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MNREGA: मनरेगा कानून को सख्त बनाएगी सरकार, पैसे लेकर लाभार्थियों के नाम दर्ज कर रहे हैं बिचौलिए
Mon, 14 Feb 2022 03:23 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 14 Feb 2022 03:23 AM IST
सार
अधिकारी ने बताया कि पिछले दो साल में बजट अनुमान के मुकाबले संशोधित अनुमान काफी अधिक रहा है। पाया गया है कि बिचौलिये योजना के तहत लाभार्थियों के नाम दर्ज करने के लिए पैसे ले रहे हैं।
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मनरेगा...
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को सख्त बनाने की तैयारी कर रही है। एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि मनरेगा में पिछले दो साल में कई गड़बड़ियां देखने को मिली हैं।
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केंद्र सरकार ने 2022-23 के लिए मनरेगा के तहत 73,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (आरई) में दिए गए 98,000 करोड़ रुपये से 25 फीसदी कम है। 2022-23 के लिए आवंटन चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान (बीई) के बराबर है।
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अधिकारी ने बताया कि पिछले दो साल में बजट अनुमान के मुकाबले संशोधित अनुमान काफी अधिक रहा है। पाया गया है कि बिचौलिये योजना के तहत लाभार्थियों के नाम दर्ज करने के लिए पैसे ले रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण सीधे व्यक्ति तक धन पहुंचाने में सफल रहा है। फिर भी ऐसे बिचौलिये हैं, जो लोगों से कह रहे हैं कि मैं आपका नाम मनरेगा सूची में डाल दूंगा। इसके लिए आपको नकद हस्तांतरण के बाद वह राशि मुझे वापस देनी होगी। यह बड़े पैमाने पर हो रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय इस पर सख्ती करेगा।
लाभार्थी और बिचौलिये में साठगांठ
अधिकारीका कहना है कि लाभार्थी और बिचौलियों के बीच यह साठगांठ है। लाभार्थी बिचौलिये को कुछ हिस्सा दे रहा है, इसलिए वह काम पर भी नहीं जाएगा और इसलिए कोई काम नहीं हो रहा है। सरकार पिछले दो साल में मनरेगा कोष आवंटित करने में बहुत उदार रही है। 2020-21 में 1.11 लाख करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि 2014-15 में यह आंकड़ा 35,000 करोड़ रुपये था।