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चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष में भेजने के लिए इसरो तैयार, आज लॉन्च पैड पर स्थापित होगा 'रॉकेट'
Sun, 07 Jul 2019 01:48 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sun, 07 Jul 2019 01:48 PM IST
सार
- 15 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसरो करेगा चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण
- 1 सितंबर को स्वदेशी ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर के साथ चांद की सतह पर उतरेगा
- लैंडर चांद की सतह पर भ्रमण करेगा और रोवर मिट्टी आदि के नमूने एकत्र करेगा
- चंद्रयान-1 अभियान में हुई थी चांद की सतह पर पानी की मौजूदगी की खोज
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जीएसएलवी मार्क 3 (फाइल फोटो)
- फोटो : इसरो
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विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 के लॉन्चिंग में अब मात्र एक हफ्ते का समय बचा है। चंद्रयान-2 को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) एमके- III रॉकेट से अंतरिक्ष में भेजा जाना है। इसके लिए रविवार को श्री हरिकोटा के लॉन्च पैड पर जीएसएलवी मार्क तीन को स्थापित किया जाएगा।
इसरो के अध्यक्ष डॉक्टर के सिवन ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST) के सातवें दीक्षांत समारोह में कहा कि चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है। जिसे रविवार को लॉन्च पैड पर ले जाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को लॉन्चिग के लिए तैयार किया गया है। मिशन की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशनल तैयारियों की जांच 13 जुलाई को की जाएगी। अभी तक सबकुछ हमारी बनाई योजना के अनुसार ही चल रहा है।
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के सिवन ने कहा, 'चंद्रयान-2 के जरिए इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जा रहा है जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है। अगर हम उस जोखिम को लेते हैं तो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को लाभ होगा। जोखिम और लाभ जुड़े हुए हैं।'
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इसरो के अध्यक्ष डॉक्टर के सिवन ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST) के सातवें दीक्षांत समारोह में कहा कि चंद्रयान-2 को प्रक्षेपण यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है। जिसे रविवार को लॉन्च पैड पर ले जाया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को लॉन्चिग के लिए तैयार किया गया है। मिशन की सफलता को सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशनल तैयारियों की जांच 13 जुलाई को की जाएगी। अभी तक सबकुछ हमारी बनाई योजना के अनुसार ही चल रहा है।
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के सिवन ने कहा, 'चंद्रयान-2 के जरिए इसरो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जा रहा है जहां आज तक कोई नहीं पहुंच पाया है। अगर हम उस जोखिम को लेते हैं तो वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को लाभ होगा। जोखिम और लाभ जुड़े हुए हैं।'
चंद्रयान-2 को रास्ता दिखाएंगे आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक
चंद्रयान-2
- फोटो : ANI
चंद्रयान-2 के विशेष रोवर ‘प्रज्ञान’ के लिए कई तकनीक आईआईटी कानपुर में तैयार की गई हैं। इसमें सबसे अहम है मोशन प्लानिंग। मतलब चांद की सतह पर रोवर कैसे, कब और कहां जाएगा?
इसका पूरा खाका आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर केए वेंकटेश व मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर आशीष दत्ता ने मिलकर तैयार किया है।
प्रो. दत्ता के मुताबिक अंतरिक्ष यान का द्रव्यमान 3.8 टन है। इसमें तीन अहम मॉड्यूल हैं ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान)। आईआईटी ने इसके मोशन प्लानिंग सिस्टम पर काम किया है। चन्द्रयान-2 के चांद पर उतरते ही मोशन प्लानिंग का काम शुरू हो जाएगा। इसके अलावा यान के संचालन में ज्यादा खर्च न हो इसके लिए भी वैज्ञानिकों ने काम किया है।
इसका पूरा खाका आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर केए वेंकटेश व मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर आशीष दत्ता ने मिलकर तैयार किया है।
प्रो. दत्ता के मुताबिक अंतरिक्ष यान का द्रव्यमान 3.8 टन है। इसमें तीन अहम मॉड्यूल हैं ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान)। आईआईटी ने इसके मोशन प्लानिंग सिस्टम पर काम किया है। चन्द्रयान-2 के चांद पर उतरते ही मोशन प्लानिंग का काम शुरू हो जाएगा। इसके अलावा यान के संचालन में ज्यादा खर्च न हो इसके लिए भी वैज्ञानिकों ने काम किया है।
10 साल में दूसरा भारतीय चंद्र मिशन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : इसरो
भारत के लिए यह गौरव का बात है कि 10 साल में दूसरी बार चांद पर मिशन भेज रहा है। चंद्रयान-1 2009 में भेजा गया था। हालांकि, उसमें रोवर शामिल नहीं था। चंद्रयान-1 में केवल एक ऑर्बिटर और इंपैक्टर था जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा था। इसको चांद की सतह से 100 किमी दूर कक्षा में स्थापित किया गया था। चंद्रयान-1 भारत के 5, यूरोप के 3, अमेरिका के 2 और बुल्गारिया का एक पेलोड लेकर गया था।
उनकी पहचान एक रॉकेट वूमेन के रूप में है। लखनऊ वालों की खुशियों और शुभकामनाओं के लिए रितु ने शुक्रिया अदा किया। रितु ने कहा, मिशन के बारे में 15 के बाद बात करेंगे, फिलहाल हमारा फोकस सफल लॉन्चिंग पर है।
लखनऊ की बेटी रितु हैं चंद्रयान-2 की रॉकेट वूमेन
चंद्रयान-2 की सफलता के बाज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए पूरा देश तैयार है लेकिन लखनऊ के पास इतराने की एक और भी वजह है...। यहां के आंगन में पली-बढ़ी और पढ़ी बेटी इसरो की सीनियर साइंटिस्ट रितु करिधाल श्रीवास्तव चंद्रयान-2 की मिशन डायरेक्टर हैं।उनकी पहचान एक रॉकेट वूमेन के रूप में है। लखनऊ वालों की खुशियों और शुभकामनाओं के लिए रितु ने शुक्रिया अदा किया। रितु ने कहा, मिशन के बारे में 15 के बाद बात करेंगे, फिलहाल हमारा फोकस सफल लॉन्चिंग पर है।