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खाना पकाने के लिए एक लाख परिवार को बॉयोगैस देगी सरकार

Tue, 28 Jun 2016 01:27 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 28 Jun 2016 01:27 AM IST
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Centre asks states to set up one lakh biogas plants in FY'17

चालू वित्त वर्ष 2016-17 में एक लाख परिवार को खाना पकाने के लिए बॉयो गैस मुहैया कराई जाएगी। इससे 21,90000 एलपीजी सिलेंडर की बचत होगी। खाना पकाने के लिए एक लाख घरों को बॉयो गैस मुहैया कराने का लक्ष्य नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने तय किया है और इस पर अमल राज्य सरकार करेगी।

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बॉयो गैस बनाने के क्रम में 21 लाख से अधिक एलपीजी सिलेंडर की बचत के साथ खेतों के लिए प्रोसेस्ड खाद भी उपलब्ध होंगे जिससे खेतों में रसायनिक खाद के इस्तेमाल में कमी आएगी। मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक एक लाख घरों में बॉयो गैस के इस्तेमाल की वजह से लगभग 10000 टन यूरिया की बचत होगी।
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एमएनआरई के मुताबिक एक लाख घरों में खाना पकाने के लिए बॉयो गैस के इस्तेमाल से पर्यावरण को 4.5 लाख टन कार्बन डायक्साइड तो 2.5 लाख टन मिथेन की मिलावट से बचाया जा सकेगा।
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खाना पकाने के लिए बॉयो गैस के इस्तेमाल के लिए एमएनआईई नेशनल बॉयोगैस एंड मैन्योर मैनेजमेंट प्रोग्राम (एनबीएमएमपी) प्रोग्राम चला रहा है।

ये है इस कार्यक्रम का उद्देश्य

Centre asks states to set up one lakh biogas plants in FY'17

इस प्रोग्राम का उद्देश्य छोटे-छोटे घरों में खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन तो बॉयो गैस के बाई-प्रोडक्ट के रूप में खेतों के लिए आर्गेनिक खाद उपलब्ध कराना है। इस प्रकार की खादों में नाइट्रोजन, फॉसफोरस व पोटाशियम की उच्च मात्रा होती है।

ग्रामीण इलाके में खाने पकाने के लिए बॉयो गैस मुहैया कराने से गांव की महिलाओं को लकड़ी चुनने व गोबर के उपले बनाने जैसे काम से मुक्ति मिलेगी। इस बारे में नीति आयोग की तरफ से एकीकृत एनर्जी पॉलिसी के तहत लाइफलाइन एनर्जी की जरूरतों को पूरा करने के लिए एप्लीकेशंस भी बनाए गए हैं।

इसमें कहा गया है कि बॉयोगैस खाने पकाने के साथ, गर्मी देने के लिए, बिजली का उत्पादन के लिए और वाहनों को चलाने में इस्तेमाल हो सकती है। इसके इस्तेमाल से घरों के भीतर होने वाले प्रदूषण से भी बचा जा सकता है।

Published By Rahul Sankrityayan

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