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Maharashtra-Karnataka Border Row: NCP प्रमुख बोले- सीमा विवाद दो राज्यों के बीच नहीं, मूकदर्शक बना है केंद्र
Thu, 08 Dec 2022 07:08 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 08 Dec 2022 07:08 PM IST
सार
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, महाराष्ट्र और कर्नाटक सीमा विवाद दो राज्यों के बीच नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में मराठी भाषी लोगों के अधिकारों और न्याय के लिए है।
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Sharad Pawar
- फोटो : ANI
विस्तार
महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती है। पवार ने यहां एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, यदि किसी भाषा माध्यम और आंदोलन के विचार को नष्ट करने के लिए शक्ति का दुरुपयोग किया जाता है, तो प्रतिक्रिया होना तय है। लेकिन केंद्र ने इस पर आंख मूंद रखी है।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, महाराष्ट्र और कर्नाटक सीमा विवाद दो राज्यों के बीच नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में मराठी भाषी लोगों के अधिकारों और न्याय के लिए है। इससे पहले बुधवार को लोकसभा में महाराष्ट्र और कर्नाटक के बीच सीमा विवाद का मुद्दा उठाया गया था। राकांपा नेता और पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।
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पवार ने इसका जिक्र करते हुए कहा, कल लोकसभा स्पीकर ने सुप्रिया सुले से कहा कि यह मुद्दा दो राज्यों के बीच का है और संसद में उठाए जाने वाला मुद्दा नहीं है। अगर संसद इस विवाद को नहीं देखेगी तो कौन देखेगा? केंद्र सरकार मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती।
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उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने हमेशा इस बात पर अलग रुख अपनाया है कि दक्षिणी राज्य, बेलागवी में कन्नड़ आबादी का प्रतिशत कैसे बढ़ाया जा सकता है, जो महाराष्ट्र की सीमा से सटा हुआ है। वे (कर्नाटक सरकार) बेलागवी में सरकारी कार्यालय लाए।
राकांपा प्रमुख पवार ने कहा, कर्नाटक विधानसभा का शीतकालीन सत्र भी बेलागवी में आयोजित किया जाता है, ताकि यह दिखाया जा सके कि महाराष्ट्र का शहर पर कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, वहां के स्कूलों में कन्नड़ अनिवार्य है और बच्चों को मराठी पढ़ने की अनुमति नहीं है। महाराष्ट्र में सभी माध्यमों के स्कूल हैं।