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Election Results 2023: चार राज्यों के चुनाव नतीजों से क्षेत्रीय दलों की बढ़ेंगी चिंताएं, बीआरएस की हार एक सबक
Mon, 04 Dec 2023 05:33 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Mon, 04 Dec 2023 05:33 AM IST
सार
आम चुनाव के लिहाज से भी तेलंगाना में कांग्रेस मजबूत विकल्प बन चुकी है। वहीं, भाजपा ने सीटों में पर्याप्त इजाफा किया है। यह संकेत है कि क्षेत्रीय दलों के प्रति लोगों के रुख में बदलाव आ रहा है। बाकी राज्यों पर भी इसका असर होगा।
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केसीआर और अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : social media
विस्तार
तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की हार क्षेत्रीय दलों के लिए कई चेतावनियां लेकर आई है। अपने राज्यों में क्षेत्रीय दलों के लिए घटता समर्थन चिंताएं बढ़ाने वाला साबित होगा। स्थानीय आकांक्षाओं और विकेंद्रीकृत राजनीति में क्षेत्रीय दलों की अहम भूमिका रही है। लेकिन अब उन्हें आम चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व में गठबंधन के साथ मैदान में उतरने से पहले फिर सोचना पड़ सकता है।
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तेलंगाना में बीआरएस की सत्ता स्थानीय मुद्दों के बलबूते पर साढ़े नौ साल से कायम थी। मुद्दों की स्थानीयता व सांस्कृतिक पहचान की जड़ें काफी गहरी मानी जा रही थीं। लेकिन, इस परिणाम ने संकेत दिया कि बीआरएस में लोगों का विश्वास घटा है। मुख्यमंत्री सहित कई विधायकों को मतदाताओं ने नकार दिया।
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आम चुनाव के लिहाज से भी तेलंगाना में कांग्रेस मजबूत विकल्प बन चुकी है। वहीं, भाजपा ने सीटों में पर्याप्त इजाफा किया है। यह संकेत है कि क्षेत्रीय दलों के प्रति लोगों के रुख में बदलाव आ रहा है। बाकी राज्यों पर भी इसका असर होगा।
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इन चुनाव में भाजपा के सामने कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद क्षेत्रीय दल गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस को घेर सकेंगे। आम चुनाव में ज्यादा सीटें पाने के लिए दबाव बना सकेंगे। ऐसा हुआ तो कांग्रेस को भी लचीला रुख दिखाना पड़ सकता है। उसने मध्यप्रदेश में विधानसभा की सीटों के बंटवारे के समय जिस प्रकार गठबंधन के बाकी दलों को नाराज किया, वैसा वह लोकसभा चुनाव में नहीं कर सकेगी।
कांग्रेस की छवि सिर्फ क्षेत्रीय दलों के सामने अच्छा प्रदर्शन करने वाली पार्टी की बन रही है। यह बात क्षेत्रीय दलों को गैर-कांग्रेसी तीसरे मोर्चे की ओर जाने के लिए भी प्रेरित कर सकती है। हाल में तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन व सपा मुखिया अखिलेश यादव की मुलाकात के बाद हालात इसके अनुकूल दिख रहे हैं।
challenges of regional parties