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Chandigarh Mayor Poll: संख्या बल कम होने के बाद भी भाजपा ने कैसे पलट दी बाजी, आगे क्या करेगा INDIA गठबंधन?
Tue, 30 Jan 2024 02:32 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Tue, 30 Jan 2024 02:32 PM IST
सार
Chandigarh Mayor Poll: भाजपा चंडीगढ़ मेयर का चुनाव जीत गई है। भाजपा के मनोज सोनकर को मेयर घोषित कर किया गया है। इस चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने साथ मिलकर उम्मीदवार उतारा था लेकिन सफलता नहीं मिली।
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चंडीगढ़ मेयर चुनाव
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
चंडीगढ़ में शहरी निकाय चुनाव में मेयर पद पर भाजपा का कब्जा बरकार है। पार्टी के उम्मीदवार मनोज सोनकर को मेयर घोषित कर दिया गया है। आप और कांग्रेस के साझा उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा है। मनोज सोनकर ने INDIA गठबंधन के उम्मीदवार कुलदीप टीटा को 4 वोटों से हरा दिया। पीठासीन अधिकारी ने आठ वोट अमान्य करार दिए। इस पर आप और कांग्रेस ने पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह पर कई वोटों के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगाए। कांग्रेस और आप पार्षदों का आरोप है कि अनिल मसीह वीडियो में कई वोटों पर पेन चलाते हुए नजर आए हैं। वीडियो में भी इसके सबूत हैं।
बता दें कि 18 जनवरी को नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान होने थे लेकिन इसे ऐन वक्त पर इन्हें स्थगित कर दिया गया था। उस वक्त कहा गया कि पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत अचानक खराब हो गई। इस वजह से चुनाव को स्थगित कर दिया गया।
इस चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने साथ मिलकर उम्मीदवार उतारे थे। मेयर पद के उम्मीदवार आप से थे तो सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार कांग्रेस से हैं।
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आइये जानते हैं कि भाजपा ने इस चुनाव में संख्या बल अपने खिलाफ होने के बाद भी बाजी कैसे पलटी? चंडीगढ़ में शहरी निकाय के चुनाव का कार्यक्रम क्या था? यह चुनाव कैसे हुआ? किस दल से कौन उम्मीदवार थे? कांग्रेस-आप ने गठबंधन क्यों किया? चुनाव क्यों स्थगित हुए थे?
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बता दें कि 18 जनवरी को नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान होने थे लेकिन इसे ऐन वक्त पर इन्हें स्थगित कर दिया गया था। उस वक्त कहा गया कि पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत अचानक खराब हो गई। इस वजह से चुनाव को स्थगित कर दिया गया।
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इस चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने साथ मिलकर उम्मीदवार उतारे थे। मेयर पद के उम्मीदवार आप से थे तो सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के उम्मीदवार कांग्रेस से हैं।
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आइये जानते हैं कि भाजपा ने इस चुनाव में संख्या बल अपने खिलाफ होने के बाद भी बाजी कैसे पलटी? चंडीगढ़ में शहरी निकाय के चुनाव का कार्यक्रम क्या था? यह चुनाव कैसे हुआ? किस दल से कौन उम्मीदवार थे? कांग्रेस-आप ने गठबंधन क्यों किया? चुनाव क्यों स्थगित हुए थे?
चंडीगढ़ में शहरी निकाय के चुनाव का कार्यक्रम क्या?
पहले चंडीगढ़ में नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए 13 जनवरी को सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक नामांकन दाखिल किया था। 18 जनवरी को चुनाव होने थे। सुबह 11 बजे से चंडीगढ़ नगर निगम के पार्षदों को मेयर पद के उम्मीदवारों के लिए वोट डालना था। इसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान होना था, लेकिन सुबह पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत खराब होने की खबर आई। इसके चलते अगली सूचना तक स्थगित कर दिया गया।
अब मंगलवार को पहले नगर निगम के मेयर पद के लिए चुनाव हुए जिसमें भाजपा को जीत मिली। भाजपा के मनोज सोनकर को मेयर घोषित कर दिया गया है। सोनकर को 16 वोट मिले। वहीं, INDIA गठबंधन के उम्मीदवार को केवल 12 वोट से संतोष करना पड़ा। आठ वोट अमान्य करार दिए गए।
पहले चंडीगढ़ में नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए 13 जनवरी को सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक नामांकन दाखिल किया था। 18 जनवरी को चुनाव होने थे। सुबह 11 बजे से चंडीगढ़ नगर निगम के पार्षदों को मेयर पद के उम्मीदवारों के लिए वोट डालना था। इसके बाद सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान होना था, लेकिन सुबह पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह की तबीयत खराब होने की खबर आई। इसके चलते अगली सूचना तक स्थगित कर दिया गया।
अब मंगलवार को पहले नगर निगम के मेयर पद के लिए चुनाव हुए जिसमें भाजपा को जीत मिली। भाजपा के मनोज सोनकर को मेयर घोषित कर दिया गया है। सोनकर को 16 वोट मिले। वहीं, INDIA गठबंधन के उम्मीदवार को केवल 12 वोट से संतोष करना पड़ा। आठ वोट अमान्य करार दिए गए।
किस दल के कितने पार्षद?
