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Politics: 'संसद में सरकार ने माना कि बंगाल को मनरेगा कोष के लिए 'शून्य' पैसा दिया गया', डेरेक ओ ब्रायन का दावा

Sun, 04 Aug 2024 05:32 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 04 Aug 2024 05:32 PM IST
सार

Politics: टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने सरकार के 26 जुलाई के उस जवाब को साझा किया, जिसमें मनरेगा के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100 दिनों का रोजगार पूरा करने वाले परिवारों की संख्या पर पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़े दिए गए थे। उन्होंने कहा, आखिरकार! मोदी सरकार ने संसद में माना है कि बंगाल को मनरेगा कोष के लिए शून्य धन दिया गया है। 

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Centre admits inside Parliament that Bengal's been given 'zero' for MNREGA funds: O'Brien
तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

तृणमूल कांग्रेस (टीएमएसी) सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने रविवार को दावा किया कि केंद्र सरकार ने आखिरकार इस बात को माना है कि उसने पश्चिम बंगाल को 100 दिन की ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत शून्य धन दिया है। ब्रायन ने इसके लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पर सरकार द्वारा राज्यसभा में दिए गए एक सवाल के जवाब का हवाला दिया। 

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राज्यसभा सदस्य ओ ब्रायन ने 'एक्स' पर कहा, टीएमसी के लोकसभा सदस्य अभिषेक बनर्जी इस योजना पर श्वेत पत्र की मांग कर रहे हैं, ताकि यह साबित हो सके कि केंद्र ने 2021 के राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद पश्चिम बंगाल को क्या भुगतान किया है।
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ओ ब्रायन ने सरकार के 26 जुलाई के उस जवाब को एक्स पर साझा किया, जिसमें मनरेगा के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 100 दिनों का रोजगार पूरा करने वाले परिवारों की संख्या पर पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़े दिए गए थे।  उन्होंने लिखा, आखिरकार! मोदी सरकार ने संसद में माना है कि बंगाल को मनरेगा कोष के लिए शून्य धन दिया गया है। 
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संसद के ऊपरी सदन में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान की ओर से दिए गए लिखित जवाब के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में 2023-24 में 100 दिनों का रोजगार पूरा करने वाले परिवारों की संख्या शून्य थी। 2022-23 में योजना के तहत राज्य में 1,618 परिवारों को 100 दिनों का काम मिला। जबकि 2021-22 में यह 4,71,136 था। मंत्रालय ने कहा कि 2020-21 में कोरोना की पहली लहर के दौरान यह आंकड़ा 6,78,633 और 2019-20 में यह 3,65,683 था। 


केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने पहले कहा था कि मनरेगा के तहत पश्चिम बंगाल को 9 मार्च, 2022 को केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन न करने के कारण धनराोशि को जारी करने से रोक दिया गया था। उन्होंने कहा था कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 की धारा 27 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई। कुल मिलाकर देश में 2023-24 में करीब 44,99,343 परिवारों को मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार मिला। 

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