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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड: तीन आरोपियों को 13 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा, टोल पर UPI पेमेंट बना अहम सुराग
Mon, 11 May 2026 03:59 PM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 11 May 2026 03:59 PM IST
सार
पुलिस के अनुसार, इस हत्या के पीछे एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें कम से कम आठ लोग शामिल हो सकते हैं। जांच में सामने आया है कि हत्या को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसमें दिनों की रेकी और पीड़ित का पीछा करना शामिल था।
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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की एक अदालत ने सोमवार को चंद्रनाथ राय हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को 13 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। चंद्रनाथ रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक थे। पुलिस ने इस हत्याकांड के सिलसिले में तीन आरोपियों मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह को गिरफ्तार किया था। इन सभी को सोमवार को अदालत में पेश किया गया था।
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में पुलिस के हाथ एक महत्वपूर्ण सुराग लगा था। निवेदिता सेतु पर एक टोल प्लाजा पर किए गए यूपीआई भुगतान ने पुलिस को हत्या के तीन संदिग्धों तक पहुंचने में मदद की है। इन आरोपियों को उत्तर प्रदेश और बिहार से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का मानना है कि इस साजिश और हत्या में कम से कम आठ लोग शामिल थे।
ये भी पढ़ें: Bihar News: बंगाल CM के पीए हत्याकांड की जांच में बक्सर तक पहुंची STF, हिस्ट्रीशीटर विशाल श्रीवास्तव हिरासत में
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दो संदिग्ध बिहार, एक यूपी से गिरफ्तार
इस हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य के रूप में हुई है, जिन्हें बिहार के बक्सर से पकड़ा गया है। वहीं, तीसरा संदिग्ध राज सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया से हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार किए गए तीनों लोगों से पहले मध्यग्राम पुलिस स्टेशन में पूछताछ की गई, इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
कैसे हुई थी चंद्रनाथ रथ की हत्या?
भारतीय वायु सेना के पूर्व कर्मी और शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की छह मई की देर रात मध्यग्राम के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस हत्या ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी, क्योंकि रथ शुभेंदु अधिकारी के करीबी माने जाते थे।
यूपीआई भुगतान की जांच में निर्णायक भूमिका
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सुराग निवेदिता सेतु पर एक टोल प्लाजा पर किए गए यूपीआई भुगतान से मिला। पुलिस ने बताया कि हत्या से कुछ समय पहले, संदिग्धों द्वारा इस्तेमाल की गई भागने वाली कार के एक यात्री ने नकद या फास्टैग के बजाय डिजिटल रूप से टोल का भुगतान किया। इस डिजिटल भुगतान ने जांचकर्ताओं को एक मोबाइल नंबर का पता लगाने में मदद की, जो सीधे आरोपियों से जुड़ा था। इसी सुराग के आधार पर पुलिस टीमों को उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुंचने में सफलता मिली।
ये भी पढ़ें: शुभेंदु अधिकारी के पीए की हत्या: यूपी तक पहुंची हाईप्रोफाइल मर्डर की गूंज, कोलकाता पुलिस ने तीन को दबोचा
पुलिस ने यह भी बताया कि हत्या में इस्तेमाल की गई सिल्वर रंग की हैचबैक को कथित तौर पर झारखंड से खरीदा गया था। इसके अलावा, हमले में इस्तेमाल की गई दो मोटरसाइकिलें भी बरामद की गई हैं, जिनके नंबर प्लेट नकली होने का संदेह है।
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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में पुलिस के हाथ एक महत्वपूर्ण सुराग लगा था। निवेदिता सेतु पर एक टोल प्लाजा पर किए गए यूपीआई भुगतान ने पुलिस को हत्या के तीन संदिग्धों तक पहुंचने में मदद की है। इन आरोपियों को उत्तर प्रदेश और बिहार से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का मानना है कि इस साजिश और हत्या में कम से कम आठ लोग शामिल थे।
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दो संदिग्ध बिहार, एक यूपी से गिरफ्तार
इस हत्याकांड में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य के रूप में हुई है, जिन्हें बिहार के बक्सर से पकड़ा गया है। वहीं, तीसरा संदिग्ध राज सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया से हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार किए गए तीनों लोगों से पहले मध्यग्राम पुलिस स्टेशन में पूछताछ की गई, इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
कैसे हुई थी चंद्रनाथ रथ की हत्या?
भारतीय वायु सेना के पूर्व कर्मी और शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की छह मई की देर रात मध्यग्राम के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस हत्या ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी, क्योंकि रथ शुभेंदु अधिकारी के करीबी माने जाते थे।
यूपीआई भुगतान की जांच में निर्णायक भूमिका
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सुराग निवेदिता सेतु पर एक टोल प्लाजा पर किए गए यूपीआई भुगतान से मिला। पुलिस ने बताया कि हत्या से कुछ समय पहले, संदिग्धों द्वारा इस्तेमाल की गई भागने वाली कार के एक यात्री ने नकद या फास्टैग के बजाय डिजिटल रूप से टोल का भुगतान किया। इस डिजिटल भुगतान ने जांचकर्ताओं को एक मोबाइल नंबर का पता लगाने में मदद की, जो सीधे आरोपियों से जुड़ा था। इसी सुराग के आधार पर पुलिस टीमों को उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुंचने में सफलता मिली।
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पुलिस ने यह भी बताया कि हत्या में इस्तेमाल की गई सिल्वर रंग की हैचबैक को कथित तौर पर झारखंड से खरीदा गया था। इसके अलावा, हमले में इस्तेमाल की गई दो मोटरसाइकिलें भी बरामद की गई हैं, जिनके नंबर प्लेट नकली होने का संदेह है।
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