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TDP vs YSRCP: प्रेस कॉन्फ्रेंस में फूट-फूट कर रोए चंद्रबाबू नायडू, बोले- सीएम बनने के बाद ही विधानसभा में लौटूंगा
Fri, 19 Nov 2021 04:28 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 19 Nov 2021 04:28 PM IST
सार
शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन महिला सशक्तिकरण पर बहस के दौरान विधानसभा में जमकर घमासान मचा। इस दौरान 71 वर्षीय नायडू अपने और उनकी पत्नी पर वाईएसआरसीपी के विधायकों ने कथित अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
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नायडू
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को एलान किया कि वह वर्तमान कार्यकाल में विधानसभा में प्रवेश नहीं करेंगे। नायडू ने कहा कि सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्यों द्वारा उन्हें और पत्नी को अपमानित किए जाने के विरोध में उन्होंने ये फैसला लिया है।
नायडू बोले, सीएम बनने के बाद ही विधानसभा लौटूंगा
नायडू ने कहा, इस घटना के बाद मैं इस सभा में शामिल नहीं होउंगा। मैं दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद ही सदन में लौटूंगा। शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन महिला सशक्तिकरण पर बहस के दौरान विधानसभा में 71 वर्षीय नायडू अपने और अपनी पत्नी के खिलाफ वाईएसआरसीपी सदस्यों द्वारा की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों पर काफी व्यथित और भावुक दिखे।
फूट-फूट कर रो पड़े नायडू
बाद में मंगलागिरी में टीडीपी के राज्य मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में नायडू फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा, मेरी पत्नी कभी राजनीति में नहीं रहीं। चाहे मैं सत्ता में रहूं या बाहर, मेरे जीवन के हर कदम पर मुझे प्रोत्साहित करने के अलावा उन्होंने कभी भी राजनीति में हस्तक्षेप नहीं किया। फिर भी उन्होंने (वाईएसआरसीपी) मेरी पत्नी को अपमानित करने की कोशिश की।
नायडू ने कहा कि उन्होंने अपने 40 साल के राजनीतिक जीवन में कभी इतना कष्ट महसूस नहीं किया। मैंने अपने जीवन में कई संघर्षों, उतार-चढ़ावों का सामना किया। मैंने विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में कई गरमागरम बहसें देखीं। लेकिन विपक्ष को इस तरह से कुचलना अभूतपूर्व है।
कहा- मूकदर्शक बने रहे अध्यक्ष
उन्होंने कहा, अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि जब सत्ता पक्ष के सदस्य मेरी पत्नी का नाम घसीटते हुए गालियां दे रहे थे तो अध्यक्ष मूकदर्शक बने रहे। मुझे बाकी कार्यकाल के लिए विधानसभा से दूर रहने के मेरे फैसले पर बोलने का मौका भी नहीं दिया। मैं पिछले ढाई साल से अपमान का सामना कर रहा हूं। जब मेरी गरिमा से समझौता किया जाता है, तो सभा में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है। मैं अपनी लड़ाई लोगों तक ले जाऊंगा और उनका समर्थन मांगूंगा। मैं मुख्यमंत्री के रूप में लोगों का जनादेश मिलने के बाद ही विधानसभा में लौटूंगा।
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नायडू बोले, सीएम बनने के बाद ही विधानसभा लौटूंगा
नायडू ने कहा, इस घटना के बाद मैं इस सभा में शामिल नहीं होउंगा। मैं दोबारा मुख्यमंत्री बनने के बाद ही सदन में लौटूंगा। शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन महिला सशक्तिकरण पर बहस के दौरान विधानसभा में 71 वर्षीय नायडू अपने और अपनी पत्नी के खिलाफ वाईएसआरसीपी सदस्यों द्वारा की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों पर काफी व्यथित और भावुक दिखे।
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#WATCH | Former Andhra Pradesh CM & TDP chief Chandrababu Naidu breaks down at PC in Amaravati
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He likened the Assembly to 'Kaurava Sabha' & decided to boycott it till 2024 in protest against 'ugly character assassinations' by YSRCP ministers & MLAs, says TDP in a statement pic.twitter.com/CKmuuG1lwy — ANI (@ANI) November 19, 2021
फूट-फूट कर रो पड़े नायडू
बाद में मंगलागिरी में टीडीपी के राज्य मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में नायडू फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा, मेरी पत्नी कभी राजनीति में नहीं रहीं। चाहे मैं सत्ता में रहूं या बाहर, मेरे जीवन के हर कदम पर मुझे प्रोत्साहित करने के अलावा उन्होंने कभी भी राजनीति में हस्तक्षेप नहीं किया। फिर भी उन्होंने (वाईएसआरसीपी) मेरी पत्नी को अपमानित करने की कोशिश की।
नायडू ने कहा कि उन्होंने अपने 40 साल के राजनीतिक जीवन में कभी इतना कष्ट महसूस नहीं किया। मैंने अपने जीवन में कई संघर्षों, उतार-चढ़ावों का सामना किया। मैंने विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में कई गरमागरम बहसें देखीं। लेकिन विपक्ष को इस तरह से कुचलना अभूतपूर्व है।
कहा- मूकदर्शक बने रहे अध्यक्ष
उन्होंने कहा, अधिक दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि जब सत्ता पक्ष के सदस्य मेरी पत्नी का नाम घसीटते हुए गालियां दे रहे थे तो अध्यक्ष मूकदर्शक बने रहे। मुझे बाकी कार्यकाल के लिए विधानसभा से दूर रहने के मेरे फैसले पर बोलने का मौका भी नहीं दिया। मैं पिछले ढाई साल से अपमान का सामना कर रहा हूं। जब मेरी गरिमा से समझौता किया जाता है, तो सभा में शामिल होने का कोई मतलब नहीं है। मैं अपनी लड़ाई लोगों तक ले जाऊंगा और उनका समर्थन मांगूंगा। मैं मुख्यमंत्री के रूप में लोगों का जनादेश मिलने के बाद ही विधानसभा में लौटूंगा।