{"_id":"637bb6a730effc63b64c8ffc","slug":"centre-sought-stalin-s-support-participation-in-kashi-tamil-sangamam-yet-to-get-response-sources","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kashi Tamil Sangamam- काशी तमिल संगमम के लिए केंद्र ने लिखा सीएम स्टालिन को पत्र, अब तक नहीं मिला कोई जवाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Kashi Tamil Sangamam- काशी तमिल संगमम के लिए केंद्र ने लिखा सीएम स्टालिन को पत्र, अब तक नहीं मिला कोई जवाब
Mon, 21 Nov 2022 11:04 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 21 Nov 2022 11:04 PM IST
सार
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किए गए केटीएस का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में काशी (वाराणसी) के बीच ऐतिहासिक संबंधों को फिर से खोजना है।
विज्ञापन
एमके स्टालिन
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र ने पिछले महीने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को पत्र लिखकर चल रहे काशी तमिल संगमम में उनके समर्थन और भागीदारी की मांग की थी, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके के साथ-साथ तमिल विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि वाराणसी में महीने भर चलने वाले काशी तमिल संगम (केटीएस) में तमिलनाडु सरकार शामिल नहीं रही है।
विज्ञापन
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किए गए केटीएस का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में काशी (वाराणसी) के बीच ऐतिहासिक संबंधों को फिर से खोजना है और इसके लिए दो संस्थागत भागीदार आईआईटी-मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय हैं।
विज्ञापन
मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि मंत्रालय ने राज्य सरकार को इस कार्यक्रम के विवरण के साथ पत्र लिखा था और एक हितधारक के रूप में तमिलनाडु सरकार से भी समर्थन मांगा था। हालांकि, मंत्रालय को अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। डीएमके प्रवक्ता वी कन्नदासन ने तमिलनाडु सरकार और तमिल विद्वानों से न तो परामर्श करने और न ही आमंत्रित करने के लिए केंद्र की आलोचना की।
विज्ञापन
आईआईटी-मद्रास को राज्य में कार्यक्रम समन्वयक के रूप में शामिल करने के लिए भी मंत्रालय की आलोचना की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि तकनीकी संस्थान का तमिल और तमिल साहित्य के प्रचार से कोई संबंध नहीं है।