{"_id":"61c9a976fef0f8093629a9bf","slug":"chandigarh-municipal-corporation-election-results-2021-analysis","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या कहते हैं चंडीगढ़ के नतीजे: सबसे ज्यादा सीटें जीतकर भी आप के लिए निगम की सत्ता पाना मुश्किल, कैसे फायदे में रह सकती है भाजपा?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
क्या कहते हैं चंडीगढ़ के नतीजे: सबसे ज्यादा सीटें जीतकर भी आप के लिए निगम की सत्ता पाना मुश्किल, कैसे फायदे में रह सकती है भाजपा?
Mon, 27 Dec 2021 06:47 PM IST
हिमांशु मिश्रा
जयदेव सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
जयदेव सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Mon, 27 Dec 2021 06:47 PM IST
सार
Chandigarh Municipal Corporation Election Results 2021 Analysis: चंडीगढ़ के नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत यहां के राजनीतिक समीकरण में बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। जानिए कैसे?
विज्ञापन
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के नतीजे आ गए हैं। कुल 35 वार्ड के निगम में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। 2016 में प्रचंड बहुमत से जीतने वाली भाजपा को इस बार सिर्फ 12 सीटें मिली हैं। वहीं, पहली बार मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी 14 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। हालांकि, वह बहुमत से पांच सीट दूर है। आठ सीट जीतकर कांग्रेस तीसरे नंबर पर है। एक सीट अकाली दल के खाते में आई है।
चंडीगढ़ नगर निगम में अब तक भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला रहता था। लोकसभा चुनाव में भी यही दोनों पार्टियां टक्कर में रहती हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी की जीत यहां के राजनीतिक समीकरण में बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। इन नतीजों का असर पंजाब विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
विज्ञापन
क्या आप को पंजाब विधानसभा चुनाव में इससे फायदा मिलेगा?
नतीजों से पहले विशेषज्ञों का मानना था कि आप दो से चार सीटें जीत सकती है। नतीजों में आप ने विशेषज्ञों के अनुमान को गलत साबित कर दिया। चंडीगढ़ में विधानसभा चुनाव नहीं होते, लेकिन पंजाब की राजधानी में हुए इस बड़े बदलाव का असर पंजाब में भी देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि आप ने जिस तरह भाजपा के महापौर समेत भाजपा-कांग्रेस के कई दिग्गजों को हराया है, उससे माहौल का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आप को भी बहुमत नहीं मिला, वह महापौर कैसे बना पाएगी?
पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद खालिद कहते हैं कि स्थिति बहुत दिलचस्प है। आप के लिए किसी से भी समर्थन लेने का सीधा असर पंजाब के चुनाव पर पड़ेगा। अभी की स्थिति में जोड़तोड़ के आसार सबसे ज्यादा हैं।
क्या आप कांग्रेस से समर्थन ले सकती है?
इस स्थिति में आप-कांग्रेस गठबंधन के पास 35 वॉर्ड में 22 सीटें हो जाएंगी, जो बहुमत के आंकड़े से ज्यादा होंगी, लेकिन इस गठबंधन के आसार तब बहुत कम हैं, जब दोनों पार्टियां पंजाब में सत्ता की दावेदारी कर रही हों। चंडीगढ़ में साथ आने पर दोनों को पंजाब में नुकसान होगा, जहां चंद दिनों में चुनाव का एलान होना है। ऐसे में दोनों ही इस तरह का जोखिम नहीं लेना चाहेंगी।
क्या आप और भाजपा साथ आ सकते हैं?
प्रोफेसर खालिद कहते हैं कि अगर दोनों पार्टियां साथ आती हैं तो बहुमत के आंकड़े को पाना बहुत आसान होगा। अंकगणित के तौर पर ये भले हो जाए, लेकिन विचारधारा के स्तर पर दोनों पार्टियों का साथ जाना लगभग नामुमकिन है। पंजाब में भाजपा अमरिंदर सिंह के साथ चुनाव लड़ रही है। आप पंजाब में अमरिंदर सिंह का विरोध करती रही है। ऐसे में उसके लिए चंडीगढ़ में भाजपा के साथ जाना पंजाब में बहुत नुकसान पहुंचाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड, गोवा जैसे राज्यों में भी आप अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। इन राज्यों में भाजपा सत्ता में है। आप अगर भाजपा के साथ जाती है तो यहां भी उसे नुकसान होगा।
तो फिर कौन चलाएगा चंडीगढ़ का नगर निगम?
