथ फिर से संपर्क स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। लैंडर और रोवर को पिछले पंद्रह दिनों से स्लीप मोड में रखा गया है।

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Chandrayaan-3: isro communication with Vikram lander and Pragyan rover sunrise on the South Pole of the Moon
Moon - फोटो : iStock

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के साथ फिर से संपर्क स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। लैंडर और रोवर को पिछले पंद्रह दिनों से स्लीप मोड में रखा गया है। हालांकि, शिव शक्ति पॉइंट पर सूरज की रोशनी आने के साथ ही उनके परिचालन स्थितियों में सुधार होने की उम्मीद है। 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसरो ने बताया कि चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में चंद्रयान-3 लैंडिंग साइट पर सूर्योदय हो गया है और वे बैटरी के रिचार्ज होने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि उन्हें विक्रम लैंडर और प्रज्ञान के साथ फिर से संचार स्थापित होने की उम्मीद है। 
 

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उन्होंने कहा कि सूर्योदय मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है क्योंकि यह लैंडर और रोवर को अपना काम जारी रखने लिए आवश्यक गर्मी प्रदान करेगा। इसरो ने कहा है कि वे 22 सितंबर को संचार प्रयासों को शुरू करने से पहले तापमान के एक निश्चित स्तर से ऊपर बढ़ने का इंतजार करेंगे।

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14 जुलाई, 2023 को लॉन्च किया गया चंद्रयान -3 मिशन पहले ही महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल कर चुका है। इसने भारत को चंद्रमा पर सफलतापूर्वक उतरने वाले चौथे देश और चंद्र के दक्षिणी ध्रुव के पास ऐसा करने वाला पहला देश बनाया। मिशन का प्राथमिक उद्देश्य इस वैज्ञानिक रूप से पेचीदा क्षेत्र का पता लगाना है। माना जाता है कि इसमें पर्याप्त मात्रा में जमा हुआ पानी है। 
 

विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर 23 अगस्त को अपनी लैंडिंग के बाद से विभिन्न प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने चंद्रमा के आयनमंडल में इलेक्ट्रॉन घनत्व को मापा है और चंद्र सतह का तापमान रीडिंग लिया है। प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर की पहली छवि भी कैप्चर की। हालांकि, चंद्र रात ने परिचालन को रोक दिया क्योंकि सौर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों की बैटरी सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति में अपने सिस्टम को चालू रखने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली नहीं थीं। 
 

चंद्रमा की सुबह के साथ इसरो को उम्मीद है कि यदि इलेक्ट्रॉनिक्स सर्द रात में जीवित रहने में सक्षम होते हैं तो मिशन अपने अभूतपूर्व अन्वेषण को फिर से शुरू कर सकता है।

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