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प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार लाएगी कानून, लोकुर समिति पर फिलहाल रोक
Tue, 27 Oct 2020 06:32 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 27 Oct 2020 06:32 AM IST
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दिल्ली में प्रदूषण का धुंध
- फोटो : अमर उजाला
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर के आसपास पराली जलाने पर निगरानी और इससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों के समन्वय के लिए शीर्ष कोर्ट के सेवानिवृत्त जज मदन बी लोकुर की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार के आग्रह पर अपने 16 अक्तूबर के फैसले पर रोक लगाई है।
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सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने केंद्र द्वारा वायु प्रदूषण से निपटने के लिए व्यापक कानून लाने के आश्वासन के चलते यह फैसला किया है। पीठ ने कहा, प्रदूषण के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। यही एक बड़ा मुद्दा है जिसका हल तुरंत होना चाहिए और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। इससे पहले 16 अक्तूबर को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने एनसीसी, एनएसएस, स्काउट गाइड के सदस्यों को पराली जलाने की निगरानी में सहयोग के लिए तैनात करने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा था कि वह सिर्फ इतना चाहती है कि दिल्ली एनसीआर के लोग बिना किसी प्रदूषण के स्वच्छ हवा में सांस लें। पीठ अब इस मामले में प्रदूषण से जुड़े अन्य लंबित मामलों के साथ 29 अक्तूबर को सुनवाई करेगी।
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चार दिन में कानून का मसौदा पेश करेगी सरकार
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया, केंद सरकार ने इस मामले में गंभीरता से विचार किया है। उन्होंने कहा, प्रदूषण रोकने के लिए कानून के मसौदे को चार दिन के भीतर अदालत में पेश किया जाएगा। इस लिए पिछले आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा, प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए युद्ध स्तर पर काम किए जाने की जरूरत है।
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एक साल से पहले नहीं आएगा कानून
याचिकाकर्ता के वकील विकास सिंह ने पीठ से कहा कि कानून आने में एक साल लगेगा। इसके लिए अगले साल तक का इंतजार करना होगा। इस पर मेहता ने जवाब दिया कि यह सरकार तुरंत फैसले लेती है और काम पूरा करती है।
जब कानून बन रहा तो हमें आदेश पारित करने की जरूरत नहीं
पीठ ने इस पर कहा कि जैसा कि सॉलिसिटर जनरल ने बताया है अगर सरकार कानून बना रही है तो इस संदर्भ में हमें आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है। पूर्व में जो आदेश दिया गया उसे लागू करने की कोई आवश्यकता नहीं है। पीठ ने कहा, हमें नहीं पता था कि कमेटी क्या करेगी या सरकार इस मामले में क्या कर रही है। \