प्रोफेसर खालिद कहते हैं सबसे ज्यादा संभावना जोड़तोड़ की है। अगर ऐसा होता है तो भाजपा का पलड़ा सबसे भारी होगा। भाजपा के पास 12 पार्षद हैं। निगम गठन में एक वोट चंडीगढ़ सांसद का भी होता है। भाजपा सांसद किरण खेर का वोट मिलाकर वोटों का कुल आंकड़ा 13 हो जाता है। ऐसे में भाजपा को बहुमत के लिए छह वोट की जरूरत होगी, जो वो जोड़तोड़ से हासिल कर सकती है।
भाजपा की हार की वजह क्या है?
भाजपा पिछले पांच साल से नगर निगम की सत्ता में थी। इस दौरान उसके कई फैसलों के कारण आम जनता में नाराजगी थी। एक बार नगर निगम ने पानी के बिल के रेट बढ़ा दिए। जनता के विरोध के बाद उसे वापस लेना पड़ा। ऐसे कई फैसले थे जो निगम ने लिए, बाद में विरोध होने पर उन्हें वापस लेना पड़ा। विकास कार्य नहीं होने का ठीकरा पार्षद अधिकारियों पर फोड़ते रहे। इन्हीं वजहों से इस बार भाजपा का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
पंजाब की सत्ता में काबिज कांग्रेस को फायदा हुआ या नुकसान?
पिछले चुनाव के लिहाज से देखें तो कांग्रेस इस बार ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही है, लेकिन आम आदमी पार्टी की वजह से उसके कई बड़े चेहरों को हार का सामना करना पड़ा है।
इस बार कितने वार्ड बढ़े?
2016 के नगर निगम चुनाव में भाजपा को एकतरफा जीत मिली थी। शहर के 26 में से 20 वार्ड पर भाजपा के उम्मीदवार जीते थे। पांच वार्ड कांग्रेस और एक वार्ड में अकाली दल का उम्मीदवार जीता था। इस बार शहर के वार्डों की संख्या 26 से बढ़ाकर 35 कर दी गई। नए परिसीमन में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने भाजपा को कड़ी टक्कर तो दी ही, निगम में सबसे बड़ा दल बनकर भी उभरी। हालांकि, उसे बहुमत नहीं मिल सका।
जीत पर क्या बोली आप?
आम आदम पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके दावा किया कि चंडीगढ़ नगर निगम में हमारी जीत पंजाब में आने वाले बदलाव का संकेत है।
विज्ञापन
चंडीगढ़ नगर निगम में अब तक भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला रहता था। लोकसभा चुनाव में भी यही दोनों पार्टियां टक्कर में रहती हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी की जीत यहां के राजनीतिक समीकरण में बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है। इन नतीजों का असर पंजाब विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
क्या आप को पंजाब विधानसभा चुनाव में इससे फायदा मिलेगा?
नतीजों से पहले विशेषज्ञों का मानना था कि आप दो से चार सीटें जीत सकती है। नतीजों में आप ने विशेषज्ञों के अनुमान को गलत साबित कर दिया। चंडीगढ़ में विधानसभा चुनाव नहीं होते, लेकिन पंजाब की राजधानी में हुए इस बड़े बदलाव का असर पंजाब में भी देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि आप ने जिस तरह भाजपा के महापौर समेत भाजपा-कांग्रेस के कई दिग्गजों को हराया है, उससे माहौल का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आप को भी बहुमत नहीं मिला, वह महापौर कैसे बना पाएगी?
पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मोहम्मद खालिद कहते हैं कि स्थिति बहुत दिलचस्प है। आप के लिए किसी से भी समर्थन लेने का सीधा असर पंजाब के चुनाव पर पड़ेगा। अभी की स्थिति में जोड़तोड़ के आसार सबसे ज्यादा हैं।
क्या आप कांग्रेस से समर्थन ले सकती है?
