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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से नया पीएमओ बनाने का प्रस्ताव नहीं हटाया, जानिए क्या है पूरा मामला

Fri, 18 Dec 2020 09:01 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Fri, 18 Dec 2020 09:01 PM IST
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Central Vista: PM residence to have 10 buildings sources say no question of dropping proposed PMO
Central Vista project - फोटो : Twitter

केंद्र सरकार के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के नए आवासीय परिसर में 12 मीटर की अधिकतम ऊंचाई वाली 10 चार मंजिला इमारतें होंगी। इस प्रोजेक्ट से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना में प्रस्तावित प्रधानमंत्री के नए कार्यालय (पीएमओ) को हटाने का कोई सवाल ही नहीं है।

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केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने पर्यावरण और वन मंत्रालय के एक विशेषज्ञ पैनल के सामने अपने नए प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के नए कार्यालय के निर्माण का कोई उल्लेख नहीं किया था, इसलिए अटकलें लगाईं जा रहीं थीं कि विस्टा प्रोजेक्ट से नए प्रधानमंत्री कार्यालय को बनाने का प्रस्ताव हटा दिया गया है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने वाले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने प्रोजेक्ट के लिए अनुमानित लागत 11,794 करोड़ रुपये से बढ़ाकर अब 13,450 करोड़ रुपये कर दी है।
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चार मंजिला होगा प्रधानमंत्री का आवास 
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने अपने प्रस्ताव में बताया कि प्रधानमंत्री का नया निवास 15 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। इसमें चार मंजिला 10 इमारतें होंगी। प्रधानमंत्री के नया आवास 30,351 वर्ग मीटर का तैयार होगा। इसके अलावा, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के लिए 2.50 एकड़ जमीन पर एक अलग इमारत बनाई जाएगी। बता दें कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा का सारा जिम्मा एसपीजी के पास ही होता है।

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वीपी एनक्लेव में 32 भवन होंगे

सीपीडब्ल्यूडी ने प्रस्ताव में कहा कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना में उपराष्ट्रपति के लिए नया एनक्लेव भी शामिल है, जो 15 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा और इसमें 15 मीटर की अधिकतम ऊंचाई वाली पांच मंजिला इमारतें होंगी। वीपी एनक्लेव में 32 भवन होंगे।

लागत बढ़ाए जाने की जानकारी नहीं 
सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के कानूनी शोधकर्ता कांची कोहली ने अपने नए प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित नए कार्यालय को छोड़ने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के कदम पर कहा, पर्यावरण मंत्रालय को सौंपे गए दस्तावेज में इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई कि कुछ प्लाटों या कार्यालयों को बाहर रखा गया है और इसके बावजूद लागत क्यों बढ़ी है।
कोहली ने कहा कि सीपीडब्ल्यूडी का जवाब भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि क्या मौजूदा प्रस्ताव के किसी विकल्प पर विचार किया गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी लेने से पहले इस तरह के विकल्पों को जानना भी जरूरी है।  

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर को नए संसद भवन के निर्माण के लिए भूमिपूजन कर आधारशिला रख दी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी इसके निर्माण कार्य पर रोक लगा रखी है। इस निर्माण कार्य को रुकवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं।

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