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केंद्र सरकार ने माना, नोटबंदी के बाद दो साल में बढ़ी बेरोजगारी दर, असंगठित क्षेत्र में घटे रोजगार
Mon, 18 Nov 2019 10:16 PM IST
Nilesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Mon, 18 Nov 2019 10:16 PM IST
सार
- श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में दी जानकारी
- टीएमसी सांसद माला रॉय ने पूछा था सवाल, केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब
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Santosh Gangwar
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र सरकार ने जहां एक ओर इस वर्ष राष्ट्रीय सैंपल सर्वे (एनएसएसओ) के आंकड़े जारी करने से इनकार कर दिया, वहीं सोमवार को उसने लोकसभा में स्वीकार किया कि नोटबंदी के बाद दो साल में बेरोजगारी की दर तीन फीसदी से अधिक बढ़ गई है। श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी दी।
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तृणमूल कांग्रेस की सांसद माला रॉय ने सवाल पूछा था कि पिछले तीन वर्षों के दौरान असंगठित क्षेत्र में कितने लोगों को रोजगार मिला और नोटबंदी का इस क्षेत्र पर क्या असर पड़ा। इसके जवाब में गंगवार ने कहा, आंकड़ों के मुताबिक 2013-14 में गैर कृषि क्षेत्र में असंगठित कामगारों की संख्या 53.7 प्रतिशत थी।
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2015-16 में 50.5 फीसदी असंगठित कामगारों को रोजगार मिला। नोटबंदी के बाद 2017-18 में यह आंकड़ा घटकर 46.8 फीसदी रह गया। यानी नोटबंदी के दो वर्षों के अंदर असंगठित क्षेत्र में बेरोजगारी की दर 3.7 फीसदी बढ़ गई।
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68.4 प्रतिशत रोजगार असंगठित क्षेत्र में
गंगवार ने स्पष्ट किया इसमें यदि कृषि, बागवानी और उससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों की संख्या जोड़ दी जाए तो असंगठित क्षेत्र में रोजगार पाने वालों की संख्या जनसंख्या का 68.4 प्रतिशत हो जाती है।
गौरतलब है कि इससे पहले सरकार ने कहा था कि इस वर्ष राष्ट्रीय सैंपल सर्वे द्वारा कराए घरेलू उपभोक्ता खर्च सर्वेक्षण के नतीजे जारी नहीं किए जाएंगे। मीडिया में उस समय आई खबरों के मुताबिक 2011-12 के मुकाबले 2017-18 में प्रति व्यक्ति खर्च करने की क्षमता 3.7 फीसदी घट गई है।