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इसरो चेयरमैन बोले: छह दिन बाद चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करेगा चंद्रयान-2

Wed, 14 Aug 2019 11:29 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: योगेश साहू Updated Wed, 14 Aug 2019 11:29 AM IST
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chandrayaan 2 leaves earths orbit moving towards to moon after 23 days of its launching
चंद्रयान-2 - फोटो : पीटीआई

चंद्रमा पर पहुंचने का भारत का सपना आहिस्ता-आहिस्ता साकार होते दिख रहा है। देश के दूसरे चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-2’ ने बुधवार को पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी और यह चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है। 

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने इसे चंद्रपथ पर डालने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान प्रक्रिया को अंजाम दिया। अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया है कि उसने भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के दो बजकर 21 मिनट पर अभियान प्रक्रिया ‘ट्रांस लूनर इंसर्शन’ (टीएलआई) को अंजाम दिया। इसके बाद चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक ‘लूनर ट्रांसफर ट्राजेक्टरी’ में प्रवेश कर गया।
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चंद्रयान-2 के 20 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचने और सात सितंबर को इसके चंद्र सतह पर उतरने की उम्मीद है। चंद्रयान 2 ने इस दौरान स्पेसक्राफ्ट का लिक्विड इंजन 1,203 सेकंड के लिए फायर किया, जिससे 22 दिन तक धरती की कक्षा में चक्कर काटने के बाद अपनी लॉन्चिंग के 23वें दिन यह चांद की ओर निकल पड़ा। 
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इसरो के चेयरमैन ने के सिवन ने बताया कि चंद्रयान 2 चांद के रास्ते पर 6 दिन चलेगा और 4.1 लाख किलोमीटर की दूरी तय करके इसी माह की तारीख 20 अगस्त को चांद की कक्षा में पहुंच जाएगा। चांद से धरती की दूरी 3.84 लाख किलोमीटर है। चंद्रयान 2 को चांद के रास्ते पर भेजने के लिए इसरो ने पहले धरती के इर्द-गिर्द उसकी कक्षा को बढ़ाया था जिसका आखिरी चरण 6 अगस्त को पूरा कर लिया गया था। 

 
 

अब आगे यह करेगा चंद्रयान 2
चांद के नजदीक पहुंचने पर चंद्रयान 2 की प्रणाली प्रॉपल्शन सिस्टम एक बार फिर फायर होगा, इससे उसकी गति कुछ धीमी पड़ जाएगी। इसके माध्यम से यह चांद की प्रारंभिक कक्षा में ही रुक जाएगा। इसके बाद चांद की सतह से करीब 100 किमी की ऊंचाई पर चंद्रयान 2 चक्कर काटेगा। इसी प्रॉपल्शन सिस्टम के जरिए धीरे—धीरे यान की कक्षा को कम किया जाएगा। इसके बाद लैंडर विक्रम ऑर्बिटर से अलग होगा और चांद की कक्षा में दाखिल हो जाएगा। लैंडर के 6 सितंबर को 30 किमी की दूरी पर पहुंचने के साथ ही चांद की सतह पर उतरने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। 



इसरो अब तक ‘चंद्रयान-2’ को पृथ्वी की कक्षा में ऊपर उठाने के पांच प्रक्रिया चरणों को अंजाम दे चुका है। पांचवें प्रक्रिया चरण को छह अगस्त को अंजाम दिया गया था। इसरो ने कहा कि 22 जुलाई को इसके प्रक्षेपण से लेकर अब तक चंद्रयान-2 की सभी प्रणालियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं।

उसने बताया कि ‘चंद्रयान-2’ 20 अगस्त को चंद्रमा पर पहुंचेगा और इसे चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कराने के लिए फिर से लिक्विड इंजन का उपयोग किया जाएगा। 

इसरो के सबसे शक्तिशाली तीन चरण वाले रॉकेट जीएसएलवी-एमके तृतीय-एम1 ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से 22 जुलाई को चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया था। इसरो के अनुसार 13 दिन बाद लैंडर ‘विक्रम’ अलग हो जाएगा और कुछ दिनों बाद सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चांद के इस हिस्से पर अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है।

इस अभियान की सफलता के बाद रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा।

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