World Market: देश में बने उत्पादों को विदेशों में बेचने के लिए बहुराज्यीय निर्यात गृह बनाएगी केंद्र सरकार
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्यों से सहकारिता क्षेत्र के समग्र विकास के लिए साथ मिलकर काम करने को कहा ताकि यह देश को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में उल्लेखनीय योगदान दे सके। सरकार ने कहा कि अमित शाह के गतिशील मार्गदर्शन में सहकारिता मंत्रालय सभी राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के सहयोग से सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम कर रहा है।
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सहकारिता मंत्रालय ‘सहकार से समृद्धि' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए नई राष्ट्रीय सहकारी नीति तैयार कर रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जुलाई 2021 को एक नए सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए 'सहकार से समृद्धि' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए नए सिरे से प्रोत्साहन प्रदान करना था। इसी कड़ी में दुनिया के बाजारों में देश निर्मित उत्पादों का निर्यात करने के लिए एक बहुराज्यीय निर्यात गृह बनाने पर मंत्रालय ने जोर दिया है।
सहकारिता मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया
शनिवार को सरकार ने कहा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के गतिशील मार्गदर्शन में सहकारिता मंत्रालय सभी राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के सहयोग से सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए लगातार काम कर रहा है। इसी पृष्ठभूमि में सहकारिता मंत्रालय द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आठ और नौ सितंबर को राज्य सहकारिता मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया था।
उद्घाटन के दिन सम्मेलन की शुरुआत सहकारिता राज्यमंत्री बी एल वर्मा के स्वागत भाषण और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के उद्घाटन भाषण से हुई।सम्मेलन के पहले दिन, राज्य के सहकारिता मंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सहकारिता से जुड़े कई क्षेत्रों पर अपने विचार रखे।
सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए साथ मिलकर काम करें राज्य: शाह
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को राज्यों से सहकारिता क्षेत्र के समग्र विकास के लिए साथ मिलकर काम करने को कहा ताकि यह देश को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में उल्लेखनीय योगदान दे सके। दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए कि सहकारिता आंदोलन भारत के हर राज्य में समान गति से चले।
उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सहकारी क्षेत्र के चौतरफा विकास सुनिश्चित करने के साथ नए क्षेत्रों की पहचान करने के लिए नई नीति तैयार की जानी चाहिए। शाह ने कहा कि कि सहकारी आंदोलन पश्चिम और दक्षिण भारत में मजबूत है लेकिन उत्तर और मध्य भारत में विकासशील अवस्था में जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में अल्पविकसित अवस्था में है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों के सहकारिता विभागों को विकास के समान रास्ते पर चलना चाहिए और समान नीतियां अपनानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि इस सप्ताह की शुरुआत में सरकार ने एक नया राष्ट्रीय सहयोग नीति दस्तावेज का मसौदा तैयार करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में 47 सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की है। यह नीति दस्तावेज सहकारिता-आधारित आर्थिक विकास मॉडल को बढ़ावा देगा। शाह ने कहा, ‘‘सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए सभी राज्यों को टीम इंडिया की भावना के साथ मिलकर काम करना होगा। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि सौ साल में सहकारिता देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बने और देश की अर्थव्यवस्था को 5,000 अरब डॉलर तक ले जाने में प्रमुख भूमिका निभाए।’’
मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि दो दिवसीय सम्मेलन में 21 राज्यों के सहकारिता मंत्री और दो केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, ज्ञानेश कुमार, सचिव (सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार), विजय कुमार, अतिरिक्त सचिव और सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार, प्रमुख और अपर सचिव, प्रमुख और अतिरिक्त मुख्य सचिव, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारी समितियों के प्रधान सचिव और रजिस्ट्रार ने सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अपने विचार और सुझाव साझा किए। सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रस्तुतियां दीं और अपने सर्वोत्तम प्रयासों को आपस में साझा किए।
सहकारिता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया
सम्मेलन में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें राष्ट्रीय सहयोग नीति, राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस, सहकारिता मंत्रालय की नई प्रस्तावित योजनाएं यानी हर पंचायत में पैक्स (PACS), कृषि आधारित और अन्य उत्पादों का निर्यात, जैविक उत्पादों का प्रचार और मार्केटिंग, नए क्षेत्रों में सहकारी समितियों का विस्तार शामिल हैं। इसके अलावा, पैक्स के मॉडल उपनियमों सहित पैक्स के कम्प्यूटरीकरण, निष्क्रिय पैक्स के पुनरोद्धार के लिए कार्य योजना, लंबी अवधि के वित्तपोषण, दुग्ध सहकारी समितियों और मछली सहकारी समितियों आदि को प्राथमिकता देने के संबंध में प्राथमिक सहकारी समितियों से संबंधित मुद्दों के साथ-साथ पैक्स के मॉडल उप-नियमों पर भी चर्चा की गई।
सहकारी वित्त पोषण में अग्रणी होने के नाते एनसीडीसी (NCDC) ने राज्यों में अपने क्षेत्रीय निदेशालयों के माध्यम से सुविधा के साथ सहकारी क्षेत्र को ऋण देने की संभावनाओं और अवसरों के बारे में जानकारी दी।
राज्यों से पैक्स के कम्प्यूटरीकरण करने का अनुरोध
ज्ञानेश कुमार, सचिव, (सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार) ने देश में सहकारी आंदोलन की शक्ति पर प्रकाश डाला और राज्यों से पैक्स के कम्प्यूटरीकरण पर परियोजना के तहत अप-टू-डेट हार्डवेयर के साथ अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर अपनाने का अनुरोध किया, जैसा कि भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है। इसके अलावा, सहकारिता के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, मंत्रालय एमएससीएस अधिनियम 2002 के तहत एक राष्ट्रीय स्तर के सहकारी निर्यात गृह के पंजीकरण की सुविधा प्रदान कर रहा है, जो केंद्रीय विदेश मंत्रालय और केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के साथ सहकारी आंदोलन से जुड़े लगभग 30 करोड़ लोगों की निर्यात क्षमता को नियंत्रित करने के लिए करीबी समन्वय में काम करेगा।
सहकारिता सचिव ने जैविक उत्पादों और गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन, खरीद, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए पंजीकृत होने वाली बहु-राज्य सहकारी समिति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने आगे बताया कि सहकारिता मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई कर रहा है कि सहकारी समितियों को अन्य आर्थिक रूपों के समान माना जाए। 'सहकार से समृद्धि' तक के मंत्र को साकार करने के लिए देश में सहकारी आधारित आर्थिक मॉडल को प्रोत्साहन देने के लिए सभी हितधारकों के एक साथ काम करने के संकल्प के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।