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं। वहीं, चंडीगढ़ से भाजपा सांसद किरण खेर भी इन चुनावों में वोट डालने के लिए पात्र थीं। इस तरह से कुल 36 मतदाताओं ने इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सदन में भाजपा के 14 पार्षद, आप के 13 तो कांग्रेस के सात पार्षद हैं। हरदीप सिंह अकाली दल के एक मात्र पार्षद हैं। वहीं, सांसद किरण खेर भाजपा से हैं।
इस तरह से संख्या बल के लिहाज से भाजपा के पक्ष में 15 और INDIA गठबंध के पक्ष में 20 वोट थे। वहीं, अकाली पार्षद ने दावा किया था कि अगर मेयर चुनाव में नोटा का विकल्प नहीं होगा तो वह बहिष्कार करेंगे। हालांकि, उन्होंने भी वोट डाला। अकाली पार्षद का वोट किसके पक्ष में पड़ा इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया। भाजपा को अपने 15 वोट के अलावा एक अतरिक्त वोट भी मिला है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह वोट अकाली पार्षद हरदीप सिंह का हो सकता है।
वहीं, INDIA गठबंधन के 20 पार्षदों में से सिर्फ 12 के वोट मान्य करार दिए गए। जबकि, आठ के वोट अमान्य हो गए। इस तरह से संख्या बल में बहुमत से कम होने के बाद भी भाजपा ने मेयर की कुर्सी पर कब्जा कर लिया।
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं। वहीं, चंडीगढ़ से भाजपा सांसद किरण खेर भी इन चुनावों में वोट डालने के लिए पात्र थीं। इस तरह से कुल 36 मतदाताओं ने इस चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सदन में भाजपा के 14 पार्षद, आप के 13 तो कांग्रेस के सात पार्षद हैं। हरदीप सिंह अकाली दल के एक मात्र पार्षद हैं। वहीं, सांसद किरण खेर भाजपा से हैं।
इस तरह से संख्या बल के लिहाज से भाजपा के पक्ष में 15 और INDIA गठबंध के पक्ष में 20 वोट थे। वहीं, अकाली पार्षद ने दावा किया था कि अगर मेयर चुनाव में नोटा का विकल्प नहीं होगा तो वह बहिष्कार करेंगे। हालांकि, उन्होंने भी वोट डाला। अकाली पार्षद का वोट किसके पक्ष में पड़ा इसका खुलासा उन्होंने नहीं किया। भाजपा को अपने 15 वोट के अलावा एक अतरिक्त वोट भी मिला है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह वोट अकाली पार्षद हरदीप सिंह का हो सकता है।
वहीं, INDIA गठबंधन के 20 पार्षदों में से सिर्फ 12 के वोट मान्य करार दिए गए। जबकि, आठ के वोट अमान्य हो गए। इस तरह से संख्या बल में बहुमत से कम होने के बाद भी भाजपा ने मेयर की कुर्सी पर कब्जा कर लिया।
यह चुनाव कैसे होते हैं?
चंडीगढ़ में हर साल मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव कराए जाते हैं। इन सभी का कार्यकाल एक साल का ही होता है। इस साल मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। मेयर पद के चुनाव में जनता वोट नहीं करती है। जनता पार्षद चुनती है जो इस चुनाव में वोट डालते हैं।
चुनाव के चेहरे कौन थे?
चंडीगढ़ नगर निगम में सत्ताधारी भाजपा की ओर से मनोज सोनकर मेयर पद के उम्मीदवार रहे। वहीं, सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए कुलजीत संधू तो डिप्टी मेयर पद के लिए राजिंदर शर्मा को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया।
इन चुनावों से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन के दलों कांग्रेस और आप ने गठबंधन किया था। इस समझौते के अनुसार, मेयर की सीट के लिए आप की तरफ से कुलदीप कुमार टीटा उम्मीदवार रहे। वहीं, कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह गैबी और निर्मला देवी क्रमशः वरिष्ठ डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए चुनाव मैदान में थे।
चंडीगढ़ में हर साल मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव कराए जाते हैं। इन सभी का कार्यकाल एक साल का ही होता है। इस साल मेयर पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। मेयर पद के चुनाव में जनता वोट नहीं करती है। जनता पार्षद चुनती है जो इस चुनाव में वोट डालते हैं।
चुनाव के चेहरे कौन थे?
चंडीगढ़ नगर निगम में सत्ताधारी भाजपा की ओर से मनोज सोनकर मेयर पद के उम्मीदवार रहे। वहीं, सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए कुलजीत संधू तो डिप्टी मेयर पद के लिए राजिंदर शर्मा को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया।
इन चुनावों से पहले विपक्षी इंडिया गठबंधन के दलों कांग्रेस और आप ने गठबंधन किया था। इस समझौते के अनुसार, मेयर की सीट के लिए आप की तरफ से कुलदीप कुमार टीटा उम्मीदवार रहे। वहीं, कांग्रेस के गुरप्रीत सिंह गैबी और निर्मला देवी क्रमशः वरिष्ठ डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए चुनाव मैदान में थे।
कैसे थे चंडीगढ़ नगर निगम के समीकरण?
