बिजली संकट: जून तक 190 लाख टन कोयला आयात का आदेश, 63 फीसदी कम हुआ था आयात
कंपनियां भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत अधिक होने की वजह से आयात करने से बच रही हैं।2019-20 की तुलना में 20-21 में कंपनियों ने 63 फीसदी कम कोयला आयात किया था। ब
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केंद्र सरकार ने बिजली उत्पादक कंपनियों को 30 जून तक 190 लाख टन कोयला आयात करने के निर्देश दिए हैं। अक्तूबर तक 379 लाख टन कोयला आयात किया जाएगा।
केंद्र बिजली की कीमत स्थिर रखने के लिए कोयला आयात को प्रोत्साहित नहीं कर रहा। कंपनियां भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत अधिक होने की वजह से आयात करने से बच रही हैं।
- 2019-20 की तुलना में 20-21 में कंपनियों ने 63 फीसदी कम कोयला आयात किया था। बहरहाल, मौजूदा संकट को देखते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने कंपनियों से कहा है, 379 लाख टन कोयले में से 50 फीसदी का आयात 30 जून तक करना है। अगस्त के अंत तक 40 फीसदी व अक्तूबर के अंत तक 10 फीसदी आयात करना होगा।
- कंपनियां यह आदेश मानने को बाध्य नहीं हैं, पर केंद्र ने स्पष्ट किया कि मानसून शुरू होने से पहले न्यूनतम जरूरी स्टॉक नहीं बनाया गया, तो बिजली उत्पादन ठप होने की नौबत आ सकती है। लिहाजा, हर हाल में बिजली संकट से बचने के लिए कोयला आयात कर पर्याप्त स्टॉक तैयार किया जाए, ऐसे में आयात के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन फिर भी मांग से 7.6% कम रही आपूर्ति
कोल इंडिया ने देश में रिकॉर्ड कोयला उत्पादन किया है, फिर भी मांग की तुलना में आपूर्ति 7.6 फीसदी कम रही। दूसरी तरफ कोयले की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल की वजह से आयात में कटौती भी मुसीबत का सबब बनी है। मोटे तौर पर हर तरफ से बिजली संकट के और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को बताया
कि अप्रैल, 2022 में देश में 661.54 लाख टन कोयला उत्पादन हुआ, जिसमें से 617.2 लाख टन बिजली उत्पादकों को मुहैया कराया गया। हालांकि, इस दौरान बिजली की मांग पूरी करने के लिए 668 लाख टन कोयले की जरूरत थी। इस तरह से मांग की तुलना में आपूर्ति करीब 7.6 फीसदी की कम रही।
उत्पादन सर्वोच्च स्तर पर
कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अप्रैल में 534.7 लाख टन कोयले का उत्पादन किया। इससे पहले सर्वाधिक मासिक उत्पादन अप्रैल, 2019 के दौरान 450.29 लाख टन किया गया था। इस तरह से कोल इंडिया ने अपने सर्वोच्च स्तर से 6.02 फीसदी ज्यादा कोयला उत्पादन किया। देश में 80 फीसदी कोयले का उत्पादन करने वाली कोल इंडिया ने पिछले वर्ष की तुलना में 15.6 फीसदी ज्यादा उत्पादन किया, लेकिन यह निर्धारित लक्ष्य से 2.5 फीसदी कम रहा। वार्षिक उत्पादन के लिहाज से देखें तो 2020-21 के 7,160 लाख टन उत्पादन की तुलना में 2021-22 में उत्पादन 8.55 फीसदी बढ़कर 7,770.23 लाख टन रहा।
मांग में भारी उछाल
अप्रैल से शुरू हुआ बिजली संकट छह वर्ष में सबसे गंभीर है। बिजली उत्पादकों के पास कोयले के स्थानीय भंडार नौ वर्ष के न्यूनतम स्तर पर हैं, जबकि बिजली की मांग में चार दशक में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है। इसके अलावा बिजली उत्पादक कंपनियों की तरफ से उन्हें आवंटित कोयला खदानों से 33 फीसदी कम खनन करना भी इस संकट के पीछे बड़े कारणों में से एक है।
आयात में 43 फीसदी कमी
पिछले वर्ष मार्च-अप्रैल के दौरान नॉन कोकिंग कोल की कीमत 50 डॉलर प्रति टन थी, जो अब करीब 288 डॉलर प्रति टन है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयला महंगा होने की वजह से कंपनियां कोयले के आयात से कतरा रही हैं। बीते तीन माह के दौरान ही कोयले का आयात 42 लाख टन से घटकर 24 लाख टन रह गया है। वहीं, 2020 की इसी अवधि से तुलना करें तो आयात में 63 फीसदी कमी आई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने सार्वजनिक बिजली उत्पादक कंपनियों को अपने स्टॉक का कम से कम 10 फीसदी व निजी कंपनियों को 4 फीसदी कोयला आयात करने का आदेश दिया है। इसके तहत कंपिनयों को अक्तूबर तक कुल 379 लाख टन कोयला आयात करना होगा।
बिजली होगी महंगी
मार्च 2017 के बाद से बाद से सरकारी बिजली उत्पादक कंपनियों ने 71 लाख टन और निजी कंपनियों ने 131 लाख टन से ज्यादा कोयला आयात नहीं किया है। ऐसे में अचानक बड़ी मात्रा में कोयला आयात करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने से दाम भी बढ़ेंगे। आखिर में इसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
रेलवे ने कमर कसी
बिजली मंत्रालय के मुताबिक रेलवे ने अप्रैल में कोयला परिवहन के लिए औसतन 390 ट्रेन मुहैया कराई थीं, जो जरूरत से 13.9 फीसदी कम और अपने लक्ष्य से 6 फीसदी कम थीं। हालांकि, रेल मंत्रालय ने पिछले हफ्ते बिजली क्षेत्र के लिए कोयला ढोने वाली ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 427 कर दी है।