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Jal Shakti Ministry: पानी संसाधनों की योजनाओं के लिए वित्तीय वर्ष 25 में 98% से ज्यादा फंड खर्च, सरकार का दावा
Sun, 27 Apr 2025 04:21 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 27 Apr 2025 04:21 PM IST
सार
वित्तीय वर्ष 25 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए कुल फंड (राज्यों के हिस्से समेत) 19,984.59 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल 11,182.09 करोड़ रुपये था। केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए कुल उपलब्ध फंड 5,944.31 करोड़ रुपये रहा। राज्यों ने भी अपने SNA खातों में 5,992.46 करोड़ रुपये डाले, जो पिछले साल के 4,822.25 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
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सीआर पाटिल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री
- फोटो : X / @CRPaatil
विस्तार
जल शक्ति मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में पानी से जुड़ी योजनाओं के लिए आवंटित केंद्रीय फंड का लगभग पूरा उपयोग कर लिया है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, मार्च 2025 के अंत तक 98.39% फंड खर्च किए जा चुके थे। '2024-25 के लिए योजनाओं के फंड की उपलब्धता और उपयोग पर रिपोर्ट' के मुताबिक, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीसीएस) और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के तहत फंड का उपयोग किया।
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क्या हैं ये योजनाएं?
केंद्र प्रायोजित योजनाएं: इन योजनाओं को मुख्य रूप से केंद्र सरकार फंड देती है लेकिन लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। कई बार राज्यों को भी आंशिक योगदान देना पड़ता है।
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केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं: इन योजनाओं को पूरी तरह से केंद्र सरकार फंड और लागू करती है, राज्यों की कोई हिस्सेदारी नहीं होती।
फंड का 81.79 फीसदी किया गया खर्च
केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए बजट में 13,431.48 करोड़ रुपये का अनुमान था, जिसमें से 13,216.34 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए 6,573.73 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे, जिसमें से 5,376.73 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसका मतलब 81.79% फंड का उपयोग हुआ।
पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 24 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत केवल 49.45% फंड का उपयोग हुआ था, जबकि इस बार बड़ी तेजी से फंड का इस्तेमाल हुआ। कुल मिलाकर, सभी स्रोतों से केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 15,804.73 करोड़ रुपये और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए 5,376.73 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
यह भी पढ़ें - China: भारत के साथ लड़ाई में क्या चीन देगा पाकिस्तान का साथ? पूर्व आर्मी कमांडर ने जताई आशंका
बेहतर समन्वय से मिला फायदा
अधिकारियों का कहना है कि फंड रिलीज की प्रक्रिया को सरल बनाने और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल की वजह से यह सुधार संभव हुआ। राज्यों और नोडल एजेंसियों (एसएनए, सीएनए) को भेजे गए फंड में भी बढ़ोतरी हुई है — वित्तीय वर्ष 24 में 2,902.73 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 25 में 4,756.48 करोड़ रुपये। राज्य नोडल अकाउंट्स में बचत राशि भी घटी है, यानी फंड जमीन पर तेजी से इस्तेमाल हुए।
गंगा सफाई और नदी विकास को बढ़ावा
तेजी से खर्च हुआ फंड गंगा पुनर्जीवन और अन्य नदी विकास परियोजनाओं के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है। हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि बैंकों और राज्य कोषों से डेटा मिलने में थोड़ी देरी के कारण कुछ आंकड़ों में मामूली अंतर हो सकता है।
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क्या हैं ये योजनाएं?
केंद्र प्रायोजित योजनाएं: इन योजनाओं को मुख्य रूप से केंद्र सरकार फंड देती है लेकिन लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। कई बार राज्यों को भी आंशिक योगदान देना पड़ता है।
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केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं: इन योजनाओं को पूरी तरह से केंद्र सरकार फंड और लागू करती है, राज्यों की कोई हिस्सेदारी नहीं होती।
फंड का 81.79 फीसदी किया गया खर्च
केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए बजट में 13,431.48 करोड़ रुपये का अनुमान था, जिसमें से 13,216.34 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए 6,573.73 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे, जिसमें से 5,376.73 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसका मतलब 81.79% फंड का उपयोग हुआ।
पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 24 में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत केवल 49.45% फंड का उपयोग हुआ था, जबकि इस बार बड़ी तेजी से फंड का इस्तेमाल हुआ। कुल मिलाकर, सभी स्रोतों से केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए 15,804.73 करोड़ रुपये और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए 5,376.73 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
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बेहतर समन्वय से मिला फायदा
अधिकारियों का कहना है कि फंड रिलीज की प्रक्रिया को सरल बनाने और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल की वजह से यह सुधार संभव हुआ। राज्यों और नोडल एजेंसियों (एसएनए, सीएनए) को भेजे गए फंड में भी बढ़ोतरी हुई है — वित्तीय वर्ष 24 में 2,902.73 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्तीय वर्ष 25 में 4,756.48 करोड़ रुपये। राज्य नोडल अकाउंट्स में बचत राशि भी घटी है, यानी फंड जमीन पर तेजी से इस्तेमाल हुए।
गंगा सफाई और नदी विकास को बढ़ावा
तेजी से खर्च हुआ फंड गंगा पुनर्जीवन और अन्य नदी विकास परियोजनाओं के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है। हालांकि मंत्रालय ने यह भी कहा कि बैंकों और राज्य कोषों से डेटा मिलने में थोड़ी देरी के कारण कुछ आंकड़ों में मामूली अंतर हो सकता है।
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