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युद्ध की स्थिति में सड़कों पर उतरेंगे लड़ाकू विमान, 29 राजमार्ग होंगे अपडेट

Thu, 17 Jan 2019 01:25 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 17 Jan 2019 01:25 PM IST
सार

  • 29 राष्ट्रीय राजमार्गों पर हवाई पट्टियां बनाई जाएंगी जिनका इस्तेमाल लड़ाकू विमान की आपातकालीन लैंडिंग के लिए होगा।
  • जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर और पश्चिम बंगाल की अतंरराष्ट्रीय सीमा पर बनाई हवाई पट्टियां बनाई जाएंगी।
  • आईएएफ और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकारण (एनएचएआई) को साइट सर्वेक्षण और निरीक्षण का काम सौंपा गया था।
  • नवंबर में मांडविया ने घोषणा की थी कि केंद्र ने राज्यों की 13 सड़कों की पहचान की है जहां आपातकालीन लैंडिंग हो सकती है।

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Centre planning to set up 29 airstrips on National Highways for emergency landings of aircraft
फाइल फोटो - फोटो : PTI

विस्तार

केंद्र सरकार रणनीतिक महत्वपूर्ण स्थानों के 29 राष्ट्रीय राजमार्गों पर हवाई पट्टियां बनाएगा जिनका इस्तेमाल लड़ाकू विमान की आपातकालीन लैंडिंग के लिए किया जाएगा। यह कहना है कि परिवहन मंत्रालय का। प्रस्तावित पट्टियां जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर और पश्चिम बंगाल की अतंरराष्ट्रीय सीमा पर बनाई जाएंगी। तीन प्रस्तावित पट्टियां ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले राजमार्गों पर बनाई जाएंगी जो कि माओवाद प्रभावित हैं।

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आपातकालीन पट्टियों का निर्माण दक्षिण के राज्यों तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी करने की योजना है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने 2016 में रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के साथ एक अंतर-मंत्रालयी संयुक्त समिति के गठन की घोषणा की थी। जिससे कि इन पट्टियों का निर्माण करने और तकनीकी विवरणों की जानकारी मिल सके। आईएएफ और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकारण (एनएचएआई) को साइट सर्वेक्षण और निरीक्षण का काम सौंपा गया था।
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साइट सर्वेक्षण और निरीक्षण के काम के साथ ही योजना बनाना और आपातकालीन लैंडिंग सुविधाओं के लिए बोली लगाने का कार्य विभिन्न स्तरों पर है। सात जनवरी को लोकसभा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि इस कार्य को समाप्त करने की सीमा आठ महीने रखी गई है। नवंबर में मांडविया ने घोषणा की थी कि केंद्र ने राज्यों की 13 सड़कों की पहचान की है जहां आपातकालीन लैंडिंग हो सकती है। जिसमें 11 सड़के एनएचएआई के अंतर्गत आती हैं जबकि दो राज्य राजमार्ग हैं। 
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सड़क मंत्रालय के अनुसार अभी इस तरह की केवल एक ही पट्टी कार्यशील है जो उत्तर प्रदेश के लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर बनी है। पूर्व वायुसेना प्रमुख फली होमी मेजर ने कहा, 'यह एक बेहतरीन विचार है और दुनिया के बहुत से हिस्सों में इसे अपनाया जा रहा है लेकिन यह बहुत जटिल परियोजना होने वाली है। इसमें बहुत सारी योजना और विचार के अलावा सबसे ज्यादा फंड की जरूरत होगी।'

वायुसेना द्वारा प्रस्तावित 29 पट्टियों में से तीन के लिए बोली लगनी शुरू हो गई है। इनमें जम्मू और कश्मीर का बिजबेहरा से लेकर चिनार बाग, पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से ओडिशा के कियोनझार तक (प्रस्तावित लागत 97.51 करोड़ रुपये) और आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से ओंगोल तक (प्रस्तावित लागत 79.84 करोड़ रुपये) शामिल है।


परिवहन मंत्रालय के अनुसार, 'उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित चार परियोजनाओं को मंत्रालय ने अव्यवहार्य बताया है। जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, राज्स्थान और तमिलनाडु की परियोजना में वन्यजीव और भूमि अधिग्रहण की वजह से देरी हो रही है। वहीं जम्मू और कश्मीर और पश्चिम बंगाल की दो परियोजनाओं को वायुसेना की यूनिट के साथ बात करने के बाद फिलहाल के लिए रोक दिया गया है।'

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