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हालात खतरनाक: 200 जिलों में लॉकडाउन लगाए बिना नहीं मानेगा कोरोना, कभी भी हो सकता है फैसला!

Fri, 30 Apr 2021 06:39 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 30 Apr 2021 06:39 PM IST
सार

केन्द्रीय एजेंसियों ने केन्द्र सरकार से सुविधा, संसाधन, अस्पताल, दवा और ऑक्सीजन के लिए तालमेल आधारित रणनीति पर जोर देने के लिए कहा है। वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि लोगों का खुद अस्पताल खोजना, भागदौड़ करना, संसाधन की मारामारी यह ठीक नहीं है...

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Central Government may take lockdown decision in 200 cities soon to curb coronavirus chain
कोरोना का कहर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार 7.5 फीसदी दर की तरह बढ़ रही है। इसलिए कम से कम 200 जिलों में लॉकडाउन लगाना जरूरी हो गया है। केन्द्र सरकार के नियामकों और शीर्ष एजेंसियों ने प्रधानमंत्री को इस स्थिति से अवगत करा दिया है। प्राप्त जानकारी के अुनसार प्रधानमंत्री ने इसके बाबत व्यापक चर्चा की है और केन्द्र सरकार सही समय पर सख्त कदम उठाने की घोषणा कर सकती है।

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परिस्थितियां प्रतिकूल

नीति आयोग के एक सदस्य ने भी माना कि परिस्थितियां प्रतिकूल होने की तरफ बढ़ रही हैं। इसलिए कोरोना वायरस की श्रृंखला तोड़ना बेहद जरूरी है। सूत्र का कहना है कि पिछले दिनों में केन्द्र सरकार और केन्द्रीय एजेंसियों के प्रयास से ऑक्सीजन की आपूर्ति धीरे-धीरे सुचारु हो रही है, लेकिन इतने भर से कोई काम नहीं चलने वाला है। वायरस की चेन तोड़ऩे के लिए लॉकडाउन लगाना समय की जरूरत बन गया है। सूत्र का कहना है कि राज्यों के स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसका सकारात्मक नतीजा नहीं निकल पा रहा है।

लोगों का अस्पताल और संसाधन के लिए भाग-दौड़ करना ठीक नहीं, सरकार उठाए जिम्मेदारी

केन्द्रीय एजेंसियों ने केन्द्र सरकार से सुविधा, संसाधन, अस्पताल, दवा और ऑक्सीजन के लिए तालमेल आधारित रणनीति पर जोर देने के लिए कहा है। वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि लोगों का खुद अस्पताल खोजना, भागदौड़ करना, संसाधन की मारामारी यह ठीक नहीं है। इससे संक्रमण के साथ-साथ कालाबाजारी और नकारात्मक संदेशों के प्रसार को बल मिल रहा है। इसलिए केन्द्र सरकार को चाहिए वह राज्यों को इसकी केन्द्रीयकृत व्यवस्था बनाने के लिए कहे। ताकि एक स्थान पर लोगों को सभी आवश्यक जानकारी मिल जाए। बताते हैं इससे कोरोना को काबू करने में काफी सहायता मिलेगी।

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केंद्रीय स्तर पर तीन प्रयास महत्वपूर्ण

महानिदेशक स्तर के सूत्र का कहना है कि फिलहाल तीन प्राथमिकताओं पर जोर दिया जा रहा है। इसमें पहली प्राथमिकता संसाधन जुटाना है। इसमें अस्पताल अथवा अस्थाई अस्पताल, उसके लिए मूलभूत सुविधाएं तथा उसे चलाने के लिए जरूरी स्टाफ। प्रधानमंत्री मोदी इस दिशा में खुद कड़ी मेहनत कर रहे हैं। डाक्टर, नर्स और पुराने रिटायर हो चुके लोगों की सहायता लेने की योजना बन रही है। सेना, डीआरडीओ और सैन्य चिकित्सा सेवा महानिदेशालय से भी संपर्क किया जा रहा है।

दूसरे स्तर का प्रयास आईसीयू, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर, ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना, दवाओं में खासकर वायरल संक्रमण रोकने में कारगर दवाइयों के लिए केन्द्र सरकार राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रही है। सूत्र का कहना है कि हमारी मूलभूल आवश्यकता वेंटिलेटर नहीं हैं। हमारे पास करीब 90 हजार वेंटिलेटर हैं। कुछ हजार वेंटिलेटर विदेश से आयत हो रहे हैं। इसलिए वेंटिलेटर अधिक नहीं चाहिए। हमारी मूल आवश्यकता ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध कराने वाले आईसीयू कम वेंटिलेटर की है। ताकि गंभीर हो
रहे मरीजों का समुचित इलाज किया जा सके।

तीसरे चरण का प्रयास मॉनिटरिंग, प्रशिक्षित मैनपॉवर स्टाफ को लेकर है। सूत्र का कहना है कि सभी डॉक्टर, नर्स या स्टाफ से वेंटिलेटर आदि ऑपरेट करने का काम नहीं लिया जा सकता। इसलिए केन्द्र सरकार इस दिशा में गंभीरता से योजना बनाकर काम कर रही है।

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