इस स्थिति में आप-कांग्रेस गठबंधन के पास 35 वॉर्ड में 22 सीटें हो जाएंगी, जो बहुमत के आंकड़े से ज्यादा होंगी, लेकिन इस गठबंधन के आसार तब बहुत कम हैं, जब दोनों पार्टियां पंजाब में सत्ता की दावेदारी कर रही हों। चंडीगढ़ में साथ आने पर दोनों को पंजाब में नुकसान होगा, जहां चंद दिनों में चुनाव का एलान होना है। ऐसे में दोनों ही इस तरह का जोखिम नहीं लेना चाहेंगी।
क्या आप और भाजपा साथ आ सकते हैं?
प्रोफेसर खालिद कहते हैं कि अगर दोनों पार्टियां साथ आती हैं तो बहुमत के आंकड़े को पाना बहुत आसान होगा। अंकगणित के तौर पर ये भले हो जाए, लेकिन विचारधारा के स्तर पर दोनों पार्टियों का साथ जाना लगभग नामुमकिन है। पंजाब में भाजपा अमरिंदर सिंह के साथ चुनाव लड़ रही है। आप पंजाब में अमरिंदर सिंह का विरोध करती रही है। ऐसे में उसके लिए चंडीगढ़ में भाजपा के साथ जाना पंजाब में बहुत नुकसान पहुंचाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड, गोवा जैसे राज्यों में भी आप अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। इन राज्यों में भाजपा सत्ता में है। आप अगर भाजपा के साथ जाती है तो यहां भी उसे नुकसान होगा।
तो फिर कौन चलाएगा चंडीगढ़ का नगर निगम?
प्रोफेसर खालिद कहते हैं सबसे ज्यादा संभावना जोड़तोड़ की है। अगर ऐसा होता है तो भाजपा का पलड़ा सबसे भारी होगा। भाजपा के पास 12 पार्षद हैं। निगम गठन में एक वोट चंडीगढ़ सांसद का भी होता है। भाजपा सांसद किरण खेर का वोट मिलाकर वोटों का कुल आंकड़ा 13 हो जाता है। ऐसे में भाजपा को बहुमत के लिए छह वोट की जरूरत होगी, जो वो जोड़तोड़ से हासिल कर सकती है।
भाजपा की हार की वजह क्या है?
भाजपा पिछले पांच साल से नगर निगम की सत्ता में थी। इस दौरान उसके कई फैसलों के कारण आम जनता में नाराजगी थी। एक बार नगर निगम ने पानी के बिल के रेट बढ़ा दिए। जनता के विरोध के बाद उसे वापस लेना पड़ा। ऐसे कई फैसले थे जो निगम ने लिए, बाद में विरोध होने पर उन्हें वापस लेना पड़ा। विकास कार्य नहीं होने का ठीकरा पार्षद अधिकारियों पर फोड़ते रहे। इन्हीं वजहों से इस बार भाजपा का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।
पंजाब की सत्ता में काबिज कांग्रेस को फायदा हुआ या नुकसान?
पिछले चुनाव के लिहाज से देखें तो कांग्रेस इस बार ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही है, लेकिन आम आदमी पार्टी की वजह से उसके कई बड़े चेहरों को हार का सामना करना पड़ा है।
इस बार कितने वार्ड बढ़े?
2016 के नगर निगम चुनाव में भाजपा को एकतरफा जीत मिली थी। शहर के 26 में से 20 वार्ड पर भाजपा के उम्मीदवार जीते थे। पांच वार्ड कांग्रेस और एक वार्ड में अकाली दल का उम्मीदवार जीता था। इस बार शहर के वार्डों की संख्या 26 से बढ़ाकर 35 कर दी गई। नए परिसीमन में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी ने भाजपा को कड़ी टक्कर तो दी ही, निगम में सबसे बड़ा दल बनकर भी उभरी। हालांकि, उसे बहुमत नहीं मिल सका।
जीत पर क्या बोली आप?
आम आदम पार्टी के प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके दावा किया कि चंडीगढ़ नगर निगम में हमारी जीत पंजाब में आने वाले बदलाव का संकेत है।