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Unani Medicine: पांच शहरों में विकसित होगी यूनानी चिकित्सा, आयुष और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने किया करार

Fri, 26 May 2023 07:32 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Fri, 26 May 2023 07:32 AM IST
सार

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के तहत कुल 45.34 करोड़ रुपये के बजट से हैदराबाद, चेन्नई, लखनऊ, सिलचर और बेंगलुरु में यूनानी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने में किया जाएगा।

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Centre to set up Unani Medicine facilities in five cities including Hyderabad Lucknow
Ministry of AYUSH - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

यूनानी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय आयुष और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के बीच एक करार हुआ है, जिसके तहत पहली बार अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने 45 करोड़ रुपये का अनुदान मंजूर किया है। प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के तहत कुल 45.34 करोड़ रुपये के इस बजट का इस्तेमाल हैदराबाद, चेन्नई, लखनऊ, सिलचर और बेंगलुरु में यूनानी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने में किया जाएगा।

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हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय त्वचा रोग अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक यूनानी चिकित्सा को लेकर शोध करेंगे। इस पर करीब 16 करोड़ रुपये का खर्च किया जाएगा। वहीं, आठ करोड़ की लागत से चेन्नई के क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान में यूनानी चिकित्सा को लेकर प्रीक्लिनिकल प्रयोगशाला शुरू होगी। उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में मस्कुलोस्केलेटल जैसे विकारों का इलाज पता लगाने के लिए करीब 8.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बृहस्पतिवार को केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में यह करार किया गया।
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दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ चलेगा अभियान 
इधर, दुग्ध उत्पादों और दूध में मिलावट के खिलाफ जल्द ही पूरे देश में अभियान चलाया जाएगा। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने इस संबंध में सभी राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को टीमों का गठन कर बाजारों से नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला में जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
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एफएसएसएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक दूध में पानी की मिलावट होती थी, लेकिन अब तौर तरीके बदल गए हैं। दुध और उनसे बनने वाले उत्पादों में रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो पूरी तरह से स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। एफएसएसएआई के अनुसार, 2020 में राष्ट्रीय स्तर के सर्वे के तहत 542 जिलों में छापे के दौरान 2,801 नमूने लिए गए थे। इनकी प्रयोगशाला में जांच हुई तो इनमें कीटनाशक अवशेष, भारी धातु, फसल प्रदूषक, मेलामाइन और सूक्ष्मजीवविज्ञानी पैरामीटर शामिल थे।  

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