माना जा रहा था कि आप और कांग्रेस में गठबंधन से मेयर चुनाव के सारे समीकरण बदलेंगे। दोनों में गठबंधन होने पर आप और कांग्रेस के 20 वोट थे, जबकि मेयर बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 19 का है। ऐसे में पिछले कई वर्षों से मेयर की कुर्सी पर बैठी भाजपा की बादशाहत खतरे में मानी जा रहा थी। इसके बाद भी भाजपा ने चुनाव में बाजी पलट दी।
2023 में कैसे रहे थे नतीजे?
2022 के अंत में हुए नगर निगम चुनावों में आप ने सबसे ज्यादा 14 सीटें, भाजपा ने भी 14 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं, एक पार्षद अकाली दल का जीता था। इस चुनाव से अकाली दल और कांग्रेस अनुपस्थित रहे थे। ऐसे में आप और भाजपा दोनों के उम्मीदवारों को 14-14 पार्षदों ने वोट किया था। भाजपा सांसद किरण खेर के वोट के चलते तीनों पदों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत हुई थी। कोई भी वोट डैमेज वोट नहीं करार दिया गया था।
मई 2023 में आम आदमी पार्टी की पार्षद तरुणा मेहता ने पाला बदलकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इसके बाद चंडीगढ़ नगर निगम में 14 पार्षद वाली भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी। वहीं, आप के पार्षदों की संख्या घटकर 13 हो गई थी। वहीं, छह पार्षदों वाली कांग्रेस के पार्षदों की संख्या बढ़कर सात हो गई थी।
माना जा रहा था कि आप और कांग्रेस में गठबंधन से मेयर चुनाव के सारे समीकरण बदलेंगे। दोनों में गठबंधन होने पर आप और कांग्रेस के 20 वोट थे, जबकि मेयर बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 19 का है। ऐसे में पिछले कई वर्षों से मेयर की कुर्सी पर बैठी भाजपा की बादशाहत खतरे में मानी जा रहा थी। इसके बाद भी भाजपा ने चुनाव में बाजी पलट दी।
2023 में कैसे रहे थे नतीजे?
2022 के अंत में हुए नगर निगम चुनावों में आप ने सबसे ज्यादा 14 सीटें, भाजपा ने भी 14 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं, एक पार्षद अकाली दल का जीता था। इस चुनाव से अकाली दल और कांग्रेस अनुपस्थित रहे थे। ऐसे में आप और भाजपा दोनों के उम्मीदवारों को 14-14 पार्षदों ने वोट किया था। भाजपा सांसद किरण खेर के वोट के चलते तीनों पदों पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत हुई थी। कोई भी वोट डैमेज वोट नहीं करार दिया गया था।
मई 2023 में आम आदमी पार्टी की पार्षद तरुणा मेहता ने पाला बदलकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इसके बाद चंडीगढ़ नगर निगम में 14 पार्षद वाली भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी। वहीं, आप के पार्षदों की संख्या घटकर 13 हो गई थी। वहीं, छह पार्षदों वाली कांग्रेस के पार्षदों की संख्या बढ़कर सात हो गई थी।
यह चुनाव क्यों अहम?
चुनाव से पहले आप और कांग्रेस के गठबंधन ने इस लड़ाई को दिलचस्प बना दिया। चंडीगढ़ मेयर चुनाव इंडिया समूह और भाजपा के बीच पहला चुनावी मुकाबला हुआ। आप और कांग्रेस के साथ आने से इस मुकाबले को आगामी लोकसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा गया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा था कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2024 लोकसभा चुनाव की नींव रखेगा।
चुनाव से पहले आप और कांग्रेस के गठबंधन ने इस लड़ाई को दिलचस्प बना दिया। चंडीगढ़ मेयर चुनाव इंडिया समूह और भाजपा के बीच पहला चुनावी मुकाबला हुआ। आप और कांग्रेस के साथ आने से इस मुकाबले को आगामी लोकसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा गया। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा था कि चंडीगढ़ मेयर चुनाव 2024 लोकसभा चुनाव की नींव रखेगा।
अब आगे क्या?
आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में पीठासीन अधिकारी पर वोटों से छेड़छाड़ का आरोप लगया है। इस बीच, आप पार्षद प्रेमलता ने कहा कि उनकी पार्टी हाईकोर्ट जाएगी। भाजपा ने धोखे से जीत हासिल की है। आठ वोट अवैध कैसे हो सकते हैं।
आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में पीठासीन अधिकारी पर वोटों से छेड़छाड़ का आरोप लगया है। इस बीच, आप पार्षद प्रेमलता ने कहा कि उनकी पार्टी हाईकोर्ट जाएगी। भाजपा ने धोखे से जीत हासिल की है। आठ वोट अवैध कैसे हो सकते हैं।
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