दवाओं पर बेलगाम मुनाफे को रोकने की तैयारी में केंद्र सरकार
केंद्र सरकार दवाओं पर बेलगाम मुनाफे को रोकने की तैयारी कर रही है। आने वाले समय में दवाओं की बिक्री के पहले ही उस पर लाभ की सीमा तय कर दी जाएगी। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के सुझाव पर दवा मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) 2013 में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि आम जनता को उचित मूल्य पर दवाएं और मेडिकल उपकरण मिल सकें।
वर्तमान में सरकार आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखती है, जबकि गैर-निर्धारित दवाओं की कीमतें उसके नियंत्रण से बाहर हैं। देसी-विदेशी कंपनियां, एजेंट, डिस्ट्रीब्यूटर व फुटकर विक्रेता इन दवाओं पर 30 फीसदी से 65 फीसदी और कई दवाओं पर इससे भी ज्यादा मुनाफा कमाते हैं।
दवा कंपनी सहित पूरी श्रृंखला इनमें क्रमवार लाभ हासिल करती हैं, जिस पर अंकुश लगाने के लिए पीएमओ ने बिक्री के पहले ही लाभ सीमा तय करने को कहा है। डीपीसीओ में संशोधन के लिए तैयार किए गए कार्यपत्र में पीएमओ की बैठक के बाद फिर बदलाव किया जा रहा है।
पीएमओ तय करेगा लाभ का प्रतिशत
नीति आयोग के सूत्रों के मुताबिक, नई नीति में हर दवा में लाभ की सीमा पहले चरण की बिक्री के आधार पर तय की जाएगी। इसमें चिकित्सा के लिए आयात की जाने वाली हर वस्तु शामिल होगी। लाभ का प्रतिशत का निर्धारण पीएमओ के साथ आगामी बैठक में तय होगा। इसमें फार्मास्यूटिकल विभाग और राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल मूल्य प्राधिकरण भी शामिल होंगे।
क्यूआर कोड होगा अनिवार्य
आयोग के सूत्र बताते हैं कि मौजूदा समय में नकली दवाओं और मेडिकल उपकरणों को रोकने का पुख्ता तंत्र नहीं है। इसके लिए फार्मा उद्योग की पैकिंग में क्यूआर कोड का प्रयोग अनिवार्य किया जाएगा। इससे बिक्री की निगरानी की जा सकेगी और नकली दवाओं पर भी रोक लगेगी। आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि हाल में पीएमओ में कार्यपत्र को लेकर बैठक हुई थी, जिस पर तीन प्रमुख सुझावों पर आयोग ने संबंधित प्राधिकारों के साथ मिलकर काम किया है।
अगले साल हो सकता है लागू
अधिकारी का कहना है कि दवाओं और मेडिकल उपकरणों में लाभ की सीमा तय होने से ‘आयुष्मान भारत’ योजना को बड़ा फायदा मिलने के साथ ही देश में रहने वाले मध्य वर्ग को फायदा होगा।
उन्होंने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में विदेश से आने वाली हर चीज का व्यापारिक लाभ भी पहले से तय होगा। ऐसे में कंपनियों को निर्माण के साथ बाजार तक उत्पाद पहुंचाने का खर्च स्पष्ट करना होगा। ऐसे में हर कदम पर लाभ लेना संभव नहीं होगा।
गौरतलब है कि डीपीसीओ में बदलाव कर सरकार नई नीति को अगले साल तक लागू कर सकती है। आयोग इसमें अंतरराष्ट्रीय नीतियों को ध्यान में रखकर बदलाव कर रहा है।