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क्रिप्टोकरेंसी : मनीलॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल कर रहे अपराधी, ईडी ने 135 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कीं

Tue, 15 Mar 2022 05:22 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 15 Mar 2022 05:22 AM IST
सार

वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में साइबर अपराधियों की तरफ से क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में बताया कि ईडी पीएमएलए के तहत जिन मामलों की जांच कर रहा है उनमें पता चलता है कि आरोपियों ने क्रिप्टोंकरेंसी का इस्तेमाल काले धन को सफेद बनाने में किया है।

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Central Government said Criminals using Cryptocurrency for money laundering ED attaches assets worth Rs 135 crore
बजट सत्र के दौरान लोकसभा में सवालों का जवाब देते वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी। - फोटो : Twitter@mppchaudhary

विस्तार

केंद्र सरकार ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सात ऐसे मामलों की जांच कर रहा है, जिनमें मनीलॉन्ड्रिंग के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया गया है। इन मामलों में 135 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया गया है।

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वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में साइबर अपराधियों की तरफ से क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में बताया, ईडी पीएमएलए के तहत जिन मामलों की जांच कर रहा है उनमें पता चलता है कि आरोपियों ने क्रिप्टोंकरेंसी का इस्तेमाल काले धन को सफेद बनाने में किया है। इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त लोगों की पहचान के सवाल पर चौधरी ने कहा कि अभी तक ईडी की जांच से खुलासा हुआ है कि कुछ विदेशी नागरिकों और उनके भारतीय सहयोगियों ने मुद्रा विनिमय प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टोंकरेंसी खातों के जरिये धन शोधन किया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि एक मामले में ईडी ने 2020 में एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया था। 
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पांच वर्ष के न्यूनतम स्तर पर पहुंचे बैंकों के साथ धोखाधड़ी के मामले
देश में बैंकों से धोखाधड़ी पांच वर्ष में न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं। 2021-22 के बीते नौ माह में बैंकों के साथ  648 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। 2016-17 में बैंकों को 61,229 करोड़ की चपत लगी थी। 2020-21 धोखाधड़ी से बैंकों को 11,583 करोड़ रुपये का नुकसान था।
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वित्त राज्यमंत्री भागवत कराड ने एक सवाल के लिखित जवाब में बताया, धोखाधड़ी के मामलों की पहचान और रिपोर्टिंग की व्यापक व्यवस्था से मामलों में तेज गिरावट आई है। धोखाधड़ी को लेकर 2016 में रिजर्व बैंक ने अहम निर्देश जारी किए थे, इसके अलावा सरकार ने भी कई ढांचागत व प्रक्रियात्मक सुधार किए हैं, ताकि बैंकों के साथ धोखाधड़ी रोकी जा सके। कराड ने कहा, एनपीए के पुराने मामलों की जांच से वर्षों से चली आ रही धोखाधड़ी का पता चला। इसकी वजह से शुरुआत के वर्षों में रिपोर्ट की गई धोखाधड़ी की राशि में वृद्धि हुई है। 

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