अगले साल उर्दू माध्यम से भी दे सकेंगे NEET प्रवेश परीक्षा
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अगले वर्ष से एमबीबीएस और बीडीएस कोर्स में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली नेशनल इलिजिबिलिटी इंटरेंस टेस्ट(नीट) उर्दू माध्यम से भी देने की इजाजत मिल सकती है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शुक्रवार को केंद्र सरकार ने यह संकेत दिया है। हालांकि सरकार ने यह साफ किया कि इस वर्ष ऐसा कर पाना संभव नहीं होगा।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने शुक्रवार को न्यायमूर्ति कूरियन जोसफ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष कहा कि नीट-2017 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में इस वर्ष उर्दू माध्यम में परीक्षा देने की इजाजत देना संभव नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि गत नवंबर महीने में हुई बैठक में किसी भी राज्य ने यह मुद्दा नहीं उठाया। हालांकि सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अगले वर्ष उर्दू माध्यम में भी नीट की परीक्षा देने की इजाजत दी जा सकती है।
नीट परीक्षा में उर्दू माध्यम से भी परीक्षा देने की इजाजत होगी
शीर्ष अदालत स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑरग्नाइजेशन (एसआईओ) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। गत तीन मार्च को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया(एमसीआई), डेंटल कौंसिल ऑफ इंडिया और सीबीएसई को नोटिस जारी किया था।
शुक्रवार को केंद्र सरकार ने पीठ से कहा कि उसे जवाब दाखिल करने के लिए और वक्त दिया जाए। जिसके बाद पीठ ने सरकार को 22 मार्च तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 28 मार्च को होगी।
याचिका में कहा गया है कि महाराष्ट्र और तेलगंना ने एमसीआई को पहले ही जानकारी दे दी है कि नीट परीक्षा में उर्दू माध्यम से भी परीक्षा देने की इजाजत होगी। मालूम हो कि फिलहाल हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, गुजराती, उड़ीया, बंग्ला, असमी, तेलगू, तमिल और कन्नड माध्यम में नीट परीक्षा देने का प्रावधान है।