Article 370: अनुच्छेद 370 के बाद विकास की राह पर जम्मू-कश्मीर, पत्थरबाजी भी बंद; केंद्र का SC में नया हलफनामा
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपने नए हलफनामे में संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इस फैसले ने क्षेत्र के आम आदमी पर अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है।
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व स्थिरता का दौर है। तीन दशकों की उथल-पुथल के बाद क्षेत्र में जीवन सामान्य हो गया है। राज्य में लगातार प्रगति हो रही है। तीन वर्षों में स्कूल, कॉलेज और अन्य सार्वजनिक संस्थान कुशलता से काम कर रहे हैं। पत्थरबाजी अतीत की बात हो गई है। अब घाटी के लोगों को भी वह अधिकार प्राप्त हैं, जो देश के दूसरे प्रांतों के लोगों को हैं। आतंकवादी-अलगाववादी एजेंडे के तहत 2018 में पत्थर फेंकने की 1,767 घटनाएं हुईं, जो 370 हटने के बाद 2023 में मौजूदा तारीख तक शून्य हैं।
गृह मंत्रालय ने पांच अगस्त, 2019 के फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर में आए बदलावाें पर शीर्ष कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। इसमें कहा है, हड़ताल, पथराव व बंदी की प्रथा अब अतीत की बात है। पथराव की कोई घटना नहीं हुई है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम और अनुसूचित जाति व जनजाति को आरक्षण देने वाले केंद्रीय कानून भी लागू हैं। केंद्र का जवाब अनुच्छेद 370 निरस्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली 20 से अधिक याचिकाओं पर आया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ मंगलवार को इस पर सुनवाई करेगी।
आतंकी नेटवर्क नष्ट वारदातें भी हुईं कम
मंत्रालय ने बताया, 370 खत्म होने से राज्य में आतंक के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति है। आतंकी नेटवर्क नष्ट कर दिए हैं। वर्ष 2018 से 2022 के बीच आतंकी गतिविधियों में 45.2 फीसदी की कमी आई है। घुसपैठ की घटनाएं भी 2018 में 143 के मुकाबले 2022 में सिर्फ 14 रह गईं। कानून-व्यवस्था के मामले भी 1767 से घटकर 50 रह गए। 2022 में सुरक्षा बलों के 31 सदस्यों की जान गई, जबकि 2018 में यह 91 थी।
पंचायतीराज का आगाज
जिला विकास परिषदों के चुनाव के साथ ही त्रिस्तरीय पंचायतीराज की शुरूआत हुई है। लोगों की मांग को पूरा करते हुए कश्मीरी, डोगरी, उर्दू व हिंदी जैसी स्थानीय भाषाओं को भी आधिकारिक भाषाओं के रूप में जोड़ा गया है। विधायिका में अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं, जो पहले नहीं थीं।
केंद्र के हलफनामे पर मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा विचार किया जाएगा। यह पीठ जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र ने पूर्ववर्ती राज्य जम्मू और कश्मीर से विशेष दर्जा छीनने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का निर्णय लिया था।
अनुच्छेद 370 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं को 2019 में एक संविधान पीठ को भेजा गया था। केंद्र ने तर्क दिया कि जिस ऐतिहासिक संवैधानिक कदम को चुनौती दी जा रही है उससे क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास, प्रगति, सुरक्षा और स्थिरता आई है, जो पुराने अनुच्छेद 370 शासन के दौरान अक्सर नहीं थी। हलफनामे में कहा गया है कि यह क्षेत्र में शांति, समृद्धि और प्रगति सुनिश्चित करने की भारत संघ की नीति के कारण संभव हुआ है।